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चित्तौड़गढ़ एवं श्रीगंगानगर में Medical Colleges का शिलान्यास कार्यक्रम:

दिनांक
09/05/2021
स्थान
जयपुर


मुझे खुशी है कि आज श्रीगंगानगर एवं चित्तौड़गढ़ में राजकीय मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास संभव हुआ। मैं सबसे पहले अपनी ओर से, अपने पूरे प्रदेशवासियों की ओर से हर्षवर्धन जी का और अश्विनी चौबे साहब का हार्दिक स्वागत करता हूं कि वे समय निकालकर इन दो कॉलेजों के शिलान्यास के वक्त में उपस्थित रहे, इससे मैं समझता हूं कि हमारे मेडिकल फ्रेटर्निटी के लोगों का भी हौसलाफजाई होगा और जो जंग लड़ी जा रही है अभी कोरोना की और जिसके लिए अभी आपने भी कहा और मेरा भी मानना है कि अभी तो ऑक्सीजन और दवाइयों को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। पर 13 महीने हो गए हैं, 13 महीनों में डॉक्टर्स, नर्सेज, कंपाउंडर उनकी भी एक सीमा होती है और आने वाले वक्त में हमने अगर कोरोना को रोका नहीं, जैसा कि मैंने प्रधानमंत्री जी के सामने वीसी में कहा था और मेरी जब उनसे टेलीफोन से वार्ता हुई तो उन्होंने इस पॉइन्ट को एप्रिशिएट किया कि आपने कहा कि हम कितनी ही कोशिश कर लें, ऑक्सीजन, दवाइयां, आईसीयू बेड बढ़ा दें, वेंटिलेटर बढ़ा दें, परंतु अगर संख्या जो आ रही है संक्रमित होकर, उसपर रोक नहीं लगेगी तो ये कितना ही कोशिश करने के बावजूद भी ये कम पड़ते जाएंगे। इसलिए चुनौती बहुत बड़ी है और फॉर्च्यूनेटली हर्षवर्धन जी आप ठीक कह रहे थे, अटल बिहारी वाजपेयी जी के वक्त में भी मैं मुख्यमंत्री था राजस्थान का 20 साल पहले और डॉ. मनमोहन सिंह जी के वक्त में भी मैं मुख्यमंत्री था, तो मुझे याद है जब वाजपेयी जी थे तब आपने जिक्र किया एम्स का, जोधपुर को भी एम्स मिला था उस वक्त में तो मेडिकल हैल्थ के क्षेत्र में भी जो शुरुआत हुई थी उस वक्त में, वो शुरुआत लगातार कंटीन्यूअस रही है। पहले एम्स की शुरुआत हुई, उसके बाद में मिस्टर गुलाम नबी आजाद थे जब डॉ. मनमोहन सिंह जी के वक्त में, तब भी मेडिकल के फैलाव के लिए किस प्रकार से नए कॉलेज खुलें उसकी स्कीम बनी। मुझे याद है उस वक्त में मैं जब दूसरी बार मुख्यमंत्री था तब भी हमें 8-9 मेडिकल कॉलेज मिले थे और मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि जब नई सरकार आई मोदी जी की और आप स्वास्थ्य मंत्री बने, तो आपने पूरी तरह स्वास्थ्य के क्षेत्र के महत्व को समझते हुए उसको आगे बढ़ाया और उसी का परिणाम है कि आज एक साथ 15 मेडिकल कॉलेज मिलना बड़ी बात है राजस्थान को और हमने भी जो 60:40 का रेश्यो था, राज्यों की स्थिति अच्छी नहीं होती है, उसके बावजूद भी हमने मंजूर किया कि हमारे हर जिले में मेडिकल कॉलेज खुले। रघु शर्मा जी ने कहा, मैं समझता हूं कि आप उसपर विचार करेंगे, खाली तीन जिले बच गए हैं हमारे राजसमंद, प्रतापगढ़ और जालौर। वहां के लोग भी ये उम्मीद करते हैं कि जब सब जिलों में बन