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Reply to the debate on State Budget 2021-22 in #Rajasthan Vidhan Sabha:

दिनांक
04/03/2021
स्थान
जयपुर


माननीय अध्यक्ष महोदय, मेरे साथियों ने, पक्ष-विपक्ष के साथियों ने जो विचार व्यक्त किए पिछले दिनों उसके लिए मैं उनका आभार प्रकट करता हूं और मुझे खुशी है कि खुलकर अपनी बात रखी और जैसा मैं हमेशा कहता आया हूं कि जो भी भावना प्रकट की गई, उसका विश्लेषण किया जाएगा और उसके आधार पर जो संभव होगा उसको हम लोग पूरा करने का प्रयास करेंगे। मैं नेता प्रतिपक्ष का भी, इनके तमाम वरिष्ठ नेताओं का भी आभार प्रकट करता हूं, जब बजट पेश किया गया था 24 तारीख को, तो आप लोगों के पास कहने को कुछ नहीं था। इसलिए आप लोग, कई लोग तो मुंह छिपाकर प्रेस से बिना मिले ही चले गए, और तो और चिंता प्रकट कर रहे हैं। अभी हमारे नेता प्रतिपक्ष पूरे अपने भाषण के अंदर चिंता प्रकट कर रहे हैं, बाद में गुस्सा होकर बोलने लग गए, भावुक होकर बोलने लग गए कि पता नहीं क्या होगा? मैं पूछना चाहता हूं, बजट पूरा हो अथवा नहीं हो, नहीं हो, कमी रहे तो आपका आलोचना करने का अधिकार है, अब आप 2019-20 की आलोचना अभी तक भी कर रहे हो, जबकि 2020-21 जा रहा है, 2021-22 चल रहा है। तो 2019-20 की आलोचना करने के लिए आपने पूरे डॉक्यूमेंट तैयार कर रखे हैं। कोई बात नहीं, तो आपने जो आलोचना करने का जो माहौल बनाया मीडिया के अंदर, मैं पूछना चाहता हूं, मैं तो आभारी हूं आपका सबका कि आपने ये चिंता प्रकट की जो हमें करनी चाहिए थी कि हमने बजट पेश किया, अब उसका क्या होगा? ये चिंता सरकार को करनी चाहिए, मुख्यमंत्री को करनी चाहिए, मंत्रिमंडल के साथियों को करनी चाहिए, तमाम हमारे साथियों को करनी चाहिए, वो चिंता पूरा विपक्ष कर रहा है, चिंता आपको करनी है कि मुझे करनी है? कमी रहे, आलोचना करो आप लोग, कोई दिक्कत नहीं है। जगलरी करने में हमेशा आरोप लगते हैं, सरकार पर लगते हैं, बाजीगरी की जा रही है आंकड़ों के आधार पर, पर बाजीगरी तो मैंने अभी देखा, हमारे नेता प्रतिपक्ष कर रहे थे। आंकड़े बता रहे थे विभागों के, विश्वविद्यालयों के, कितने पैसे रखे गए। बड़ा गर्व से कह रहे थे कि हमने राजीव गांधी विश्वविद्यालय का नाम बदलकर रख दिया गुरु गोविंद विश्वविद्यालय, बहुत अच्छा किया आपने, हमने ऐतराज़ भी नहीं किया और दो करोड़, पांच करोड़ रखे गए, जो स्वायत्त शासी संस्थाएं हैं, बनती हैं, धीरे-धीरे प्रगति करती हैं, टाइम लगता है। पर आपने अच्छा काम नहीं किया, अगर आपके कहने से तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अगर बदल दिया स्थान उदयपुर से बांसवाड़ा, तो गर्व करने की बात नहीं है। वो जानबूझकर हमने उदयपुर रखा था। कर्नल बैंसला जब मुझसे मिलने आते थे, कॉलेज की बात थी, बयाना के अंदर खोलने की बात थी, उनके समाज के लोग गांव में खुलवाना चाहते थे। उन्होंने मुझसे कहा कि समझते नहीं हैं मेरी कौम के लोग, अगर बयाना में खुलेगी कॉलेज तो वहां पर गुर्जर समाज के साथ-साथ में और जातियों के बच्चे साथ पढ़ेंगे, आपस में विचारों का आदान-प्रदान होगा, संस्कारों का परंपराओं का होगा, तो हमारा गुर्जर समाज, उनकी बच्चियों को भी एक्सपोजर ज्यादा मिलेगा। अगर आज आदिवासी क्षेत्र के बच्चे उदयपुर आकर पढ़ते, तो आपको क्या तकलीफ थी? आपकी छत्तीसों कौम के बच्चे साथ पढ़ते, आपस में