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Talked to media at residence

दिनांक
23/05/2019
स्थान
जयपुर


डेमोक्रेसी में जनादेश सर्वोपरि होता है कांग्रेस ने 70 साल तक इसकी रक्षा की है, विद ह्यूमिलिटी कांग्रेस ने हमेशा इसे स्वीकार किया है और आज भी जो मैंडेट आया है उसके लिए हम लोग श्री नरेंद्र मोदी जी को बधाई देते हैं और अपनी हार स्वीकार करते हैं।
जो राहुल गांधी जी ने कहा वही भावना पूरे देश के कांग्रेसजनों की है पर मुझे इस बात का दुख रहेगा कि इस चुनाव में इश्यू बेस केम्पेन नहीं हुआ, डेमोक्रेसी में आप देश के लिए, किसान के लिए, गरीब के लिए, गांव के लिए, दलित के लिए, पिछड़ों के लिए क्या करेंगे कोई केम्पेन हुआ ही नहीं, आपकी नौजवानों के एंप्लॉयमेंट की क्या योजना है उस पर डिस्कशन नहीं हुआ। सिर्फ और सिर्फ आपने जाति, धर्म, राष्ट्रवाद, सेनाओं के पराक्रम और शौर्य के पीछे छिपकर के आपने चुनाव जीतने के लिए राजनीति की। राहुल गांधी जी ने बहुत प्रयास किए कि कैम्पेन हम इश्यूबेस करें पर आपने कोई परवाह नहीं करी और आप उसमें कामयाब हो गए। असत्य बोलकर, झूठे वादे करके 5 साल की क्या उपलब्धियां थी उसको बताया नहीं, देश को आगे का विजन नहीं बताया।
ऐसे कई बार समय आते हैं कि लोग भी भावनाओं में बह जाते हैं और आज मैं देखता हूं लोगों ने उनके पक्ष में वोट दिए हैं पर मैंने इंदिरा गांधी जी का जमाना देखा है वह स्वयं चुनाव हार गई थी, कांग्रेस की कमोबेश वही स्थिति उस वक्त में बनी थी जो आज स्थिति बनी है उसके बाद में वापस कांग्रेस के पक्ष में माहौल बना जनता का, मैंडेट मिला और कांग्रेस ने 25 साल तक राज किया उसके बावजूद भी।
यह हार और जीत तो डेमोक्रेसी में चलती रहती है हम तो चाहेंगे कि फ्यूचर के अंदर भी इन्होंने केम्पेन जिस रूप में किया है किस प्रकार से पक्ष और विपक्ष मिलकर के क्या सोच रखें अपनी देश के लिए वह बताएं, सबका साथ सबका विकास कहना एक बात है उनके लिए सबका साथ सबका विकास के मायने अलग है परिभाषा दूसरी है, हमारी परिभाषा दूसरी है सबका साथ सबका विकास का मतलब है सब वर्गों का, सभी धर्म के लोगों का, सभी जातियों का, पिछड़ों का, अगड़ो का, दलितों का सबका साथ विकास कैसे हो इसलिए समय बताएगा कि इनका मैंडेट से लोगों की जो आशाएं,अपेक्षाएं बनी है कितना खरा उतरते हैं मोदी जी और उनकी गवर्नमेंट टाइम बताएगा।
राहुल गांधी जी कहते हैं कि विचारधारा की लड़ाई हमारी है व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है तो यह जो चुनाव का मैंडेट है यह विचार धाराओं के आधार पर तो फैसला हुआ ही नहीं लगता है, यह तो भावात्मक मुद्दे बना करके आपने जीत हासिल करी है मेरा मानना है इसलिए मैंने कहा कि जनता की जो आशाएं और अपेक्षाएं हैं उस पर कितना खरे उतरेंगे वह टाइम बताएगा।

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