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Congress President Smt. Sonia Gandhi in discussion with 7 state Chief Ministers:

दिनांक
26/08/2020
स्थान
जयपुर


आदरणीय परमश्रद्धेय सोनिया जी और माननीय तमाम मुख्यमंत्री साथीगण, अच्छा लगा, मैडम ने अच्छा किया याद किया और हम सब एकसाथ में बातचीत करने का माध्यम बन सके। मैं इस मौके पर मैडम मेरे साथियों को यही कहना चाहूंगा, सब लोग एक- सी स्थिति से गुजर रहे हैं और जब डेमोक्रेसी की बात करते हैं, अगर डेमोक्रेसी मजबूत दिखती तब तो ये सब बातें करने का उसका लाभ मिलने का उम्मीद होती है, पर इस सरकार से क्या उम्मीद करें? क्योंकि जबसे सरकार बनी है 2014 में, तब से ही रवैया जो सरकार का है वो इस प्रकार का बन गया है कि लोगों को घुटन महसूस हो रही है कि कहें तो किसको कहें और कहें तो कोई सुनेगा क्या? ऐसी स्थिति में हम लोग चल रहे हैं, ऊपर से कोरोना आ गया। सबको मालूम है कि अर्थव्यवस्था की स्थिति, पहले से ही इकोनॉमिक स्लोडाउन था। इकोनॉमिक स्लोडाउन तो यूपीए गवर्नमेंट के वक्त में भी आया था, परंतु तत्काल कदम उठाए गए तो कम से कम इम्पैक्ट बहुत कम रहा देश के अंदर, जब डॉ. मनमोहन सिंह जी प्राइम मिनिस्टर थे तब आपने उस वक्त में देखा कि किस प्रकार से फैसले कई पास हुए थे, वो तो इतिहास में दर्ज हो गए चाहे वो आरटीआई था, चाहे आरटीई था, चाहे फूड सिक्योरिटी एक्ट था और चाहे नरेगा था। आज नरेगा और फूड सिक्योरिटी एक्ट ही बचाए हुए हैं, बहुत बड़ा इम्पैक्ट पड़ गया है, परंतु दुःख इस बात का है कि कोरोना से जो स्थिति बनी है राज्यों की, पूरी लड़ाई राज्य सरकारें लड़ रही हैं और केंद्र सरकार से खाली वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अलावा और कुछ नहीं हुआ। जो हमने सुझाव दिए थे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अंदर, उन सुझावों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया और तो और जो 20 लाख करोड़ का पैकेज घोषित किया गया, वो भी खाली एक प्रकार से लोन के आधार पर है, जिसका कोई इम्पैक्ट नहीं है, कोई ग्रांट नहीं है, सब्सिडी नहीं है और मैं समझता हूं कि राज्यों की स्थिति बिगड़ती जा रही है। जो हमने वादे किए थे जनता से जब बजट पेश किया था, कमिटमेंट हमारे थे, सबको मालूम है कि इसके कारण से जो रेवेन्यू है वो 40 पर्सेंट मुश्किल से रह गई है राज्यों की और बिना केंद्र के सहयोग से राज्य सरकारें जो कमिटमेंट अपना पूरा कर नहीं सकतीं। हमने अपना बजट जो बनाया हुआ है उसमें कटौती करनी पड़ रही है, मेजर्स हम अलग उठा रहे हैं। लॉकडाउन लंबे समय तक चला उसके कारण भी स्थिति बिगड़ गई सब जगह चाहे दुकानें, व्यापार हो, इंडस्ट्रीज हों सब बंद हो गए, वक्त लगेगा क्योंकि श्रमिकों की अलग प्रॉब्लम्स हैं, रेवेन्यू रिकवर होने में वक्त लगेगा।
