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अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 2021 के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम 'हौसलों की उड़ान'

दिनांक
11/10/2021
स्थान
जयपुर


LIVE: अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 2021 के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम 'हौसलों की उड़ान'
ममता भूपेश जी, टीकाराम जूली जी, निरंजन आर्य जी, संगीता बेनीवाल जी और जो हमारी खास मेहमान हैं आज अवनि लेखरा जी, उपस्थित तमाम हमारे अधिकारीगण, भाइयों और बहनों और मेरे साथियों क्योंकि ये वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पूरे प्रदेश के अंदर ये प्रोग्राम चल रहा है, इसलिए जो भी इस प्रोग्राम को सुन रहे होंगे, उन तमाम साथियों को संबोधित करते हुए मैं अपनी बात कहना चाहूंगा कि मुझे खुशी है कि आज पिंकसिटी साइकिल रिक्शा चालक संस्थान जो तिवारी जी जो हमारे साथ बैठे हुए हैं, इनके माध्यम से इस प्रोग्राम की पहले शुरुआत हुई थी और करीब 20 साल से, जबसे मैं पहली बार मुख्यमंत्री बना, इनके पिताजी आया करते थे ऐसे बच्चों को लेकर जो बच्चे विपरीत परिस्थितियों के अंदर किस प्रकार से अपना मुकाम हासिल करते हैं, या बाल श्रम से मुक्त होते हैं। वो इस दुनिया में नहीं रहे, उसके बाद में इन्होंने उस काम को संभाला और आज श्रम विभाग, यूनिसेफ के साथ-साथ इनकी संस्था जो है, सबने मिलकर जो प्रोग्राम करने का तय किया, तो मैंने उचित समझा कि जो अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस है, उन तमाम विभागों को जोड़कर क्यों नहीं हम लोग एक प्रॉपर प्रोग्राम करें, इतना महत्वपूर्ण प्रोग्राम और दिवस है और वो भी अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस है, मुझे खुशी है कि आज अवनि लेखरा भी आज हमारे बीच में है, ममता भूपेश जी ने उनको समय रहते हुए अपने बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ अभियान का ब्रांड एंबेस्डर बनाया है। अब मैं उम्मीद करता हूं कि उनका जो परिचय है, वो खाली राज्य स्तर पर ही नहीं रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं रहा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बना है। पैरालंपिक में कामयाबी हासिल करना आप सोच सकते हो कि एक मैसेज गया कि राजस्थान की एक बेटी ने जिस प्रकार से पैरालंपिक में नाम कमाया है दुनिया के अंदर, उस पर हम प्रदेशवासियों को बहुत-बहुत गर्व है। हम उनको अपना आशीर्वाद देते हैं, शुभकामनाएं देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे अपने जीवन में बहुत कामयाबी हासिल करें और जो बेटी बचाओ- बेटी पढ़ाओ एक महत्वपूर्ण प्रोग्राम है, जैसे मैंने कोई जमाने में कहा था कि पानी बचाओ, बिजली बचाओ, सबको पढ़ाओ, पेड़ लगाओ, बहुत महत्वपूर्ण प्रोग्राम हमने दिए थे, तो बेटी बचाने का और बेटी पढ़ाने का प्रोग्राम भी बहुत ही महत्वपूर्ण है। ये विषय इतना विस्तृत है कि इसमें जितनी बात करें उतना कम है क्योंकि जिस देश में इंदिरा गांधी