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मातृकुण्डिया किसान सम्मेलन

दिनांक
27/02/2021
स्थान
मातृकुण्डिया


इतनी भयंकर ठंड के अंदर 200 से ज्यादा लोग मारे गए...बेशर्मी की हद है, संवेदनहीनता की हद है, देश सोच नहीं पा रहा है इनको दिल्ली में नींद कैसे आती होगी कि बॉर्डर पर किसान सर्दी में मर रहा है, ठंड लग रही है... बुजुर्गों को, बच्चों को, माताओं-बहनों को सबको लेकर बैठे हैं किसान।
हिन्दुस्तान के इतिहास में ऐसा आंदोलन कभी हुआ ही नहीं होगा। दुनिया देख रही है, दुनिया आलोचना कर रही है, वहां के पढ़े लिखे लोग, वहां के पत्रकार, वहां के कलाकार आलोचना कर रहे हैं इनको किसी तरह की परवाह नहीं है। जिद पर अड़े हुए हैं, अरे आप किसान हित की बात करते हो, किसान कहता है आप कानून वापस ले लो, हम सब से सलाह करो वापस कानून बना दीजिये कौन मना करता है आपको, विपक्ष की पार्टियां कह रही हैं, राहुल गांधी जी कह रहे हैं फिर-फिर के हिन्दुस्तान के अंदर कोई परवाह ही नहीं इन लोगों को। तो आप सोच सकते हैं कि किसान के हित की बात करने वाले लोग किसानों के लिए क्या कानून लेकर आए हैं।
मोदी जी पहले मुख्यमंत्री थे इन्होंने लिखा मनमोहन सिंह जी को आप न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानून बनाइये अब जो कानून इन्होंने नए बनाए हैं उस पर चुप्पी साध ली थी। ऐसी-ऐसी धाराएं लगा दी हैं कि आने वाले वक़्त में पता नहीं किसानों का क्या होगा।

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