तो तमाम मेरे पूर्व साथियों ने जो बातें बताई हैं, वो हकीकत में हैं कि आज जीएसटी जो वादा किया हुआ है केंद्र सरकार का, आज हमारे स्टेट में करीब 6 हजार 990 करोड़ रुपए बकाया हो गए हैं और उसका कोई जवाब नहीं है। कोई 25-30 लैटर हमने लिखे होंगे प्रधानमंत्री जी को, जवाब आज तक नहीं है वहां से। अगर कोई मुख्यमंत्री पत्र लिखे उसका जवाब ही नहीं आए, तो फिर क्या उम्मीद कर सकती है सरकार? जो वादे किए गए थे जीएसटी को लेकर वो पूरे हो नहीं रहे हैं, हम तो मांग कर रहे थे कि 5 साल और बढ़ाया जाए, मांग किससे करें ? जब जो अभी जीएसटी हमें मिलनी चाहिए मंथली वो भी नहीं मिल पा रही है। हमने मांग की थी कि बॉरोइंग जो मिलती है, जो हमारे संविधान में लिखा हुआ है, जीडीपी का हम चाहते थे कि 3 पर्सेंट की बजाय 5 पर्सेंट मिले स्टेट जीडीपी का। अलाऊ किया पर शर्तें ऐसी लगा दीं जो शर्तें कभी पूरी नहीं हो सकतीं। हमने सिंपल मांग की कि मॉरेटोरियम की कि राज्य सरकारों पर जो कर्जे हैं भारत सरकार की एजेंसियों के, पॉवर फाइनेंस कॉर्पोरेशन से या अन्य एजेंसियां जो हैं, खाली 6 महीने का मॉरेटोरियम चाहिए, उसकी परवाह नहीं की गई। आरबीआई देती है वेज एंड मीन्स में एडवांस देती है, हमने कहा खाली ब्याजमुक्त कर दो कोरोना के अंदर, उसकी परवाह नहीं की गई। अभी स्थिति ऐसी बन गई है राज्यों कि Liquidity की प्रॉब्लम आने लग गई किस प्रकार हम तनख्वाह चुकाएंगे टाइमली, वो सवाल हमारे सामने खड़ा है और तो और जो सीएसएस की स्कीम होती है सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम, उसपर जो पहले फॉर्मूला था उसको बदल दिया गया, जो पहले आराम से पैसा मिलता था तो हम भी अपना रेश्यो लगाकर खर्च करते थे। अब उन्होंने जो फॉर्मूला बदला है वो नीड बेस कर दिया है। उससे और ज्यादा मुसीबत पैदा हो गई है कि राज्यों में सीएसएस के काम जो हैं वो हो नहीं पाएंगे। और तो और जो हिस्सा मिलता है केंद्रीय करों में हमें, मुझे दुःख है कहते हुए कि इस एक महीने में 800 करोड़ की कमी आ गई है, तो आप सोच सकते हैं कि अगले महीनों में क्या होगा। तो चारों ओर से हम लोग घिरे हुए हैं और सरकार को तो परवाह इन बातों की है नहीं, सरकार को परवाह है सरकारें गिराएं कैसे? जैसे उन्होंने कर्नाटक में खेल खेला, मध्यप्रदेश में खेल खेला, राजस्थान की बारी आपके आशीर्वाद से बच गए हम लोग, पर जो सुनते रहते हैं कि चाहे महाराष्ट्र हो चाहे झारखंड हो चाहे वो कोई राज्य हो उनकी बारी कैसे लगे ? जब भी हम ये बातें सुनते हैं तो आप सोच सकते हैं कि देश में क्या होगा? इन स्थितियों में हम लोग चल रहे हैं जो बहुत ही चिंता का विषय बना हुआ है। मैडम, सरकार को परवाह ही नहीं है, चाहे कोई एक्सपर्ट कितनी ही बात कह दे देश के अंदर, इकोनॉमिस्ट कुछ भी कह दें, आरबीआई के गवर्नर रहे हुए कुछ भी कह लें और तो और पीएम के जो एडवाइजर थे इकोनॉमिक के उनकी अपनी राय आ गई पर फिर भी सरकार को कोई चिंता ही नहीं है। मुझे पता नहीं आर्थिक व्यवस्था को लेकर, लोगों को विश्वास ही खत्म हो गया है कि सरकार उसके बारे में कोई विचार भी कर रही है कुछ सोच भी रही है कि क्या होगा राज्यों का। स्थिति बड़ी कठिन होती