जैसी महान नेता हुई हों, जो महिला होकर जिन्होंने 17 साल तक प्रधानमंत्री के रूप में काम किया हो और पूरी दुनिया में ये मैसेज दे दिया कि हिंदुस्तान की महिलाएं कोई कम नहीं हैं और जिस प्रकार राजीव गांधी ने जो संविधान संशोधन किए, महिलाओं को अधिकार दिया 73-74 संविधान में संशोधन करके कि गांवों में और शहरों में महिलाएं सरपंच, पंच, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, मेयर बनने लग गईं 33 पर्सेंट और मुझे याद है कि 2009 में जब मैं दूसरी बार मुख्यमंत्री बना, तब हमने महिलाओं के लिए 33 पर्सेंट से 50 पर्सेंट कर दिया राजस्थान में रिजर्वेशन। इस रूप में हमेशा हम चाहते हैं कि राजस्थान में बालकों के साथ में बालिकाओं का भी विशेष ध्यान रखा जाए, वो तभी संभव है जब हम लोग शिक्षा के क्षेत्र में उनका पूरा ध्यान रखें, इसलिए बेटी बचाओ भी बहुत जरूरी है और बेटी पढ़ाओ भी बहुत जरूरी है, मैं उम्मीद करता हूं कि इसमें हम अवश्य सबके सहयोग से कामयाब होंगे। आज जब प्रोग्राम दिए गए अभी, मैं समझता हूं कि एक के बाद एक लोगो का विमोचन भी हुआ, वो तमाम बहुत महत्व रखते हैं और बालश्रम को लेकर जो बच्चे यहां पर आए हैं, कोरोना के पैकेज जो हमने दिए थे, वो परिवार भी कुछ आए हैं और विपरीत परिस्थितियों में जो शिक्षा का मुकाम हासिल किया है, हमारी वो बालिकाएं भी आई हैं और जिस प्रकार दीपशिखा कंवर ने, सुश्री सोना बावरी ने जो अपनी बात कही है, वो अपने आपमें एक कॉन्फिडेंस पैदा करती है बच्चों के अंदर। मैं उम्मीद करता हूं कि आज के प्रोग्राम में हम सब यहां बैठे हुए हैं, एक नए संकल्प के साथ में जाएंगे कि किस प्रकार से हम आने वाले वक्त के अंदर, विशेष रूप से अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस है, तो बालिकाओं का कैसे हम लोग ध्यान रख सकें अधिक से अधिक, उस पर हम लोग आगे बढ़ें और मैं उम्मीद करता हूं कि उसमें हम लोग अवश्य कामयाब होंगे। योजनाएं एक के बाद एक प्रारंभ की गई हैं, चाहे उड़ान योजना हो निःशुल्क सेनेटरी पेड वितरण का लोगो रिलीज किया गया हो उड़ान के रूप में, इंदिरा शोध संस्थान की हमने घोषणा की थी बजट के अंदर, जिससे महिलाओं की जो समस्याएं हैं, बालिकाओं को जी समस्याएं हैं, उन पर शोध हो सके, रिसर्च हो सके, ये प्रोग्राम भी अपने आपमें बहुत महत्वपूर्ण प्रोग्राम है और बाल अधिकार संरक्षण आयोग के द्वारा पोस्टर का विमोचन किया गया। इस मुबारक मौके पर मैं कहना चाहूंगा कि एक कॉन्ट्रोवर्सी चल रही है राजस्थान के अंदर कि विवाह का रजिस्ट्रेशन जो है उसका भी एक कानून पास हुआ अभी असेंबली के अंदर, सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश था कि तमाम शादियां जो होती हैं उनका रजिस्ट्रेशन होना ही चाहिए, जिससे कि बाद में उनके परिवार में कोई बच्चा पैदा हो, बचपन में बाल विवाह किसी का हो गया, बड़े हुए वो लोग, उनके बच्चे पैदा हो गए, उनकी प्रॉपर्टी या उनके खानदान में जो लिगेसी है उनके माता-पिता की, उनके दादा-दादी की, उसमें अड़चन नहीं आए, तो सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शादी