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सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में 15वें वित्त आयोग के साथ बैठक

दिनांक
09/09/2019
स्थान
जयपुर


सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में 15वें वित्त आयोग के साथ बैठक में प्रदेश की विषम भौगोलिक एवं सामाजिक स्थिति, संसाधनों की सीमितता तथा भावी आवश्यकताओं को देखते हुए 15वें वित्तीय आयोग से राज्य को पर्याप्त वित्तीय सहायता प्रदान करने का आग्रह किया है। पेयजल एवं सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, ऊर्जा, सूचना प्रौद्योगिकी एवं पर्यटन के विकास के लिए राज्य को अतिरिक्त संसाधन आवंटित करने का अनुरोध किया है। सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, सातवें वेतनमान, उदय योजना तथा कर्जमाफी के कारण राजकोष पर बढे़ दबाव के बावजूद राज्य सरकार ने एफआरबीएम एक्ट की काफी हद तक पालना की है, जो कि सरकार के कुशल वित्तीय प्रबंधन को दर्शाता है।
राज्य के हितों की पुरजोर पैरवी करते हुए आशा है कि प्रदेश की विशेष परिस्थतियों का आकलन कर आयोग राज्य को हस्तांतरित होने वाले संसाधनों में पर्याप्त वृद्धि के लिए केंद्र सरकार से अनुशंसा करेगा। राजस्थान की विषम भौगोलिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि आयोग हर राज्य की क्षेत्र विशेष की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अपनी सिफारिशें करे।
केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी 42 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की मांग रखी। संवैधानिक रूप से राज्यों को आवंटित विषयों पर होने वाले राज्यों के अनिवार्य व्यय तथा प्रदान की जा रही सेवाओं में व्यय होने वाली धनराशि के मद्देनजर केंद्रीय करों में राज्यों की हिस्सेदारी बढ़ाना आवश्यक है। केंद्र सरकार द्वारा लगाए जाने वाले सेस एवं सरचार्ज में राज्यों को भी हिस्सेदारी मिले। योग से अनुरोध किया कि ऑफशॉर रॉयल्टी, सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश एवं स्पेक्ट्रम की बिक्री जैसे केंद्र सरकार के गैर कर राजस्व से भी राज्यों को हिस्सा दिया जाए।
क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े राज्य तथा छितरी आबादी के कारण राजस्थान में आमजन को सेवा प्रदायगी में प्रति इकाई लागत अन्य राज्यों के मुकाबले कहीं अधिक आती है, इसे देखते हुए आयोग संसाधनों का अंतरण करते समय राजस्थान की इस विशेष स्थिति का ध्यान रखे। राज्य की लागत असमानताओं और बैठक में उठाए गए मुद्दों को हस्तांतरण फॉर्मूले में शामिल किया जाए।