जा रही है और हर फैसले उलटे हो रहे हैं। पेट्रोल-डीजल के दाम, मेरे पास आंकड़े हैं कि किस प्रकार से एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई जा रही है लगातार, सेस और सरचार्ज बढ़ाए जा रहे हैं 115 डॉलर प्रति बैरल से लगाकर 19 डॉलर पर आ गए, तब भी लगातार प्राइस बढ़ रही हैं, पूरा पैसा केंद्र सरकार ले रही है, इस प्रकार से स्थिति बन गई है। तो ये स्थिति में हम लोग चल रहे हैं।
कोरोना में जो काम किया है वो बेमिसाल किया है राज्यों ने इसमें कोई दो राय नहीं है। आपके आशीर्वाद से हम लोगों ने भी यहां पर सोशल कमिटमेंट भी पूरा किया, हैल्थ का इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाया है हम लोगों ने और आज स्थिति ये है कि राजस्थान वो राज्य है जहां पर पॉजिटिविटी की रेट यहां पर 3.38 पर्सेंट है और जो सबसे अच्छी रेट है यहां पर, बाकी जगह पर देश में लगभग 8.78 पर्सेंट है, मॉर्टेलिटी रेट जो है राजस्थान में 1.34 पर्सेंट है यहां पर जो सबसे कम है देश के अंदर। और तो और रिकवरी रेट जो है उसके लिए इतने अच्छे प्रयास किए हैं कि हमारे यहां पर पहले पुणे दिल्ली जाती थी टैस्टिंग, अब करीब 50 हजार टैस्ट पर डे हो रहे हैं और हमने ऑफर किया है पड़ोसी राज्यों को भी कि जो भी जरूरत है आप हमारे यहां से टैस्ट करवा सकते हैं। रिकवरी रेट 79.27 पर्सेंट है। तो ओवरऑल हमारे कोरोना को लेकर हम लोगों ने काफी कुछ किया है, उसका मैं समझता हूं कि अच्छा इम्पैक्ट भी है। जनता को सोशल सिक्योरिटी में हमने पेंशन भी कायम रखी, 6 पेंशन दे दी हम लोगों ने, साथ में हम लोगों ने जो डेस्टिट्यूट थे उनके लिए अलग से व्यवस्था की, करीब हमने 32 लाख लोगों को 3 किश्तों में हमने साढ़े तीन हजार रुपए दिए, गेहूं फ्री दिए हैं, दालें फ्री दे रहे हैं, परंतु स्थिति जो विकट बनी हुई है, उसको देखकर हमें चिंता हो रही है कि आने वाले वक्त में अगर भारत सरकार ने टाइमली कदम नहीं उठाए तो स्थिति और बिगड़ सकती है, कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है क्योंकि अभी तक तो हमने इतना अच्छा काम किया है कि पब्लिक में भी शांति बनी रह, सब तरह से, दानदाताओं के सहयोग से, भामाशाहों के सहयोग से, सोसायटी आगे आईं, एक्टिविस्ट्स आगे आए, कुछ कमी नहीं रखी, लोगों में कॉन्फिडेंस रहा कि भई सरकार हमारे लिए कुछ कर रही है, पर जिस प्रकार के हालात बना रखे हैं, उसपर मेरा मानना है कि मैडम पहले भी आपने एकबार अकाल-सूखा पड़ा था, तब आप हमें सभी मुख्यमंत्रियों को लेकर गई थीं प्राइम मिनिस्टर के पास में, वाजपेयी जी थे प्राइम मिनिस्टर। उस वक्त में आपने देखा कि बड़ा इम्पैक्ट भी पड़ा था, काफी कुछ हम लोगों को सहूलियत मिली थी, वक्त आ गया है, मुझे लगता है कि हमारे जितने भी मुख्यमंत्री साहेबान हैं, हम सब आपके साथ चलें, या तो प्राइम मिनिस्टर से मिलें, अपनी बात कहें, राष्ट्रपति से मिलें। हमें एक इश्यू बनाना पड़ेगा, इश्यू बनाए बगैर मैं समझता हूं मैडम ये ध्यान देने वाले नहीं