किसी की भी हो, उसके बावजूद भी उसका रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है, उस भावना के अनुकूल यहां पर एक कानून पास हो गया। उसकी कॉन्ट्रोवर्सी पैदा पूरे देश में हुई कि भई इस कानून से तो बाल विवाह को प्रोत्साहन मिलेगा। हमने तय किया है कि हमारी कोई प्रतिष्ठा का सवाल नहीं है ये, हम इसको वापस लॉ से दिखवा रहे हैं और गवर्नर साहब से निवेदन करेंगे कि जो कानून हमने पास किया है वो कानून वापस भेज दें हमारे पास में और उसको दिखवा देंगे, अगर उसको दिखवाने के बाद में जरूरत समझेंगे, तो उसको वापस आगे बढ़ाएंगे, वरना उसको नहीं बढ़ाएंगे आगे, हमें कोई दिक्कत नहीं है। ये तो सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला था उसको लेकर कि शादी का रजिस्ट्रेशन होना जरूरी है, ये कर दिया गया था और मुझे उम्मीद है कि जो कानूनी राय हमने ली भी है, आगे भी लेंगे और राजस्थान में किसी भी कीमत पर बाल विवाह नहीं हो, ये सरकार का संकल्प है, उसके साथ हम कोई कॉम्प्रोमाइज नहीं करेंगे, ये मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं और जो प्रोग्राम आज रखा गया है और मैं समझता हूं कि इसमें जो प्रोग्राम अभी आपके सामने प्रस्तुत किए गए, उसमें सब बातें आ जाती हैं क्योंकि इतनी स्कीमें हैं छात्राओं को लिए भी, बालिकाओं के लिए भी, योजनाएं सरकार की हैं, सवाल इस बात का है कि हमारे साथी ऐसे हों जिनके अपने एनजीओ हों या एनजीओ बनाएं, जो इम्दाद लोगों की करने के लिए आगे आएं, जैसे तिवारी जी आगे आए हुए हैं, ऐसी और भी कई संस्थाओं के लोग बैठे हुए हैं, उनके माध्यम से हम सरकार की योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचा सकते हैं जिनके लिए ये योजनाएं बनी हैं। दुर्भाग्य से उसके अभाव के अंदर कई बार योजनाएं पहुंचती नहीं हैं, वरना इंदिरा गांधी के नाम से भी योजनाएं हैं, स्कॉलरशिप की योजनाएं हैं, लाखों साइकिलें देने की योजनाएं हैं, 10 हजार स्कूटी दे रहे हैं हम लोग, 80 हजार की स्कूटी होगी एक, कालीबाई भील के नाम से, जो फ्रीडम मूवमेंट में शहीद हो गई थीं डूंगरपुर के अंदर, कोई कमी नहीं है स्कीमों की और मैं चाहूंगा कि उनके बारे में आप, अभी तो मैं उस पर जिक्र नहीं करूंगा, बहुत लंबा हो जाएगा। अभी हमने 123 कॉलेज खोल दिए हैं राजस्थान के अंदर, इतिहास बनाया है राजस्थान के अंदर, 123 में से 33 कॉलेज महिलाओं की खोली हैं हम लोगों ने, और तो और ये कह दिया हम लोगों ने कि 500 बालिकाएं जहां होंगी जिस सीनियर सेकेंडरी स्कूल के अंदर, उसको कॉलेज के अंदर कन्वर्ट कर दिया जाएगा। इस प्रकार से कई बढ़िया-बढ़िया फैसले हम लोगों ने लिए हैं, गार्गी पुरस्कार भी है, बालिका प्रोत्साहन पुरस्कार भी है, पता नहीं इतनी सारी योजनाएं हैं कि हम लोगों को खुद को ही याद नहीं रहती हैं। इसलिए मैंने कहा कि, जिस प्रकार पालनहार योजना में लाखों बच्चों को, करीब 5-6 लाख बच्चों को फायदा मिल चुका है और एक कोई बच्चा अनाथ हो गया या कोई तकलीफ आ गई उसके घर में, तो किस प्रकार से जो कोई उसको