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प्रथम राज्य स्तरीय गौरक्षा सम्मेलन

दिनांक
02/03/2019
स्थान
जयपुर


मुझे बहुत ही ख़ुशी हो रही है आप सबको यहाँ पर देखकर के ये नजारा जो दिख रहा है इस हॉल के अंदर ये अपने आप में एक बहुत बड़ा सन्देश देता है प्रदेश को और देश को भी और इसके लिए मैं प्रमोद जैन भाया जी को बधाई देता हूँ कि जिन्होंने आगे बढ़कर के आप सबको याद किया व्यक्तिगत रूप से रूचि लेकर के इस प्रोग्राम को आयोजित किया गया और यही कारण है कि आप लोग इतनी बड़ी तादाद में आने में आप लोग तैयार ही नहीं हुए बल्कि आना स्वीकार किया। आपको विश्वास था कि जब हम लोग पिछली बार सरकार में थे मेरे मुख्यमंत्री काल में आप में से कई साधू-संत आये थे और गौशालाओ को कैसे अनुदान मिले, गौवंश का कैसे संरक्षण हो इस बारे में मुझ से चर्चा करी थी। पथमेड़ा के महाराज साहब दशानंद जी महाराज साहब तो कहते ही रहते थे उसके अलावा भी जिस रूप में मैंने देखा है विभिन्न गौशालाओ में जो लोग सेवा करते है मैंने जिन्दगी में अनुभव किया की वो गौ माता को मानकर के जो हमारे संस्कार है, संस्कृति है, पुरानी परम्पराएँ है गौमाता है हमारे जीवन में स्थान है उसको अपने आप को समर्पित करके सेवा करते हैं, ताजीवन सेवा करते है और गौमाता का जो स्थान हमारे दिलों में हैं वो देश और पूरी दुनियां जानती है आप जो ये सेवा का काम करते है इसके लिए मैं अपनी और से आप सबकी और से मैं आपको साधुवाद देता हूँ, बधाई देता हूँ और आपके प्रति शुभकामनाएँ करता हूँ की आप ये और बड़े रूप में करते जाए।

सरकार की तरफ से जैसे प्रमोद जैन भाया जी ने कहा, कटारिया जी ने कहा, विश्नोई जी ने कहा आप निश्चिंत रहे जिस सरकार ने पहल करके मेरे ख्याल से देश में पहली बार हुआ होगा की हमने गौ माता के लिए अलग से निदेशालय बना दिया, विभाग बना दिया यह पहली बार हुआ। 125 करोड़ रूपये मैंने अनुदान दिए थे गौशालाओ को 2013 के अंदर और 25 करोड़ रूपये रखे थे निशक्त गायों के लिए, ये शुरुआत जो हमने की थी, सरकार बदल गई हमारी तो नई सरकार ने निदेशालय का नाम बदल कर विभाग कर दिया हमें ख़ुशी है कि हमारे निर्णय को कम से कम उन्होंने बंद नहीं किया चालू रखा। क्योंकि हमारे कई ऐसे निर्णय थे बड़ी बड़ी योजनाएं थी जो ठप्प हो गई थी। मेरा मानना है कि सरकारे बदलती रहती है लोकतंत्र हैं आप लोग माई-बाप होते हो आप तय करते हो कौन कुर्सी पर बैठे चाहे मंत्री हो, प्रधानमंत्री हो, मुख्यमंत्री हो, MLA हो, MP हो, सरपंच हो या चाहे वार्ड पंच हो ये आपके उपर है पर पुरानी कहावत है हाकम बदल जाता है, हुकुम नहीं बदलना चाहिए तब जाके काम आगे बढ़ता हैं तो हमने सरकार छोड़ी, नई गवर्मेंट बनी उन्होंने निदेशालय जो गायों के लिए बनाया मैंने, उसको समाप्त नहीं किया उसका केवल नाम बदला विभाग करके और हम विश्वास दिलाते है की सेस लगाया गया करीब 800 करोड़ रूपये इक्कठे भी हुए, और मैंने पता किया की खर्च कम किया गया करीब 400 करोड़ ही खर्च हुए। मैं चाहूँगा की जो आपकी मांग हैं अभी प्रति पशु जो पैसा मिलता है वो बहुत कम पैसा मिलता है उसे गायों का भला नहीं हो सकता है। 32 रूपये और 16 रूपये ये एक गाय चाहे छोटा पशु हो या चाहे बड़ा पशु हो उसका पेट भरने के लिए संभव नहीं है इस बात का अहसास मुझे और मेरी सरकार को भी है आप निश्चित रहे मैंने विभाग के अधिकारियो को कह दिया है कि पूरी तरह परीक्षण करके हम जल्दी फैसला करेंगे कि कैसे ये राशि इतनी बढाई जाए कि गाय का पेट भर सके तब जाके गाय का भला होगा।