रहा है तो हमारे यहां भी बने मेडिकल कॉलेज, मैं उम्मीद करता हूं कि जो सोच आपकी है, आप खुद डॉक्टर हैं और राजस्थान ही ऐसा राज्य है देश के अंदर जो आज सबसे बड़ा प्रदेश है देश के अंदर क्योंकि जबसे छत्तीसगढ़ बना है तबसे राजस्थान सबसे बड़ा राज्य बन गया है देश का, परंतु हमारे यहां रेगिस्तान के इलाके, भू-भाग बहुत लंबा-चौड़ा है, दूरियां बहुत दूर-दूर हैं, रेगिस्तान के इलाके हैं, वहां कॉस्ट ऑफ डिलीवरी जो होती है, पानी पहुंचाना हो, बिजली पहुंचाना हो, स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना हो, सब सेंटर, पीएचसी, सीएचसी खोलना हो, सड़कें बनानी हों, तो कई गुना ज्यादा पैसा खर्च होता है। ऐसे राज्य में केंद्र सरकार को, हम बराबर मांग करते रहते हैं कि हमें प्रायोरिटी मिले पहाड़ों की ही तरह कि किस प्रकार हम लोग ज्यादा कॉस्ट खर्च करते हैं तो राज्यों की सीमा होती है, हमारी भी 90:10 के अंदर स्कीम आनी चाहिए सीएसएस की, चाहे कोई स्कीम हो और मैं उम्मीद करता हूं कि जो कुछ भी फैसले हो रहे हैं, आपने ठीक कहा कि चाहे वो एमबीबीएस की सीटें बढ़ाने की बात हो, पीजी की सीटें बढ़ाने की बात हो, चाहे स्पेशियलिटी की सीटें बढ़ाने की बात हो, लगातार बढ़ती जा रही है और एक कॉन्फिडेंस बढ़ता जा रहा है मेडिकल सेक्टर के अंदर कि हम लोग मजबूती के साथ में इस सेक्टर को मजबूत कर पाएंगे और हमारी सरकार भी, मुझे याद है कि पिछली बार जब मैं जिम्मेदारी संभाल रहा था, तब हमने पहली बार प्रयोग किया देश में फ्री मेडिसिन्स का, फ्री टैस्ट का, डायलेसिस हो, सीटी स्कैन हो, एमआरआई हो, सोनोग्राफी हो, ब्लड टैस्ट हो और बहुत कामयाब रहा। उसके बाद में जब पुनः मौका मिला मुझे, तो हम लोगों ने एक नारा दिया निरोगी राजस्थान, उसके लिए हमने लॉन्च किया बाकायदा उसको, डॉ. देवी शेट्टी आए बैंगलूरु से, डॉ. सरीन आए दिल्ली से और हमने एक माहौल बनाने का प्रयास किया कि जैसे डब्ल्यूएचओ की भावना है, प्रिवेंटिव केयर, प्राइमरी केयर और क्योरेटिव केयर, कि किस प्रकार से हम लोग प्रिवेंशन की तरफ ध्यान दें कि बीमारी नहीं हो किसी को और बहुत अच्छे ढंग से हमने स्वास्थ्य मित्र बनाने का प्रयास किया, हर गांव में एक महिला एक पुरुष और कैसे पब्लिक को इन्वॉल्व करें, उसी रूप में हमारी तैयारी रही। परंतु दुर्भाग्य से दिसंबर में लॉन्च किया और फरवरी-मार्च के अंदर कोरोना आ गया बीच के अंदर ही, तबसे आप और हम लोग सब एक ही नाव में चल रहे हैं और बिलकुल ठीक कहा गया है कि अभी तो मानवता को बचाने की दरकार है, इन्सानियत का धर्म है, चाहे कोई धर्म-जाति-वर्ग का व्यक्ति हो, बचे कैसे और पूरे विश्व के अंदर और देश के अंदर जो हालात हैं, वर्तमान पीढ़ी ने 100 साल में सोचा ही नहीं होगा कि हमें ये दिन देखने को मिलेंगे, बहुत बड़ी चुनौती है ये, हम सबके सामने, इसमें राजनीति तो किसी भी रूप में आनी ही नहीं चाहिए और राज्य सरकारें भी अगर आपसे कोई मांग करें या सुझाव दें, या कमी