पालेगा, उसके नाना-नानी पालें या और कोई पालें, तो उनके लिए 1000 रुपए प्रतिमाह दे रहे हैं उनको, 2000 रुपए अलग से उनके लिए व्यवस्था हो रही है प्रतिवर्ष, उनके लिए वस्त्र, स्वेटर इत्यादि के लिए। इसलिए मैंने कहा कि स्कीमों की कमी नहीं है, कमी इस बात की है कि हम कैसे लाभ पहुंचाएं और मेरा अनुभव कहता है, अभी मैं गया था अभी बाय इलेक्शन के अंदर उदयपुर के अंदर और मैंने देखा कि चिरंजीवी योजना लागू की हम लोगों ने 5 लाख रुपए तक का बीमा किया है, हर परिवार का चाहे वो गरीब है, चाहे कोई भी है, 5 लाख रुपए का बीमा बिना पैसे दिए हुए बीमारी के लिए आज बीमा हो गया है राजस्थान में। अगर पैसे वाले हैं तो खाली साढ़े 850 रुपए देने पड़ते हैं उसको, अब बताइए, 5 लाख रुपए तक का बीमा, इलाज चाहे प्राइवेट का हो चाहे सरकारी अस्पताल में करवाओ, 5 लाख रुपए तक का बीमा उसके परिवार को मिल गया है। धरियावद में मैंने देखा, वहां मैंने हाथ खड़े करवाए, कई आदिवासियों को मालूम ही नहीं है अभी तक। उनमें कोई आदमी बीमार पड़ेगा, उदयपुर जाएगा, आप जानते हो हमारे यहां ऐसे संस्कार हैं अपनी मां-बाप की सेवा करने के भी, चाहे जमीन गिरवी रखनी पड़े, चाहे मकान गिरवी रखना पड़े, चाहे गहने बेचने पड़ें, हम जानते हैं कि बहुत बुजुर्ग आदमी हैं, बचेंगे नहीं, तब भी हम उनके लिए पूरा पैसा खर्च करते हैं और वो जाएगा तो 1 लाख रुपए का, डेढ़ लाख रुपए का, 50 हजार रुपए का बिल बन जाएगा और अगर फॉर्म भरा हुआ होता है चिरंजीवी योजना का, तो चाहे 1 लाख का बिल बने, चाहे 2 लाख का बिल बने, उसको एक रुपया भी नहीं देना पड़ेगा, इतनी शानदार योजना है। तो ये एग्जाम्पल मैंने इसलिए दिया कि उसके बावजूद भी लोगों को मालूम नहीं होता है। मैंने खुद ने भी मेरा इलाज करवाया, मुझे कुछ पोस्ट कोविड प्रॉब्लम हो गई थी, आपको मालूम होगा, सुना होगा अपने स्टेंट लगा है मुझे एक, मुझे एक रुपया नहीं देना पड़ा, पूरा मेरा इलाज फ्री हुआ एसएमएस के अंदर, तो सबके लिए कर दिया है. हिंदुस्तान में एकमात्र राजस्थान राज्य है जहां पर पूरी पब्लिक का सबका बीमा कर दिया गया है, खाली आपको अपना रजिस्ट्रेशन करवाना है और कुछ नहीं करवाना है। इसलिए मैं इस मुबारक मौके पर इतना ही कहना चाहूंगा कि हम सब मिलकर जो सोशल वर्क है, उस पर हम लोग मिलकर पूरा ध्यान लगाएं। उड़ान योजना जो है वो बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है, उस पर मैं कहना चाहूंगा कि कृपा करके जमाना बदल गया है, 21st सेंचुरी आ गई राजीव गांधी के सपनों की, मोबाइल फोन, इंटरनेट की सेवाएं हमारे पास में हैं, गूगल के माध्यम से आप पूरी दुनिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और फिर भी अगर गांवों में महिलाओं को तकलीफ हो, ये उड़ान योजना जो आई है सेनेटरी नेपकिन की, संकोच में हम बात ही नहीं करें, 40 साल पहले, 50 साल पहले तो ये स्थिति थी, अब जमाना बदल गया है, तो गांवों में औरतें बीमार पड़ती हैं, इलाज करवाती हैं, इन्फेक्शन हो जाते हैं, तो ये इतनी बड़ी योजना लागू की है सरकार ने, उसमें आप सबकी भागीदारी होनी