गौशाला के जो आप लोग प्रबन्धक है वो अपने स्वयं का और अपने आस पास में जो दान दाता है, गौभक्त है उनसे चंदा लेके मुश्किल से गौशाला चलाते है उसके बावजूद भी आपको तकलीफ होती हैं की गाय को जितना आप चाहते है चाहे हरा चारा हो अन्य चारा हो पूरा पेट भर जाये आपको भी तकलीफ होती होगी उस तकलीफ का अहसास मुझे भी हैं मेरे साथियों को भी है और प्रमोद जैन भाया को जो हमने गोपालन विभाग का मंत्री बनाया इन्होंने कोई मांग नहीं करी थी मैं जब राहुल गांधी जी से बात कर रहा था तो मेरे दिमाग में आया कि गायों के विभाग का मंत्री कौन होना चाहिए? तो मैंने इनके काम को देखा बारां के अंदर 10 साल पहले ये गौशालाएं चलाते है ये और इनकी धर्मपत्नी उर्मिला जी, पूरी तरह समर्पित है गौशाला के लिए, शानदार गौशाला बनाई है वहां पर और गायो की सेवा करते है जो सेवा होनी चाहिए. गायो की सेवा में चाकरी में कोई कमी नहीं रखते हैं तो मैंने कहा इस काम के लिए उपयुक्त जो मंत्री प्रमोद जैन भाया ही होगा इसलिए इनको बनाया गया। और ये आज आपका नजारा बना करके इन्होने सिद्ध कर दिया की मेरा निर्णय बिलकुल सही निर्णय था इनके पक्ष में।