बताएं तो आपको उसको शिकायत के रूप में नहीं लेना चाहिए कि भई फीडबैक मिल रहा है हम लोगों को, उस रूप में लेना चाहिए। हमारी मंशा रहेगी कि हम पूरी तरह, प्रधानमंत्री ने पिछली बार सालभर में 5-6 बार मुख्यमंत्रियों से इंटरेक्शन किया होगा। मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगा, प्रधानमंत्री जी तक हमारी बात भी पहुंचाएं, इस बार भी वो, इस बार भी वो कॉन्फिडेंस के साथ में वापस मैदान में उतरें और लगातार पिछली बार जिस प्रकार उन्होंने लॉकडाउन लगाया था, उसका अनुभव हमारे पास में है कि किस प्रकार मजदूर सड़कों पर आ गए थे, तकलीफ हुई, आर्थिक व्यवस्था चरमरा गई, सबकुछ हुआ, वो अनुभव को काम लेकर इस बार वो कमियां नहीं रहें और एक प्रकार से लॉकडाउन जैसे सब राज्य सरकारें लगा रही हैं, जो छूट दी है भारत सरकार ने, तो करीब-करीब मेरे ख्याल से उत्तराखंड को छोड़कर और गुजरात को छोड़कर पूरे देश में लॉकडाउन लग गए हैं, तरह-तरह के, उससे काम नहीं चलेगा। इंटर स्टेट कई प्रॉब्लम्स आती हैं, अगर केंद्र सरकार अपने स्तर पर बड़ा फैसला करती है पहले की तरह और पहले की कमियों को दूर करते हुए, तो वो पहले वाली शिकायतें कम हो जाएंगी और पूरे देश में एकरूपता के साथ में लॉकडाउन लग पाएगा क्योंकि हालात वास्तव में गंभीर हो चुके हैं। ऑक्सीजन, मैं मानता हूं कि ऑक्सीजन का मैनेजमेंट अपने हाथ में लिया है केंद्र ने, दवाइयों का लिया कि भई हम लोग आराम से डिस्ट्रीब्यूट ढंग से कर सकें बैलेंस करके राज्यों में, हमारी मांग भी यही रही है कि जितने पेशेंट हैं राज्यों में, उसके अनुपात में दवाइयां मिल जाएं, ऑक्सीजन का अलॉटमेंट हो जाए, पर वो इतनी कमी पड़ रही है कि हाहाकार मच गया है पूरे देश के अंदर, आप देख रहे हो रोज टीवी वाले क्या बता रहे हैं। एक तरफ श्मशान के सीन और एक तरफ टैक्सी में भी और एंबुलेंसों के अंदर बैठे हुए लोग हैं, तो ये तकलीफ सबके सामने है और दिल्ली राजधानी है तो आप देख रहे हैं कि सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट अलग-अलग राज्यों के क्या-क्या कमेंट कर रहे हैं।
हम चाहेंगे कि हम सब मिलकर इस जंग को लड़ें और विजय प्राप्त करें, जैसे पहले फेज में हमने विजय प्राप्त की थी तो हमें गर्व हुआ और किसी को मालूम नहीं पड़ा कि वास्तव में यह सैकंड लहर अप्रैल 15 के आसपास भयंकर रूप ले लेगी और इतनी घातक होगी, ये तेजी से फैलती है, दो-तीन-चार दिन में लंग्स में पहुंच जाती है निमोनिया के रूप में, यूथ और बच्चे और महिलाएं ज्यादा इसमें आ रहे हैं सामने और सारी सरकारें लगी हुई हैं, कोई कमी नहीं रख रही हैं, महाराष्ट्र में आप देख रहे हैं कि क्या हुआ, भयंकर, एक तरफ तो आपने हम सबसे आह्वान किया वैक्सीनेशन के लिए और हमने भी आपके आह्वान को स्वीकार करके उसी स्पीड से हम लोगों ने कन्वींस किया लोगों को वैक्सीनेशन के लिए और मुझे गर्व है कहते हुए कि राजस्थान टॉप पर आया था उस वक्त में, महाराष्ट्र और राजस्थान बराबर