चाहिए, 200 करोड़ रुपए हम लोगों ने बजट रखा है इसके लिए। अब सवाल ये है कि गांव-गांव घर-घर में इस बात को हम फैलाएं और उनको उड़ान योजना के माध्यम से सामग्री को उपलब्ध करवाएं। इसलिए मैं, एक और जो हमारे तिवारी जी ने कहा, स्कूल खोलने के लिए, वो स्कूल नहीं है वो आवासीय विद्यालय हैं, तो आवासीय विद्यालय में और स्कूल में रात-दिन का फर्क है। स्कूल में तो आप समझ लो कि खुल गई हैं आज, स्कूलों की कोई दिक्कत नहीं है, आवासीय विद्यालयों के लिए हम पूरी स्कीम बनाएंगे और कितने बच्चे होंगे, कितनी हॉस्टल में रहने की सुविधा होगी, वो आप हमें लिखकर दीजिए, मैं आपके वहां पालड़ीमीणा में हम कैसे करते हैं, मैं चाहूंगा कि आप उसमें प्रैक्टिकली क्या हो सकता है, वो हमें बताएं क्योंकि पालड़ीमीणा मेरे वक्त का ही बसाया हुआ है वहां पर, जब यहां पर एन्क्रोचमेंट हटे थे कच्ची बस्तियों के, तो मैंने ही वो अलग कॉलोनी बसाई थी पालड़ीमीणा की, इसलिए वहां आप निश्चिंत रहो, वहां जो आप चाहोगे वो मिलेगा आपको, निश्चिंत रहो। संगीता बेनीवाल जी जबसे बनी हैं चेयरपर्सन, तबसे ही मैं समझता हूं कि काफी जो है, जिस प्रकार से इन्होंने काम शुरू किया है, उसके लिए मैं सोचता हूं कि बाल अधिकार के बारे में बाल मजदूर बहुत बड़ा चैलेंज है सरकार के सामने पूरे देश के अंदर, बचपन बिगड़ जाता है और जिंदगी पर क्या बीतती है आप सोच सकते हो, क्या स्थिति बनती है। रात को मैंने एक फिल्म देखी, कोई 20-25 साल बाद फिल्म देखी होगी, फिल्में मैं देखता नहीं हूं, अभी मुझे डॉक्टर्स ने कहा कि आप अच्छी सीरियल्स देखो, फिल्म देखो, थोड़ा चेंज करो अपने आपको क्योंकि आपके हार्ट में ब्लॉक हुआ है तो थोड़ा टाइम लगेगा, तो मैंने कल मदर इंडिया फिल्म देखी, आप भी जाकर देखना कभी, या देखी होगी आपमें से कई लोगों ने। ये मदर इंडिया की बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि आपका एक नारा है कि नन्हे हाथ कलम के साथ, एक बड़ा मार्मिक नारा है ये और रात को मैंने एक फिल्म देखी, तो फिल्म में जो है, पहले के जमाने में जो है आप जानते हैं कि किसानों को लूटते थे लोग, जो साहूकार होते थे वो ब्याज में पैसा देते थे, मूल से ज्यादा ब्याज वसूल कर लेते थे तब भी कर्जा चढ़ता रहता था। तो जो लुटते-लुटते परिवार बर्बाद हो जाते थे, तो उस फिल्म के अंदर सुनील दत्त जो है, उसका परिवार भी लुट रहा था तो जब वो बड़ा हुआ तो उसने स्कूल में जाकर पढ़ाई शुरू की और उद्देश्य ये था उसको पढ़ाने का कि वो कम से कम उस साहूकार का जो हिसाब-किताब है वो पढ़ सके। तो वो स्कूल में, क्योंकि शिक्षा देते भी नहीं थे स्कूल के अंदर, तो वो पढ़ नहीं पाया। इसलिए जब साहूकार के पास गया, उसने सामने कर दिया वो पोथी उसको दिखाने के लिए, तो वो पढ़ नहीं पाया, तो एक मैसेज गया कि अगर ये पढ़ा-लिखा होता तो उसका परिवार आज लुटता नहीं। वो वाली बात है कि बच्चे अगर बचपन में पढ़ाई नहीं करते हैं, तो जिंदगीभर बाद में चाहे वो कुछ भी करें, पर कुछ होता नहीं है, तो शिक्षा पर जोर देना बहुत आवश्यक है। मुझे याद है 20 साल