तो आप निश्चित मान के चले शुरुआत भी हमने करी अनुदान देने की अकाल सूखा पड़ गया 6-7 जिलो के अंदर वहां भी हमने चारे के डिपो खोलने का, गाय के केम्प खोलने का हमने निर्णय किया है जल्दी ही वहां यह काम शुरू होगा ये मैं विश्वास दिलाता हूँ आपको। ये संवाद का जो कार्यक्रम रखा गया हैं अपने आप मैं ये बड़ी उपलब्धि है आपके साथ में संवाद करके आपने जो ज्ञापन दिए है उन ज्ञापन के माध्यम से जो सुझाव आयेगे मैं आपको यकीन दिलाता हूँ की प्रमोद जैन भाया जी अपने विभाग में तमाम सुझावों का जो संवाद हुआ उसकी भावनाओ का, साधू-संत जो हमारे पूज्यनीय यहाँ पर बैठे हुए है उनकी भावनाओं का समावेश करते हुए अच्छी से अच्छी नीति क्या बन सकती है गौशालाओ के लिए उसमे कोई कमी नहीं आएगी उसका मैं आपको यकीन दिलाना चाहता हूँ। गौचर भूमि हो उसकी प्रायोरिटी गौशालाओ के लिए मिलनी चाहिए। गौचर भूमि और चारागाह भूमि मैंने सुना है की कोई ऐसा मेरी जानकारी मैं नहीं आ पाया पहले की उसको गौचर और चारागाह के अलावा बेचने का कोई निर्णय हुआ होगा बहुत पहले मैं उसको दिखावा रहा हूँ मुझे अभी-अभी लालचंद कटारिया जी ने कहा था और ये मेरा मानना है कि हमारे बाप दादाओ ने आजादी के पहले से ही सोच समझ करके पशुधन के लिए चारागाह भूमि औरगौचर भूमि का जो प्रावधान किया वो सोच समझ करके किया हुआ होगा। आज भी हमारी कोर्ट कचहरी भी कहती है उसका संरक्षण होना चाहिए और आप सब सहमत होंगे की गौचर भूमि का संरक्षण हो उसको बढ़ावा मिले और पशुधन हमारा जो है चाहे वो गाय हो, भैंस हो, बकरी हो, ऊंट हो कोई भी हो उसको कोई तकलीफ नहीं होनी चाहिए। इसी लिए हमने आपको याद होगा पिछली बार जब मैं मुख्यमंत्री था तब हमने निशुल्क दवा योजना प्रारम्भ की थी मनुष्यों के लिए, मुफ्त हमने जांचे शुरू करी थी डायलिसिस की भी, सोनोग्राफी की भी, खून की जांच तो हमने पशुओ का भी ख्याल रखा तो हमने पशुओ के लिए भी निशुल्क दवा योजना शुरू की थी आपको याद होगा, पहली बार देश में हुआ है वो। हमने कहा हमारे बारे में कई बाते की जाती थी ये तो जो दवाइयां फ्री हो रही है, जांचे फ्री हो रही हैं, एक रूपये किलो गेहूं दिया जा रहा हैं जितने भी हमारी अच्छी स्कीम थी उसको हमारे विपक्षी लोगो ने बदनाम भी किया किये तो रेवड़ियाँ बंट रही है। मैंने कहा कोई रेवड़ियाँ नहीं बंट रही है हमारी जनता का अधिकार हैं लोकतंत्र में, सोशियल सिक्योरिटी, सामाजिक सुरक्षा देना सरकार का कर्तव्य है प्रत्येक इन्सान को। कोई आदमी भूखा नहीं रहे, भूखा नहीं सोये रोटी, कपडा, मकान उनका अधिकार हैं वो हम देने का प्रयास कर रहे थे और मैंने कहा उस वक्त में की आप कहते हो रेवड़ियाँ बंट रही है चुनाव जीतने के लिए तो पशुधन तो गाये, भैंस, बकरी तो कोई वोट देती नहीं है हमने उनकी दवाइयां भी फ्री करी ये नहीं बोलना चाहिए। इस रूप में हमने तमाम फैसले जनकल्याण कारी थे वो किये सब आपकी जानकारी के अंदर है।

इसलिए मैं कहना चाहूँगा की गौशालाएं आत्मनिर्भर बने, स्वावलंबी बने सरकार की भी एक सीमा होती है और जो सरकार के साथ में समाज सहयोग करता हैं तो जाके कोई भी परियोजना ज्यादा कामयाब होती है। सरकार अगर गौशाला खोल दे और आप यहाँ जो बैठे हुए हो गौभक्त आप का इन्वॉल्वमेंट नहीं हो तो सरकारी कर्मचारियों के आधार पर गौशालाएं कभी नहीं चल सकती। इसका मायने हुआ आपका गौरक्षण में, गौसंरक्षण में गायो की सेवा करने में आपका जो योगदान है वो अमूल्य है उसकी कोई कीमत नहीं हो सकती यह मैं निदेवन करना चाहता हूँ।