थे क्योंकि महाराष्ट्र में तो बड़ा वो माहौल ऐसा बन गया था, कोविड की वो जो संख्या आ रही थी संक्रमितों की। तो आप बताइए कि 5 लाख 81 हजार वैक्सीन पर डे पर पहुंच गए थे हम लोग आपके आह्वान पर। उसी रूप में हमने बहुत शानदार तरीके से काम किया वैक्सीनेशन का, वैक्सीन कम आने लग गई तो हमने इत्तिला भी किया आप लोगों को, उसको भी हमारे कुछ साथियों ने शिकायत माना है, शिकायत नहीं होती है। भई कल से केंद्र बंद हो जाएंगे, तो ये आपकी मजबूरी है, जितना अवेलेबल होगा जितना मिलेगा वो ही तो हम लोग दे पाएंगे, तो खाली हमें तो इत्तिला ये मिली है, हमें ये मालूम है, ये कई राज्यों से, 8-10 राज्यों से शिकायत आ गई थी, ओडिशा में 700 केंद्र बंद हो गए थे, मजबूरी आपकी है, वो मजबूरी शेयर होनी चाहिए देश के सामने, पूरा देश आपके साथ में सहयोग करेगा। पर अगर ये खबर आएगी कि साहब कोई कमी नहीं है, हम सप्लाई कर रहे हैं, तो लोगों को लगता है कि कमी तो है, इस प्रकार की कई बार बात आ जाती है। ऑक्सीजन की भी कोई कमी नहीं है, जरूरत और बढ़ गई है, बढ़ तो गई है, पर आप क्या करो, ये कोरोना ऐसा आ गया है, ये कोई आपको-हमको पूछकर तो आता नहीं है, कि जो घातक है। पहले हमारे सारे ऑक्सीजन बेड्स खाली पड़े रहे थे अधिकांश, वेंटिलेटर काम आए ही नहीं थे, 5 पर्सेंट मुश्किल से काम आए होंगे, आपने भिजवाए थे, तब भी काम नहीं आए थे। परंतु इसबार जो है जो पेशेंट आ रहा है गांव से भी, तीन-चार दिन में ही तो लंग्स इफैक्ट होते हैं, 80 पर्सेंट लोग हाई फ्लो ऑक्सीजन वाले आते हैं, तो आप और हम लोग क्या कर सकते हैं? जब एक साथ में पूरे मुल्क में यही ट्रेंड है, तो हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि सब चिंतित हो गए हैं और चिंता को एक-दूसरे को शेयर करना चाहिए, उसी से मुकाबला करके कामयाब हो पाएंगे। अगर हम शेयर करेंगे कि राज्यों की क्या स्थिति है और केंद्र की क्या मजबूरी है, शेयरिंग होगा सब सहयोग करेंगे, सब चाहेंगे कि जान बचे हमारे देशवासियों की प्रदेशवासियों की, उसी रूप में हमें मैं समझता हूं कि चैलेंज को स्वीकार करना चाहिए और अगर चैलेंज स्वीकार करेंगे और जो व्यवस्थाएं हैं, उनका मैक्सिमम उपयोग कैसे हो, कैसे ऑडिट हो ऑक्सीजन की, कैसे दवाइयों की ऑडिट हो, जिसको जरूरत हो उसको मिले। आप एजुकेट करें, मीडिया वालों के लिए, एक मैंने ट्वीट किया था कि आपने खूब बता दिया श्मशान के सीन, ऑक्सीजन का हाहाकार, टैक्सियों और गाड़ियों-एंबुलेंसों में बैठे हुए हैं, ये तो एक भाग हुआ आपका, असली भाग हुआ, ये तो आप बताते जाओगे, पर रुकेगा नहीं जब तक कोरोना का संक्रमित होना, चेन नहीं टूटेगी, तब तक ये स्थिति बनती जाएगी। तो आपकी ड्यूटी बनती है कि आप और हम साथ में वो भी बताओ, जनता को एजुकेट करो, सरकारें जो प्रधानमंत्री हो, मुख्यमंत्री हो, हैल्थ मिनिस्टर कोई आह्वान कर रहा है, जनजागरण अभियान हमने चलाया, फिर जन अनुशासन पखवाड़ा मनाया, अब हमने रेड अलर्ट जन अनुशासन