बीते कुछ समय से केंद्र प्रवर्तित योजनाओं के फण्डिंग पैटर्न में किए गए बदलाव से राज्यांश में बढ़ोतरी हुई है। इस कारण राज्यों को इन योजनाओं में अधिक राशि खर्च करनी पड़ रही है। अधिकतर योजनाएं जो पहले शत-प्रतिशत केंद्रीय भागीदारी, 90 अनुपात 10, 75 अनुपात 25 के आधार पर थीं, उन्हें अब 60 अनुपात 40 तथा बराबर की भागीदारी में बदल दिया गया है। राज्यों के हित पर इससे प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी से मिलने वाले राजस्व में निर्धारित वृद्धि नहीं होने के कारण केंद्र द्वारा राज्यों को होने वाले घाटे की क्षतिपूर्ति का भुगतान 2024-25 तक किया जाए, इसके लिए वित्त आयोग केंद्र सरकार से सिफारिश करे।
उदय योजना के कारण प्रदेश के राजकोष पर 62 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है। राज्य के डिस्कॉम्स के लिए विशेष सहायता की सिफारिश करने का आग्रह किया। भू-जल दोहन में इस्तेमाल होने वाली बिजली की लागत अधिक होती है। किसानों पर इसका भार नहीं पडे़ इसके लिए राज्य सरकार को अनुदान देना पड़ता है। राज्य में सौर ऊर्जा उत्पादन की प्रचुर सम्भावनाएं हैं। राज्य सरकार इसके लिए नीति बना रही है। इससे प्रदेश में सौर ऊर्जा उत्पादन तेजी से बढे़गा।
लगभग सभी राज्यों में पंचायतीराज संस्थान और नगरीय निकाय नाजुक वित्तीय स्थिति का सामना कर रहे हैं। अनुरोध किया कि केंद्रीय वित्त आयोग 14वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं के तहत स्थानीय निकायों को देय अनुदान में न्यूनतम ढाई गुना बढ़ोतरी की सिफारिश करे। केंद्र की फ्लैगशिप योजनाओं जैसे स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के लक्ष्य हासिल करने के लिए नगरीय निकायों को अतिरिक्त मानवीय संसाधन, मशीनों एवं भौतिक संसाधनों की आवश्यकता होती है। इसके लिए निकायों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध करवाए जाएं।
योजना आयोग के खत्म होने के बाद वित्त आयोग ही राज्यों के लिए वित्तीय संसाधनों के मामले में आशा की किरण है। वर्तमान समय में देश की अर्थव्यवस्था जिन हालातों से गुजर रही है। जीएसटी का कलेक्शन कम हो रहा है। तमाम राज्य भी इससे अछूते नहीं रहे हैं। राजस्थान को इस साल 1800 करोड़ रुपए केंद्र से कम मिले हैं। ऎसे विपरीत हालातों में 15वें वित्त आयोग को काम करना पड़ रहा है। जीएसटी आने के बाद तो राजस्व अर्जन के मामले में राज्य काफी हद तक केंद्र पर ही निर्भर हो गए हैं। वित्तीय हस्तांतरण में वित्त आयोग की बड़ी भूमिका है। आयोग राज्यों के हित में संवेदनशील रूख अपनाए।
वन संरक्षण अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, जीएसटी एक्ट जैसे केंद्रीय कानूनों की क्रियान्विति के लिए राज्यों द्वारा किए जा रहे अनिवार्य व्यय को ध्यान में रखते हुए राज्यों को अधिक राशि का हस्तांतरण किया जाना चाहिए। पूर्व के वित्त आयोगों की अनुशंसा पर सड़क, पुल, सिंचाई परिसम्पत्तियों, वनों तथा सार्वजनिक सम्पत्तियों के रख-रखाव के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान किए गए थे, लेकिन 14वें वित्त आयोग ने ऎसे किसी अनुदान की सिफारिश नहीं की। ये अनुदान फिर से शुरू करने का आग्रह किया।
वर्तमान दौर में गरीब एवं पिछडे़ वर्गों को संबल देने के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का संचालन बेहद जरूरी है। राजस्थान में मुख्यमंत्री निशुल्क दवा एवं जांच योजना इस दिशा में सरकार की एक सफलतम योजना है। हमने इसका दायरा बढ़ाते हुए इसमें गंभीर बीमारियों की दवाओं को शामिल किया है और दवाओं एवं जांचों की संख्या भी बढाई है। सामाजिक सुरक्षा की दृष्टि से राजस्थान सरकार की यह ऎसी पहल है, जिसका अनुकरण अन्य राज्यों को भी करना चाहिए। यह हमारी सरकार की दृढ़ मान्यता है कि प्रदेश के हर जरूरतमंद व्यक्ति को सामाजिक सुरक्षा मिले। हमें यह बताते हुए खुशी है कि हमारी सरकार इस दिशा में आगे बढ़ रही है।
देश में ऑटोमोबाइल, ट्रांसपोर्ट तथा टैक्सटाइल सहित अन्य कई क्षेत्र संकट के दौर से गुजर रहे हैं। राज्य सरकार अपने सीमित संसाधनों के बावजूद इन उद्योगों को बढ़ावा देने का हरसम्भव प्रयास कर रही है। मुख्य सचिव के स्तर पर ऑटोमोबाइल एवं टैक्सटाइल उद्यमियों के साथ बैठक भी की गई है।
बैठक में विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिवों एवं शासन सचिवों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित प्रस्तुतीकरण दिया और प्रदेश की आवश्यकताओं के अनुरूप वित्तीय संसाधन आवंटित करने का आग्रह किया।

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