इसलिए हम चाहेंगे कि अल्टीमेटली गौशालाएं आत्मनिर्भर बने कई गौशालाओं में दुधारू पशु भी होते हैं, दूध भी देते हैं घी बनता है, डेयरी बनाई गई है तो उसका अपना उपयोग है। गौशालाएं कई दूध भी, घी भी बेचती भी है हमारा प्रयास होना चाहिए कि हम गौशाला चलाये तो इस प्रकार का मैनेजमेंट करें कि सरकार भी सहयोग करे, समाज भी सहयोग करे हमारी अपनी आमदनी भी हो जिससे कि गौशालाएं आत्मनिर्भर बने और आपको काम करने का आपकी हौसलाफजाई भी हो। इस रूप में मैं समझता हूँ कि हमें आने वाले वक्त में काम करना हैं।

आवारा पशु की बात की जाती है ये समस्या बहुत बड़ी समस्या है, आप में से कई लोग किसान होंगे आपने देखा होगा कि आवारा पशु को आम जनता भी कई बार शिकायत करती है क्योंकि कई बार एक्सीडेंट होते है, गायो को भी चोट लगती है कई बार गाय मर जाती है, बछड़ा मर जाता है कई बार मनुष्य भी मर जाता है ये समस्या रहती है। अभी प्रमोद जैन भाया बोल रहे थे इनका संकल्प है की वो कैसे इस समस्या का समाधान हो। हम आपका सहयोग भी चाहेंगे आपने सुझाव दिया उसको हम देखेंगे हम चाहेंगे की कोई ऐसे तरीके निकाले जिसके की गो पशुपालकों को भी जो दूध देती है गाय तब तक तो उसको घर में रखते है, दूध नहीं देती है तो उसको छोड़ देते है ये अच्छी बात नहीं है। जब गौमाता को हम माता मानते है तो माँ को कैसे छोड़ सकते हो आप, दूध नहीं दे तो आप, कैसे छोड़ सकते हो? हमें चाहिए की उसकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है। सरकार योजना ऐसे बनाएगी कैसे ऐसे पशु को अगर दूध नहीं देती है परिवार की केपिसिटी नहीं है कोई रास्ता निकाले, गौशाला में उनको भेजे अनुदान सरकार दे रही है, थोडा अनुदान वो खुद दे परिवार वाले सरकारी अनुदान गौशाला के प्रबंधनक सेवा करते है वो सहयोग, खुद कुछ कोंट्रीब्युट करे अपनी गाय को भेजे गौशाला में, कुछ सरकार करेगी, कुछ प्रबंधक करेगे तो तकलीफ गाय को नहीं आएगी। गाय अगर फिरती है आवारा गलियों में, चारा मिलता नहीं है तो क्या क्या वो घास-फूस खाती है वो आप सबको मालूम हैं. कितनी तकलीफ भी रहती होगी उसकी तकलीफ को भी हमें गौशालाओं में गाये नहीं रहती है आवारा फिरती है गली-मोहल्ले के अंदर उसपे क्या बीतती होगी? एक तरफ तो जो गौशालाओ में आ गई उसके लिए हम अपनी जान लगा रहे है और दूसरी तरफ वो ही गौवंश, वो ही गाये गली मोहल्ले में फिरकर के कचरा खाती है उसको हम कैसे देख सकते है? ये पूरे समाज का कर्तव्य है हम उन गायो को कैसे संभाले, सार संभाल करें। खेतो में कैसा नुकसान होता है पशुधन का उनका कोई प्रबन्धन करे और मैं कहुँगा कि प्रमोद जैन भाया की जो सोच है वो सोच आगे बढ़ेगी और कोई ऐसी योजना बने राजस्थान भर के लिए किसानों को भी आवारा पशुओ की तकलीफ नहीं हो, रोजड़ो की तकलीफ बहुत बड़ी है उनके सामने वो नील गाय कहलाती है उससे तकलीफ नहीं हो। गायो की हम लोग और ज्यादा सेवा कर सके ये तभी संभव है जब हम लोग सब मिलकर के इन कामो को आगे बढ़ाये।