पखवाड़ा मनाया, अब हमने एक प्रकार से लगभग लॉकडाउन लगा दिया। तो इसमें मीडिया वालों को चाहिए कि वो जनता को एजुकेट करें कि गांवों में फैल गया है, पहले गांवों में नहीं फैला था और ये एजुकेट करें कि गांवों में अगर पूरे में ही फैल गया, तो फिर सब लोग कितनी ही कोशिश कर लेंगे, पर रुकने वाला नहीं है वो, फिर खाली मीटिंग करते ही रह जाएंगे। तो जरूरी है कि हम गांव वालों तक बात पहुंचाएं, ढाणियों में, परिवारों में कि आप किस होश में हो, आपको बाकायदा मास्क लगाना जरूरी है, प्रोटोकॉल का पालन करवाओ, गांवों के लोग एक-दूसरे के गांवों में जाएं नहीं, शादी-ब्याह में 500-500 लोग इकट्ठे हो रहे थे, हमने शादियों पर बैन लगाया है, तो ये जो स्थिति है, पब्लिक की तरफ से जो सहयोग मिलना चाहिए, उसके लिए मीडिया की ड्यूटी है कि वो बड़े रूप में इन अभियानों को चलाए, खाली विज्ञापनों में नहीं। वो खुद भी डिस्कशन करवाए, खुद खबरें दें, और ढंग से काम करें। तब जाकर जब आने वाले संक्रमितों की संख्या कम होगी, फ्लैट होगा आपका ग्राफ, तब जाकर आप और हम जो कोशिश कर रहे हैं ऑक्सीजन की भी, दवाइयों की भी, आईसीयू की भी और वेंटिलेटर की भी, वो काम हो पाएंगे। अभी भी राजस्थान में करीब 2 लाख हो गए हैं संक्रमित लोग, पर अस्पतालों में तो करीब 15-20 हजार मुश्किल से हैं बेचारे, बाकी तो घरों में ही हैं न, उसमें जो आदमी तकलीफ में आता है, उसको भर्ती करें वहां पर, तो जगह मिल जाए क्योंकि बाकी के कई लोग ऐसे होते हैं जो जाकर सो जाते हैं कि भई चलो, मैं जल्दी ठीक हो जाऊंगा ऑक्सीजन से। डॉक्टरों की जिम्मेदारी है कि उनको ऑक्सीजन कब मिले, किसको जरूरत है, किसको जरूरत नहीं है, उसी ढंग से डॉक्टर्स तय करें कि रेमडेसिविर किसको मिले, किसको लगनी चाहिए, किसको नहीं लगनी चाहिए। ऐसा माहौल बन गया है देश के अंदर कि इसके बगैर हम बचेंगे ही नहीं, ये तमाम काम भी मैं समझता हूं मीडिया का भी वो हमें सबको मिलकर करना पड़ेगा।
हर्षवर्धन जी आप, चौबे साहब आप लोग केंद्र में बैठे हैं, आज आपने इतना टाइम दिया बहुत बड़ी बात है क्योंकि आपके सामने तो सब राज्य हैं और सबकी अपनी समस्याएं हैं जो उनसे आप जूझ रहे हो। मैं आपको इतना ही कहना चाहूंगा कि राजस्थान की तरफ से, वैक्सीनेशन के लिए मैं आपको सुझाव देना चाहूंगा कि इसको चाहे देश-विदेश से, दुनिया के मुल्कों से क्योंकि हमारा मुल्क 130 करोड़ की आबादी का है, इसको आप टॉप प्रायोरिटी दे दीजिए। अगर सैकंड वेव का आप लोगों को मालूम होता कि इतनी जल्दी आएगी और इतनी खतरनाक आएगी, तो मेरे ख्याल से प्रधानमंत्री जी सब काम छोड़कर वैक्सीनेशन को ही इम्पॉर्टेंस देते पहले और दुनिया के मुल्कों से मंगाते, सौदे करते, जो भी करना होता करते। उस वक्त वैक्सीन बाहर से आ नहीं पाई हमारे पास में और ये भी एक बड़ा बिजनेस हो गया, सब कंपनियां चाहती हैं कि हम किस प्रकार से उसमें बिजनेस हासिल करें, इसका कोई तरीका निकालें कि दुनिया, जैसे यूपी ने कल