हैं। और स्थिति बड़ी विकट हैं, जितना हम बोल रहे हैं उससे ज्यादा विकट स्थिति है। मुख्य बातें मेरे पूर्व वक्ता बोल चुके हैं, उन बातों को मैं वापस रिपीट नहीं करना चाहता हूं, पर मैं इतना कह सकता हूं कि आम जनता दुःखी है, वो खुद चिंतन में है चिंता में है, सरकार कुछ ध्यान दे नहीं रही है, इकोनॉमिक स्थिति बिगड़ती जा रही है, महंगाई बढ़ती जा रही है, पर्चेजिंग पॉवर लोगों के पास है नहीं, मगर फिस्कल डेफिसिएट के जरिए हम चल रहे हैं और अगर हमने पर्चेजिंग पॉवर नहीं बढ़ाई लोगों की, पंप नहीं किया पैसे को, तो दुकानदारों का सामान बिकेगा ही नहीं तो फैक्ट्रियां कैसे चलेंगी। तो सवाल यह है कि जब तक सरकार आगे आकर इम्दाद नहीं करेगी राज्यों को भी और पब्लिक को भी, पैसा नहीं जाएगा उनकी जेब के अंदर, पर्चेजिंग पॉवर नहीं बढ़ेगी, पूरी इकोनॉमी ठीक होने वाली भी नहीं है। और ये बात समझ में नहीं आ रही है, मैं समझता हूं कि पता नहीं क्यों नहीं आ रही है। सारे इकोनॉमिस्ट क्या बोल रहे हैं सबको मालूम है, ये हमारे लिए बहुत चिंता का विषय बना हुआ है। इसलिए मैडम मैं इतना ही कहना चाहूंगा कि ये जो बात हुई है, एक्जाम के लिए, सबकी राय एक जैसी ही है, इसका खुद एक्जाम्पल आ रहा है अमेरिका का भी आ रहा है। ऐसी स्थिति में सुप्रीम कोर्ट में भारत सरकार को खुद को जाना चाहिए। जब आम राय लोगों की है कि गवर्नमेंट ऑफ इंडिया खुद जाए सुप्रीम कोर्ट में, वहां रिव्यू पिटीशन लगाए और कोई रास्ता निकाले जिससे कि ये जो प्रॉब्लम आई है वो हल हो सके। बाकी जो आपने हमें पत्र भी लिखा है पर्यावरण को लेकर, उसके ऊपर हम लोग, हम लोगों ने भारत सरकार पर दबाव डाला भी है, हम चाहते हैं कि उसके ऊपर कार्रवाई हो, वरना आने वाले वक्त में तकलीफ हो सकती है। इस प्रकार की स्थिति जिसको हम कहते हैं कि फैडरल स्ट्रक्चर देश के अंदर है पर उसकी धज्जियां उड़ रही हैं। इस प्रकार से सरकार का बिहेवियर है सबसे साथ में, वो उचित नहीं कहा जा सकता। डेमोक्रेसी के अंदर पॉलिटिकल पार्टी की बात सुननी पड़ती है, सबकी बात सुननी पड़ती है, पर ये सरकार जो है, उसको कोई, अपना एजेंडा जो आरएसएस का है, उससे मतलब है। एजेंडे को पूरा करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, परंतु जो चिंता वास्तव में होनी चाहिए सरकार को राज्यों की क्या स्थिति बनी है उसको देखते हुए, कोरोना को देखते हुए, उसकी कोई चिंता नहीं है और ये बात हम सबके लिए बहुत ही चैलेंजिंग बात हो गई है। मैं चाहूंगा मैडम कि सबकी राय बने कि हम लोग जाकर बात करें और दो-टूक बात बताएं कि स्थिति ये बनी हुई है, आंकड़े क्या कहते हैं, सबके सामने है। खाली तथ्यों के ऊपर बात हम कर रहे हैं, कोई पॉलिटिकल बात नहीं कर रहे हैं, स्थिति ऐसी बिगड़ गई है राज्यों की कोई सोच नहीं सकता है। ये स्थिति है इसलिए मैं आपको शुक्रियादा करूंगा कि आपने अच्छा कि कम से कम हम सबको एकसाथ में बैठाया, बातचीत की।....... धन्यवाद।

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