पहले हम बहुत पीछे थे राजस्थान के अंदर, लड़कियों की शिक्षा में तो और पीछे थे और शेड्यूल कास्ट की जो बहनें थीं, बच्चियां, उनकी तो और ज्यादा, बिलकुल न के बराबर शिक्षा थी, अब काफी हम आगे बढ़े हैं। तो मैं कहना चाहूंगा आपको कि कृपा करके आप लोग ध्यान रखें और शिक्षा के अभियान को आगे बढ़ाएं। हमने फ्री कर दिया है, लड़कियों की शिक्षा आज पूरी तरह फ्री है, विश्वविद्यालय तक फ्री शिक्षा कर दी, विश्वविद्यालय में जो अलग से कुछ फीस ली जाती थी, वो भी फ्री कर दी है, एक प्रकार से पूरी तरह फ्री है लड़कियों की शिक्षा राजस्थान के अंदर। अब सवाल ये है कि एक भी बालक-बालिका शिक्षा से वंचित नहीं रहे, ये काम तो हम लोगों को करना पड़ेगा जो हम लोग जो रुचि रखते हैं समाज के अंदर और मुझे उम्मीद है कि अभी हमने दो प्रयोग किए कोरोना के अंदर देखा आपने। मैंने कहा कि कोई भूखा नहीं सोना चाहिए और मुझे आप सभी पर गर्व है, मुझे आप सब पर गर्व है, सब प्रदेशवासियों पर गर्व है कि वास्तव में पहली लहर जब आई थी, तो कोई भूखा सोया ही नहीं, इतना ध्यान रखा लोगों ने, खाना बनाया, खाना खिलाया, खाना पहुंचाया पुलिसवालों ने, कॉन्सटेबल तक ने, सबने सेवा की है, सबने मिलकर कोरोना का मुकाबला किया, इसलिए राजस्थान का नाम देश में और दुनिया में पहुंच गया, भीलवाड़ा मॉडल पहुंच गया। अभी कोई 26 लाख बच्चे गए रीट का एग्जाम देने के लिए, हमने बसें फ्री कर दीं उनके लिए रोडवेज की कर दीं, प्राइवेट की कर दीं, पर साथ में हमने कहा कि 26 लाख बच्चे एकसाथ में आएंगे इतने शहरों के अंदर, कहां तो रहेंगे, कहां खाना खाएंगे, बड़ी तकलीफ होगी। खाली हमने एक आह्वान किया और मुझे खुशी है कहते हुए कि अधिकांश जगहों पर करीब-करीब खाने की व्यवस्था भी हुई, ठहरने की व्यवस्था हुई। इतने बच्चे खुश हो गए जो बाहर के बच्चे आए थे आगरा के या आसपास के, और ज्यादा खुश हो गए कि ऐसा तो हमने कभी देखा ही नहीं। तो राजस्थान में हमारे परंपराएं हैं, राजस्थान में महान परंपराएं हमारे सदियों से चली आ रही हैं और मैं उम्मीद करता हूं कि वो परंपराएं और मजबूत होंगी आगे आने वाले वक्त के अंदर। हम सब मिलकर प्रदेश को और प्रदेशवासियों को आगे बढ़ाने के अंदर हर क्षेत्र के अंदर, उसमें हम लोग कोई पीछे नहीं रहेंगे और स्पोर्ट्स में अभी जो अवनि लेखरा जिस प्रकार से नाम हुआ पहली बार राजस्थान के अंदर भी, ये अवनि लेखरा की उपलब्धि कोई कम नहीं है, ये बहुत बड़ी उपलब्धि है और मैं इसको भी कहना चाहूंगा कि पहले कृष्णा पूनिया जी आई थीं, लेखरा फॉरेस्ट विभाग में लग गई हैं, तो हमारा बहुत आशीर्वाद आपके साथ में है। हम चाहेंगे कि आप बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के साथ-साथ में हम स्पोर्ट्स के अंदर भी क्या कर सकते हैं, वो भी आप बच्चों को प्रेरणा दें, ये मैं आपसे अपेक्षा करूंगा, यही बात कहता हुआ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं और आप सबको मैं बहुत-बहुत मुबारकबाद देता हूं, धन्यवाद, जय हिंद, धन्यवाद।

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