ग्लोबल टेंडर निकाला है वैक्सीन के लिए, हम भी चाहते हैं, हम एग्जामिन कर रहे हैं उसको, हम सब मिलकर वैक्सीन को जो है, हालांकि मैंने प्रधानमंत्री जी से निवेदन किया, उन्होंने मेरी बात नहीं मानी। मैंने कहा था कि आपको चाहिए कि जैसे 60+, 45+ की तरह 18+ यानि पूरा वैक्सीनेशन 8-10 तरह की वैक्सीन, डॉ. हर्षवर्धन आप तो जानते हैं और सभी फ्री हैं देश के अंदर। तो एक जो ये खतरनाक कोरोना है, तो इसका वैक्सीनेशन भी भारत सरकार पूरी तरह फ्री रखे देश के अंदर सभी तरह से सभी लोगों के लिए, ये होना चाहिए था। पर कुछ मजबूरियां, कुछ कारण मुझे पता नहीं है, वो रहा होगा, वो नहीं हो पाया। अब राज्यों के ऊपर छोड़ दिया, प्राइवेट सेक्टर को दे दिया, अब वो क्या किस रूप में कंपनियों को देगी, कितना नीचे जाएगा, कितना अस्पतालों तक पहुंचेगा, कितना कैमिस्ट्स के पास जाएगा, कितना उसका ब्लैक होगा, कोई नहीं कह सकता और आप जानते हो कि ऐसे वक्त में एंटी-सोशल एलिमेंट्स फायदा उठाते हैं जो उठा भी रहे हैं, रोकने की कोशिश सब लोग कर रहे हैं। तो ये तमाम बातें आपके ज़ेहन में हैं।
वैक्सीनेशन पर मैं चाहूंगा कि आगे जो थर्ड वेव आने की बातें हो रही है, जो बच्चों को हिट करेगी, साइंटिस्ट्स कह रहे हैं, पता नहीं क्या-क्या हो रहा है, आप ज्यादा जानते हो, मैं समझता हूं कि पूरी ताकत हमें लगानी चाहिए एक तो इस कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए, उसमें हम सब आपके साथ में हैं और साथ में किस प्रकार वैक्सीनेशन का प्रोग्राम टाइम बाउंड चले, तीन महीने, चार महीने, पांच महीने, इतना बड़ा मुल्क है इसलिए कैलकुलेशन करके कि हम पूरे मुल्क में, जैसे लंदन में यूके में और इजरायल में सब कंट्रीज ने किया है, हालांकि वो कंट्रीज बहुत छोटे हैं, हमारी आबादी बहुत बड़ी है, पर अगर हम उनको वैक्सीनेट करेंगे तभी जाकर ये चाहे थर्ड वेव आओ चाहे फोर्थ वेव आओ, उसकी हमें चिंता नहीं रहेगी और हम लोगों ने जो मेहनत की है आजतक सबने मिलकर, उसमें हम लोग कामयाब हो पाएंगे, मेरा मानना है। बाकी तो हम लोग यहा बाकायदा, जो कर सकते हैं, एक तो डीआरडीओ के प्लांट लग रहे हैं, 15 प्लांट आपने हमें भी दिए हैं, जो बहुत कम हैं, 6-7 जिलों में दिए हैं खाली आपने, तो हमारे चीफ सेक्रेटरी ने डीआरडीओ के जो सेक्रेटरी हैं उनसे बात भी की है, रिक्वेस्ट की है, मैं आपसे आग्रह करूंगा, कम से कम, 5-7 जिलों से क्या होगा, बाकी जिलों में हर जिले में आप प्लांट लगवा दीजिए राजस्थान के अंदर, हमने 40-50 की मांग की है 500 में से, राजस्थान में दूरियां बहुत ज्यादा हैं, तो टैंकर्स भी हमारे पास नहीं हैं, टैंकर जाता भी है तो इतनी दूर जाकर लाता है ऑक्सीजन, तो बहुत टाइम लगता है और एक और निवेदन है कि जो हमें अलॉटमेंट किया है वो कर दिया है वो ईस्टर्न रीजन से कर दिया है वेस्ट बंगाल इत्यादि से, वहां 7 दिन लगते हैं आने-जाने के अंदर करीब ज्यादा लगेगा, तो नजदीक से अलॉटमेंट हो और हमें ऑक्सीजन