मिलते-जुलते, उनका एक्सपोजर होता और वो ज्यादा प्रगति कर सकते थे। पता नहीं, आपकी सोच है, आपको मुबारक हो, पर मैं कहना चाहूंगा, आप निश्चिंत रहें, जो हमने कहा वो करके दिखाया है पहले भी, अब भी दिखाएंगे और कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। हमने कोरोना के बावजूद भी जिस प्रकार का मैनेजमेंट किया है, जो आपके सामने बजट पेश किया है, मैं उम्मीद करता था कम से कम उसको लेकर, कोरोना के प्रबंधन को लेकर आप लोग भी उसको एप्रीशिएट करोगे, वेलकम करोगे। एक शब्द नहीं बोले हमारे नेता प्रतिपक्ष उसके बारे में, जबकि उस वक्त सबकी जान और सांसें अटकी हुई थीं, पता नहीं क्या होगा, हमारी जिंदगी का क्या होगा, वो वक्त भी देखा हमने। भूलना नहीं चाहिए, वो वक्त भी देखा हमने, पूरा राजस्थान नहीं, पूरा देश चिंतित था, तब भी शानदार प्रबंधन किया है और मैं समझता हूं कि उसमें आप सबका मैंने इन्वॉल्वमेंट रखा। अभी बजट पेश करते ही मैंने सीधा मुख्य सचिव को फोन किया, दोपहर को ही, कि तमाम विभागों को निर्देश दें कि जो बजट के प्रस्ताव हैं उनके, उनको श्रेणीबद्ध करें, जिससे कि मॉनिटरिंग शुरू कर सकें जल्द ही। अगर आपकी भावना ये है कि बजट कैसे टाइमबाउंड इम्प्लीमेंट हो, तो मैं कहना चाहूंगा कि मैं उस काम में उसी दिन से लग गया हूं जिस दिन हम लोगों ने बजट पेश किया है। ऑर्डर निकल चुके हैं विभागों के अंदर, पूरे चरणबद्ध किए जा रहे हैं और मॉनिटरिंग हम लोग खुद करेंगे। और तो और हमने टैक्स एमेनेस्टी स्कीम स्टाम्प्स एंड रजिस्ट्रेशन एक्ट के अंतर्गत संशोधित प्रावधानों को भी हमने लागू कर दिया है, जो हमने घोषणा की थी बजट के अंदर। जो हमने सबका कर्मचारियों का, सबका जो पैसा रोक रखा था, 1 हजार 600 करोड़ रुपए, डेफर्ड कर रखा था, उसको भी रिलीज कर दिया है। इसके मायने हैं, एक संदेश देने के लिए कि सरकार मैनेजमेंट करेगी, चाहे केंद्र से इम्दाद मिले, कम मिले, ज्यादा मिले। आप बार-बार जो कहते हैं न, केंद्र सरकार को आप लोग बुरा-भला कहते हो और फिर आप उम्मीद करते हो कि वो आपको इम्दाद करें। हम बुरा-भला कभी नहीं कहते, हम तो यह कहते हैं कि संविधान में लिखा हुआ है, खाली उसको आप लागू कर दो। क्या वो कहने का हमारा अधिकार नहीं है? संविधान के अंदर लिखा हुआ है कि फाइनेंस कमीशन बनेंगे, रिकमंडेशन करेंगे, उसके आधार पर डिविजन होगा रेवेन्यू का, केंद्रीय करों का डिविजन होगा, जीएसटी आएगी तो जीएसटी का डिविजन होगा। अगर हम वो मांगते हैं और नहीं मिलता है, तो क्या हमारा अधिकार नहीं है कि हम उसके बारे में बात करें? ये मेरी समझ के परे है। बार-बार आपकी ये सोच कि जैसे हम कोई पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कोई बात कह रहे हों। हमारा अधिकार हम मांग रहे हैं और दे रहे हैं तो हमारे ऊपर कोई अहसान नहीं कर रहे हैं। किसी पार्टी की सरकार हो, केंद्र सरकार को देना ही पड़ता है, जो कानून के अंतर्गत प्रोविजन है, वो मांग रहे हैं, पर जिस रूप में केंद्र सरकार जगलरी कर रही है, वो अफसोसजनक है। किस प्रकार से 14वें फाइनेंस कमीशन ने कहा कि 32 पर्सेंट से केंद्रीय करों के हिस्से बढ़ेंगे, 42 पर्सेंट जाएंगे, अच्छी मंशा से कहा होगा, केंद्र सरकार को करना पड़ा 32 से 42 पर्सेंट, पर साथ में उन्होंने जितनी स्कीमें थीं अध्यक्ष महोदय, उन तमाम स्कीमों को उन्होंने, जो सीएसएस होती