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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्री राजीव गांधी जी की जयंती पर शहरी निकायों में इंदिरा रसोई योजना का वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शुभारम्भ कार्यक्रम:

दिनांक
20/08/2020
स्थान
जयपुर


मुझे खुशी है कि आज एक बड़ा अवसर है जिसके बारे में आपको धारीवाल जी ने, डोटासरा जी ने बताया। राजीव गांधी जी के जन्मदिवस पर, आपको मालूम है कि प्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी जी का व्यक्तित्व, उनका कृतित्व कैसा रहा देश के अंदर, आज भारत रत्न राजीव गांधी जी को हम लोग याद करते हैं और जिस प्रकार से उन्होंने अभी डोटासरा जी बता रहे थे, एक के बाद एक क्रांतिकारी कदम उठाए, संविधान में संशोधन किए, जिससे कि सत्ता का विकेंद्रीकरण हो सके और पंचायती राज और स्थानीय निकाय के चुनाव समय पर हो सकें। आरक्षण दिया गया एससी-एसटी-ओबीसी को, महिलाओं को इन संस्थाओं में, पहली बार हुआ आजादी के बाद में, 18 वर्ष में मतदान की आयु की गई नौजवानों के लिए और जिस प्रकार उनकी सोच थी देश को 21st सेंचुरी में ले जाने की, उस वक्त लोग समझ नहीं पाए थे, पर जिस रूप में आज जब हर हाथ में मोबाइल फोन है, इंटरनेट की सेवाएं हैं, पूरी दुनिया से जब जुड़ चुके हैं, आईटी की जो क्रांति हुई है, उसके माध्यम से हम कह सकते हैं कि किस रूप में उनका सपना था 21st सेंचुरी का और किस रूप में वो चाहते थे कि हम नई शताब्दी में जाएं। उस वक्त में ये मुल्क जो विकसित नहीं विकासशील मुल्क कहलाता है हिंदुस्तान, डवलपिंग कंट्री के अंदर आता है, वो चाहते थे कि नई शताब्दी में 15 साल बाकी थे उस वक्त में, वो चाहते थे कि हम इतनी मेहनत करें जिससे कि नई शताब्दी में कम से कम ऐसी तैयारी कर लें हम लोग कि नई शताब्दी में हम भी विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में आ सकें, ये उनका सपना था। वो देश के लिए शहीद हो गए, वो चाहते थे कि उपमहाद्वीप में शांति स्थापित हो, आखिर में वो हमारे बीच में नहीं रहे, पर उनकी प्रेरणा, उनका संदेश हमें हमेशा प्रेरणा देता है कि किस प्रकार से हमें नई पीढ़ी को सतर्क करना है। नई पीढ़ी के अंदर 21st सेंचुरी का जो सपना उनका था, उसको पूरा करने के लिए जज़्बा और भावना भरनी है, उसी रूप में हम लोग चाहते हैं कि उनको हमेशा याद किया जाए। मुझे खुशी है कि आज उनके जन्मदिवस है और उसी वक्त में जो ये इंदिरा रसोई योजना का प्रारंभ हुआ है, जिसके बारे में मेरे पूर्व वक्ताओं ने, आपने देखा कि जो हमारे मंत्रीगणों ने भी अपनी बात कही और हमने अभी अनुभव प्राप्त किया 8 जगहों से, उससे लगा है कि योजना बहुत ही कामयाब होगी और इस योजना के माध्यम से जो हमारा सपना भी है कि कोई भूखा न सोए कोरोना के अंदर, मैं बार-बार कहता हूं कि हम सब लोगों ने मिलकर पक्ष हो-विपक्ष हो, या हमारे जो दानदाता हों, भामाशाह हो, सरकारी अधिकारी कर्मचारी, पुलिस प्रशासन के अधिकारी हों, सब लोगों ने मिलकर चाहे वो ग्रामसेवक, पटवारी, आंगनवाड़ी वर्कर्स, साथिन, आशा सहयोगी कोई हों, मेरे ख्याल से हर व्यक्ति का इन्वॉल्वमेंट रहा लॉकडाउन के दौरान, राजस्थान सरकार ने भी कोई कमी नहीं रखी, स्वास्थ्यसेवाओं की ढांचागत तैयारी की, टेस्टिंग की सुविधाएं आज 40 हजार पार कर गईं जबकि हम पहले सैंपल पुणे और दिल्ली भेजते थे, तो फिर आप सोच सकते हो कि, चाहे आईसीयू बेड बढ़ाने की बात हो, वेंटिलेटर की बात हो, ऑक्सीजन की व्यवस्था करने की बात हो, आज राजस्थान ने जिस प्रकार से काम किया है भीलवाड़ा मॉडल के बाद में, उसने पूरे देश के अंदर एक अमिट छाप छोड़ी है और उसका सबसे ज्यादा श्रेय आप सभी को जाता है और जैसा कि अभी संस्थाएं आगे आई हैं इंदिरा रसोई योजना में, आप सहित सभी संस्थाओं ने, भामाशाहों ने कमाल का काम किया। कोई आदमी भूखा नहीं सोए, पड़ोसी भूखा नहीं सोए, इस भावना के साथ में काम किया। सरकार ने भी कैश भी बांटा और पका हुआ खाना हो चाहे कच्चा खाना हो, उनके पैकेट बांटने में कमी नहीं रखी। गेहूं फ्री बांटा गया, केंद्र सरकार से गेहूं मिलता है वो काम