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Talked to media at Jyotiba Phule Circle (28th November)

दिनांक
28/11/2021
स्थान
Jaipur


महात्मा ज्योतिबा फुले जी की पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है और महाराष्ट्र में विशेष रूप से क्योंकि अगर 100 वर्ष पहले उस जमाने में जब सामाजिक रीति-रिवाज ऐसे थे, कोई कल्पना नहीं कर सकता आज। स्त्रियों को पढ़ाना तो पाप समझते थे, उस वक्त उन्होंने अपनी पत्नी सावित्री बाई फुले को शिक्षा दी, फिर वो खुद टीचर बनीं और सामाजिक सुधार के अंदर जिस रूप में क्रांतिकारी काम उन्होंने किए, उसके कारण से पूरे महाराष्ट्र के अंदर घर-घर में, गांव में, कस्बों में, जिलों में सब जगह उनको याद किया जाता है। अगर महाराष्ट्र जाएंगे तो सब जिलों के अंदर, सब कस्बो के अंदर, कोई ना कोई शिक्षण संस्थान ये आपको मूर्ति लगी हुई मिलेगी। और तो और महाराष्ट्र के मंत्रालय के अंदर भी आदमकद मूर्ति ज्योतिबा फुले की लगी हुई है। उससे अंदाज कर सकते हैं कि वो कैसा व्यक्तित्व था। डॉ. अंबेडकर साहब ने तो उनको अपना गुरू माना था क्योंकि वो जानते थे कि अंबेडकर साहब की जो भावना उनकी खुद की है, वो ही भावना ज्योतिबा फुले की उस जमाने में थी और उसी आधार पर लड़ाई लड़ी गई पूरे देश के अंदर। मैं समझता हूं कि ऐसे महापुरुष को याद करना, युवा पीढ़ी को प्रेरणा देना होता है कि हमें देश को किस दिशा में ले जाना चाहिए क्योंकि जब तक प्रेम, भाईचारा, सामाजिक सद्भाव, सामाजिक न्याय नहीं मिलेगा सोशल जस्टिस नहीं मिलेगा, तब तक मुल्क एक व अखंड नहीं रह सकता है, समाज में सामंजस्य, प्रेम व भाईचारा रह नहीं सकता है और कोई मुल्क, कोई प्रदेश, कोई गांव, कोई घर जहां पर आपस में भाईचारा होता है वही आगे बढ़ता है और जहां अशांति होती है, हिंसा होती है, वो कभी आगे नहीं बढ़ सकता। तो इसलिए मूल भावना यह है कि हम सब कैसे आज के माहौल में जो है विशेष आवश्यकता है ज्योतिबा फुले जैसे महापुरुषों के आदर्शों को अपनाने की और लोकतंत्र और संविधान की मूल भावना भी यही है। तो आज हमें लोकतंत्र की रक्षा करनी है, संविधान की रक्षा करनी है, तो हमें संविधान की मूल भावना को जिसमें सारा सार आ जाता है, ज्योतिबा फुले का भी आ जाता है, डॉ. अंबेडकर साहब का तो उन्होंने खुद ने निर्माण किया संविधान का, वो आ जाता है और आजादी के योद्धाओं का, महात्मा गांधी जी के सानिध्य में जो लड़ाई लड़ी गई, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद और डॉ. अंबेडकर साहब जैसे बड़े-बड़े नेता थे उस जमाने में, लंबी लिस्ट है, उन सबको जब याद करते हैं तो पाते हैं कि संविधान को बचाना आवश्यक है, देश को बचाने के लिए। आज उनकी पुण्यतिथि है और पुण्यतिथि के अवसर पर यहां पर हम सब लोग सब इकट्ठा हुए, आप देख रहे हैं इतनी बड़ी संख्या में आए हैं सब लोग। ये मायने रखता है कि उनके प्रति कितनी आस्था है। मैं समझता हूं कि उसकी भावना के अनुसार हमें चलना है।

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