हैं, सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम्स, उन सबको उन्होंने तोड़-मरोड़ दिया, उनका जो रेश्यो था 90:10 का, 80:20 का, 60:40 का, 100:00 का, वो तमाम उन्होंने तोड़-मरोड़कर 50 पर्सेंट पर लेकर आ गए। और तो और जो बीमा आपकी आयुष्मान भारत का नाम लेते हैं, प्रधानमंत्री ने बड़ी योजना लागू कर दी, 60:40 का रेश्यो है, आज 39:61 का हो गया है क्योंकि कैप लगा दी है कि आप इससे ज्यादा प्रीमियम नहीं दे सकते हो। अब हमने घोषणा की है, उसका भी आपने स्वागत नहीं किया, कुछ तो दो-तीन घोषणाओं का स्वागत आपको भी करना चाहिए था कम से कम। हमने कहा यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज मिलेगा, पूरे प्रदेशवासियों का बीमा किया जाएगा, क्या ये स्कीम भी हमारी आपको पसंद नहीं आई? आपने हमारी कोई स्कीम का, एक शब्द नहीं बोले कि हां ये अच्छा काम किया, हम इसको स्वागत करते हैं। उसके कारण मालूम है आपको क्या होगा, अध्यक्ष महोदय, 10 पर्सेंट केंद्र सरकार का सिर्फ और 90 पर्सेंट करीब-करीब पूरा पैसा स्टेट गवर्नमेंट देगी और सबका बीमा करके रहेगी, ये मैं आपको कहना चाहता हूं। अध्यक्ष महोदय, इस प्रकार से जो, जिस प्रकार से हमने जो, अभी मैंने कहा आपको कि फाइनेंशियल क्राइसिस है, इसमें कोई दो राय नहीं, जब कोरोना आ गया तो होना स्वाभाविक है। पूरा देश, चाहे केंद्र सरकार हो, चाहे राज्य सरकारें हों, उनके सामने क्राइसिस है, इसमें कोई दो राय नहीं, पर उसके बावजूद भी जो मैनेजमेंट किया जा रहा है हमारे यहां, बहुत शानदार है। ये मैं बताना चाहूंगा अभी आपको कि जिस रूप में, अभी कई साथियों ने कहा, जब कोरोना काल था तो लॉकडाउन था, फैक्ट्रियां बंद, उद्योग-धंधे बंद, काम-धंधे बंद, सबकुछ बंद था, तब भी ये कहा गया 60 पर्सेंट, शायद आपके नेता ने कहा होगा उपनेता आपके, और भी कुछ साथियों ने कहा, 31 दिसंबर तक 60 पर्सेंट पैसा ही खर्च हुआ, शायद आपने ही कहा होगा, ठीक है। मैं कहना चाहूंगा, 31 दिसंबर तक 60 पर्सेंट नहीं हुआ है, 62.15 पर्सेंट खर्च हुआ है नंबर एक और मैं आपको कहना चाहूंगा, 62.15 पर्सेंट तो हुआ ही है, पर आपके वक्त में और हमारे वक्त में बहुत फर्क है। हमारे वक्त में 62 भी हुआ पहले, 65 भी हुआ था, पिछली बार सरकार थी तब। आपके वक्त में तो 46 पर्सेंट 2014-15 में, 50.72 पर्सेंट 2015-16 में, जब उदय योजना आई, जिसका जिक्र आपने अभी किया, 63.45 इसलिए हुआ, उदय योजना का पैसा जब सरकार ने अपने ऊपर ओढ़ लिया, बिजली कम नहीं हो, जिसका जिक्र आप कर रहे थे अभी, तब जाकर आपका दिसंबर 31st तक 63.45 पर्सेंट हुआ है, बाकी फिर आप आ गए दिसंबर तक 49.50, बताइए आप? और जब चुनाव का वर्ष था, तब आप आए 60.14, तो आप बताइए, ये फिर जो कोरोना के बावजूद भी हमारा जो, इतनी स्कीमें लॉन्च कीं हम लोगों ने, कॉलेजों को लेकर आप लोगों ने खूब कमेंट किए, सब विभागों के अंदर खर्चे हुए, ठीक हुए, ये आंकड़े गलत हैं? ये आंकड़े गलत बनाए गए हैं, जो आपको दिए गए हैं?
अध्यक्ष महोदय, जो हालात हैं देश के अंदर, हमें सोचना पड़ेगा कि उसके बावजूद भी फिस्कल पैरामीटर हमारे हैं, इसपर मैं कहना चाहूंगा, ये तो स्वाभाविक है कि जब कोरोना आया है, जब रेवेन्यू के सोर्सेज बंद हो गए हैं, तो आपका डेफिसिट बढ़ना तो लाजिमी है, चाहे फिस्कल डेफिसिट हो, या रेवेन्यू डेफिसिट हो।

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