में लिया गया, केंद्र सरकार के नॉर्म्स में नहीं आया तो 23 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से खरीदकर गेहूं बांटा गया। कहने का मतलब है कि कोई आदमी भूखा नहीं सोए, ये व्यवस्था हम लोगों ने करने का प्रयास किया। राजस्थान सरकार सतर्क है, इस भावना के साथ में ये सब काम हुए थे। इसलिए आज मुझे खुशी है कि जो इंदिरा गांधी का नारा था गरीबी हटाओ का, आज गरीबों को और मध्यम वर्ग को भी खाना मिल रहा है तो इंदिरा गांधी की याद आती है कि कोई जमाना था हमारे यहां पर, हम बचपन में देखते थे कि राशन की दुकानों पर जो गेहूं आता था वो आता था पीएल 480 का, अमेरिका से आता था जो काम का नहीं होता था गेहूं, उस क्वालिटी का गेहूं जो अमेरिका वाले नहीं खाते थे, वो खाना हिंदुस्तान के लोगों को खाना पड़ता था, इंदिरा गांधी ने हरित क्रांति का नारा दिया, देश के किसानों ने दमखम दिखाया और उसके बाद में हरित क्रांति हुई, देश आत्मनिर्भर हुआ, वो सबके सामने है। 20 पॉइंट प्रोग्राम लेकर आईं वो गरीबों के लिए, दलितों के लिए, पिछड़ों के लिए, उनके तमाम तरह के बड़े-बड़े फैसले थे जमीनों के हों, चाहे वो अन्य विकास की बातें हों, परेशानियां दूर करने की बातें हों, कोई कमी नहीं रखी। इस प्रकार से उनका जमाना आज भी लोग याद करते हैं देश में- दुनिया में। दुनिया की महान नेता बन गई थीं। तीसरी दुनिया कहलाती है नॉन अलाइंड कंट्रीज, उसकी अध्यक्ष चुनी गईं वो, सबको मालूम है किस प्रकार से इस देश के अंदर भी आयोजन हुआ नॉन अलाइंड कंट्रीज का, अंतर्राष्ट्रीय आन्दोलन सम्मेलन हुआ उसकी अध्यक्ष चुनी गईं, उनका अपना एक नाम था देश में दुनिया में, उनके नाम की रसोई की शुरुआत करना मैं समझता हूं उनके किए हुए कामों को, चाहे वो जो उन्होंने फैसले किए बड़े-बड़े, बांग्लादेश आजाद हुआ सबको मालूम है कि इतिहास में ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा आपको कि बांग्लादेश को पाकिस्तान के दो टुकड़े किए, अलग किया, अलग ही नहीं किया बल्कि 93 हजार उनके कर्नल-जनरल-मेजर- सैनिकों को सरेंडर करवा दिया, वो इंदिरा गांधी थीं महान नेता, उनकी याद में ही ये रसोई शुरु हुई है और मैं समझता हूं कि इस कारण से महिलाओं को भी एक नया कॉन्फिडेंस पैदा होगा, इस रूप में हमने आज इस काम को अंजाम दिया है और मैं उम्मीद करता हूं कि 8 रुपए में खाना देना और व्यवस्थित रूप से, साफ-सफाई के साथ में बैठा कर खाना खिलाना ये मैं समझता हूं धारीवाल जी और इनके साथियों ने बहुत ही मेहनत करके इस योजना को अंजाम दिया है और योजना बहुत ही कामयाब होगी और आप निश्चिंत रहें इस योजना के लिए सरकार की ओर से धन की कमी नहीं आने दी जाएगी। जरूरत पड़ेगी तो इसका और फैलाव करेंगे, जितनी मांग होगी उसकी पूर्ति करेंगे नंबर एक, नंबर 2 अभी शहरों में है, अगर कस्बों के अंदर और गांवों के अंदर भी जरूरत पड़ेगी और संस्थाएं आगे आएंगी, हम चाहेंगे कि पूरे प्रदेश के गांवों तक भी ये योजना जाए, इस प्रकार की सोच के साथ में हम चाहेंगे कि इस योजना को आगे बढ़ाएं, जिससे कि एक भी आदमी जब हम कहते हैं कि भूखा न सोए, इसके अपने मायने हैं और ये हमने कर दिखाया है कभी अकाल पड़े, सूखे पड़े हैं, तब भी आपको मालूम है कि शानदार प्रबंधन हुए, घर-घर के अंदर गेहूं पहुंचे हैं और एक प्रयास किया गया है कि राजस्थान के लोगों को तकलीफ नहीं हो। तो मैं लंबी बात नहीं कहता हुआ तमाम साथियों को मैं धन्यवाद दूंगा जो आज वीसी से जुड़े हैं और बराबर जुड़ते जा रहे हैं। लिस्ट मेरे पास बहुत बड़ी बन गई है जुड़ने वालों की, लगातार नाम आते जा रहे हैं। मुझे खुशी है कि आप सब विधायकों ने, मंत्रिगण तो खैर हैं ही हैं सरकार के पार्ट और तमाम अधिकारियों ने विधायकगणों ने इसमें रुचि ली, इसके लिए मैं इन तमाम अधिकारियों का, विधायकगणों का, माननीय सांसदगणों का, जो भी संस्थाएं हैं, उन सबका मैं आभार प्रकट करता हूं कि आपने रुचि लेकर इस काम को अंजाम दिया है, पक्ष के-विपक्ष के सभी लोग आए, इसके लिए मैं सभी को धन्यवाद देना चाहता हूं, धन्यवाद, जयहिंद, धन्यवाद।

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