प्लांट जो हैं ज्यादा लग जाएं डीआरडीओ के माध्यम से और 4 प्लांट जो पहले आपने दिए थे, वो चारों प्लांट हमने जमीन दे दी, जो स्टेट गवर्नमेंट का पार्ट था वो सब काम हमने कर दिया, पर आपका जो वेंडर था वो लगा नहीं पाया होगा, पर कई बार जो पॉलिटिक्स चलती है हमारे आपस के अंदर, हालांकि हमने कोशिश की है कि तमाम पॉलिटिकल पार्टियों को, धर्मगुरुओं को, एक्टिविस्ट्स को, एनजीओ तो सबको साथ लेकर हम फैसला करें और उसमें हम कामयाब भी रहे। कोई भूखा नहीं सोए, ये हमारा नारा था, उसमें हमें पूरी पब्लिक ने साथ दिया, पूरे धर्मगुरुओं ने, एक्टिविस्ट्स ने, पॉलिटिकल पार्टियों ने, सबने साथ दिया, अब भी हम लोग चाहेंगे कि सब मिलकर हम लोग राजस्थान में इन कामों को करें, पर फिर भी कई बार आलोचना होती है कि साहब 4 प्लांट दिए, आज तक सरकार ने लगाए नहीं, जबकि वो वेंडर आया ही नहीं दिल्ली से, तो लगा नहीं पाए थे वो। इस प्रकार से कई बातें आती रहती हैं, उनको तो हम लोग ठीक कर लेंगे, कोई ज्यादा दिक्कत नहीं है क्योंकि समय नहीं है कि मैं आपको बताऊं कि ऑर्गन डोनेशन में हम लोगों ने यहां काफी काम काफी आगे बढ़ाया है, हम लोग हर जिले में नर्सिंग कॉलेज खोल रहे हैं राजस्थान के अंदर, 6-7 जगह है अभी बाकी, अभी मैंने बजट में घोषणा की है कि नर्सिंग कॉलेज खुलें, जिससे कि वो जो नर्सेज की आवश्यकता होती है, उसको भी हम लोग टाइमली उनको हम लोग यूज कर सकें और नेशनल मेडिकल कमीशन की अनुमति के लिए भी असेंशियली सर्टिफिकेट हमें जारी कर दिया है और बाकी जो आईएमआर-एमएमआर है उसको ठीक करने का हम प्रयास कर रहे हैं, वो काम भी अच्छे ढंग से चल रहा है राजस्थान के अंदर और मैं उम्मीद करता हूं कि आने वाले वक्त के अंदर और हम ज्यादा तरकीब से भी, अभी हम चिरंजीवी योजना लेकर आए हैं हम लोग, मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगा और आप सोचिएगा, टाइम आ गया है अब सोशल सिक्योरिटी का और इसमें प्राइम मिनिस्टर साहब ने ही कई योजनाएं लागू की हैं कई 6 हजार वाली किसानों के लिए भी, कई कर रहे हैं, अब टुकड़ों में कर रहे है हम सब लोग। मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगा मेडिकल साइड में कि आयुष्मान भारत योजना थी 5 लाख की, उसमें हमारी पिछली सरकार ने यहां पर 3 लाख की योजना चालू कर रखी थी भामाशाह योजना जैसा कि आपको मालूम है एनएफएसए को लेकर और भारत सरकार की योजना है एसएसईसी को लेकर। हमारी गवर्नमेंट आई तो हमने दोनों को मिक्स कर दिया और एक्स्ट्रा जोड़ दिए थे उसके अंदर परिवार तो करीब 1 करोड़ 10 लाख परिवार हो गए थे, उससे हमारे ऊपर भार काफी बड़ा आया, करीब समझ लीजिए 1400 करोड़ हम दे रहे थे, 400 करोड़ भारत सरकार से आ रहे थे। परंतु अब हमने दो कदम और आगे बढ़े हैं हम लोग, पूरे प्रदेशवासियों का हमने बीमा कर दिया है और चिरंजीवी नाम रखा है उसका। उसको हमने कहा है कि पूरा 3000 करोड़ के लगभग होगा वो हम खर्च उठाएंगे स्टेट गवर्नमेंट और 