इसलिए मैं आपको कहने को तो बहुत सारी बातें है किस प्रकार गौवंश में भूर्ण प्रत्यारोपण के माध्यम से अच्छी नस्ल की गाये पैदा हो तमाम हमारी योजनाओ में है विभाग इसको दिखवा रहा है। मुझे कहने की आवश्यकता नहीं है। नंदी गौशालाएं खोलने की बात जो हैं जिन जिलो में निराश्रित पशु जो है, निशक्त है, अपंग हैं उनके लिए सरकार योजनांए बना रही है इस प्रकार से आज जो पुरस्कृत किया गया है वो तीनों गौशालाओ को मैं बधाई देना चाहूँगा आप सबकी और से ये तो एक मोटिवेट करने का, प्रोत्साहन करने का तरीका है और नई शुरुआत करी है पहली बार संवाद का प्रोग्राम रखा गया है ये भी अभिनव प्रयोग है। मेरे ख़याल से देश में कहीं भी गायों को लेकर इतने बड़े रूप में संवाद पहली बार हो रहा होगा, इस बात का मुझे फ़ख़्र है, गर्व है खुशी है....इसको हम और मजबूत करेंगे और जब भी कभी अवसर मिलेगा इससे भी बड़ा कार्यक्रम करने का प्रयास करेंगे। समय-समय पर जो भी आपकी सलाह हो वह मंत्री जी को लिखकर भेजें सरकार हमेशा आपको महसूस करवाएगी कि आपके साथ खड़ी है यह मैं विश्वास दिलाता हूँ। यही बात कहता हुआ मैं फिर कहना चाहूँगा की मेरे पास की आंकड़े है अभी जो अनुदान मिलता हैं अनुदान से गायो का पेट नहीं भर सकता मुझे मालूम है मैं कह चूका हूँ और इसलिए इन तमाम कामो को हम लोग आने वाले वक्त में और आगे बढायेगे और किस प्रकार से आपको मदद कर सके।

अनुदान बाकी गौशालाओ का जनवरी, फरवरी, मार्च का मैंने अपने वित्त विभाग को कह दिया है कोई तकलीफ भी है थोड़ी बहुत हो तो क्यों कि बड़े बड़े फैसले सरकार ने किये है अभी किसानो के कर्जे माफ़ किये है, और भी कई फैसले किये है इसलिए मैंने कहा है कि आप गौशालाओ का जो अनुदान है उसको आप रोको मत और जल्दी की उसको रिलीज करे जिससे कि आपको सहयोग मिल सके। ये काम भी हम जल्दी ही करवाएंगे वो अनुदान आपको जल्दी ही मिलने लग जायेगा और मैं आपको आश्वासन देता हुआ आपको मैं धन्यवाद देता हूँ की आप लोग बहुत ही शानदार तरीके से आप लोग इस गौरक्षा सम्मलेन का आगाज किया हैं और जो जो हमारे यहाँ पर व्यापारी है, उद्योगपति है, समाजसेवी है दो पैसा कमाने वाले लोग हैं उन सबको मैं आह्वान करूँगा की वो अपने काम धंधे के साथ साथ में गौरक्षा के लिए भी आगे आये, गौशालाओ को अनुदान दे समय समय में उनकी मदद करे।

मैं गया था नाथद्वारा के अंदर एक मदन पालीवाल जी हमारे वहां पर हैं मिराज के उनकी खुद की गौशाला को मैंने देखा और मैं बहुत प्रभावित हुआ, मुरारी बापू भी वहां आये थे पर ये उद्योग धंधा करने वाले की रूचि गौशाला में हो यह अच्छी बात है ऐसे कई लोग आगे आएँगे तो मैं समझता हूँ कि आप लोगो का काम आसान हो जायेगा यही बात कहता हुआ मैं आप सबको और इस आयोजन के प्रबधंक प्रमोद जैन भाया जी को, तमाम इनके विभाग के अधिकारियों को बधाई देता हूँ कि आप सबके सहयोग से बहुत शानदार प्रोग्राम आज संभव हुआ। धन्यवाद....जय हिन्द।

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