400-500 करोड़ जो भी मिलेगा आयुष्मान भारत वाला हिस्सा वो आप देंगे, पर हम चाहेंगे कि पूरे प्रदेशवासियों को फ्री किया है, निःशुल्क किया है और जो पैसे वाले हैं उनको 850 रुपए, प्रीमियम का आधा उनसे लिया है, ले रहे हैं और बहुत शानदार इसका वेलकम हुआ है, मैं चाहूंगा कि आप इसको देशभर में लागू करवाने का प्रयास करें क्योंकि ये समय आ गया है कि आजकल बीमारी में प्राइवेट हॉस्पिटल्स भी और दवाइयां इतनी महंगी हैं, घर बिक जाते हैं, गहने बिक जाते हैं लोगों के, तो मुझे उम्मीद है कि आप जैसा संवेदनशील व्यक्तित्व इस काम को भी करने में आगे आएगा और हम लोग सब मिलकर इस काम को आगे बढ़ाएंगे। इस प्रकार से हमने कई फैसले किए हैं, तो अभी वक्त नहीं है कि मैं अभी उनको आपके सामने रखूं, पर इतना मैं यकीन दिलाना चाहूंगा कि राजस्थान वो राज्य रहेगा हमेशा आपके लिए, जहां आपने जैसा कि आपने कहा कि हमने 15 कॉलेज एकसाथ सेंशन कीं क्योंकि आपने टाइमली सबकुछ फॉर्मेलिटी कर दी थीं। तो आप निश्चिंत रहें आगे भी जो हैं, हम लोग उसी रूप में जो भी गाइडलाइन्स आपकी होंगी, उसको हम लोग अडॉप्ट करते हुए चाहेंगे कि उसको हम पूरा करें क्योंकि डिप्लोमा कोर्स आपने शुरू किया है, वो बहुत ही वेलकम स्टेप है और 8 क्लीनिकल विभाग एनेस्थीसिया, प्रसूति स्त्री रोग, शिशु रोग, नेत्र रोग, नाक-कान-गला, टीबी, चेस्ट, कार्डियो, डायग्नोसिस, फेमिली मेडिसिन्स में संचालित होंगे। ये तमाम जो काम हैं, हमने बहुत ही इसको सीरियस लिया है और सीरियसली हम लोगों ने उन कामों को हाथ में लेकर आगे बढ़ा रहे हैं, इसलिए हमें कॉन्फिडेंस है कि हम लोग मेडिकल के सेक्टर में कभी पीछे नहीं रहेंगे, जैसा कि अभी हमारे राज्य मंत्री जी ने भी कहा और अंत में मैं कहना चाहूंगा आपको कि अब तो पूरी दुनिया जो है, दुनिया के मुल्क और हमारा मुल्क भी अब जो इस घातक कोरोना कोविड-19 से जंग लड़ रहे हैं, अब मेरे ख्याल से सभी सरकारों का चाहे केंद्र हो या राज्य हो, सबका बजट जो है, जैसा कि आपने कहा कि 1 साल लगा हम लोगों को पहले फेज के अंदर पहली लहर में, तो हम जीरो से बढ़कर 70 हजार पर आ गए थे टैस्टिंग कैपेसिटी हमारी हो गई थी। उसी प्रकार से आईसीयू बेड्स, वेंटिलेटर्स सबकी संख्या बढ़ गई थी और सुविधायुक्त आधारभूत ढांचा तैयार हो गया था। अब और हम सब मिलकर बजट के अंदर प्रोविजन करें, और मजबूत करें देश के अंदर जिससे कि आने वाली कोई चुनौती हो, उसका मुकाबला करने में हम लोग सक्षम रहें स्वास्थ्य के क्षेत्र में। मुझे यकीन है कि इस दिशा में आपका अनुभव काम आएगा पूरे भारत सरकार को। यही बात कहता हुआ मैं आपका शुक्रिया अदा करता हूं कि आप इतना आपने टाइम दिया, इतनी आपने बातें हम लोगों को बताईं, यही बात कहता हुआ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं, पुनः आपका, प्रदेशवासियों की ओर से आपका आपके राज्य मंत्री जी का बहुत-बहुत हार्दिक स्वागत।

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