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स्मृति चिन्हों (mementos) के ऑनलाइन ऑक्शन हेतु मुख्यमंत्री निवास पर भारत सेवा संस्थान द्वारा आयोजित वेबसाइट लॉन्चिंग कार्यक्रम:

दिनांक
18/04/2022
स्थान
जयपुर


अभी बहुत ही संक्षिप्त और बहुत ही गरिमामय प्रोग्राम रखा गया है। जैसा अभी राजीव अरोड़ा जी बता रहे थे आपको कि भारत सेवा संस्थान एक एनजीओ के रूप में काम कर रहा है और इसका संस्थापक अध्यक्ष मैं खुद ही था। पर डॉ. जीएस बाफना जी और राजीव शर्मा जी, राजीव शर्मा जी, ये सब इस काम को देख रहे हैं और ये जो आज का प्रोग्राम रखा गया है, जो अभी आपने देखा, अभी डॉ. सीपी जोशी जी पूछ रहे थे कि ये आइडिया कहां से आया? तो मैं उनको कह रहा था कि मैं अभी बताऊंगा। मैं जब एनएसयूआई में था छात्र जीवन में और तब मैं दिल्ली जाया करता था, तो इंदिरा गांधी जी थीं कांग्रेस प्रेसिडेंट और प्राइम मिनिस्टर, तब मैंने देखा वहां पर कि जो मोमेंटो इंदिरा जी को मिलते थे, उसका एग्जीबिशन लगकर वो सेल होते थे। बाद में मैंने लगातार ऐसे प्रोग्राम मैंने कई बार देखे, राजीव गांधी के वक्त में देखे, सोनिया जी के वक्त में भी देखे। तो जब मैं खुद आपके आशीर्वाद से बन गया मुख्यमंत्री 1998 के अंदर, तो करगिल युद्ध हुआ था, वाजपेयी जी थे प्राइम मिनिस्टर, जब पहली बार हमने ये प्रोग्राम किया था और अभी राजीव अरोड़ा जी बता रहे थे आपको कि लगातार उसके बाद में जब भी कोई संकट आया, चाहे वो भूकंप आ गया हो गुजरात का, चाहे वो सुनामी आ गई हो एक बार, ओडिशा में बहुत भयंकर तूफान आ गया था, कश्मीर में भूकंप भी आ गया था एक बार और बाढ़ भी आ गई थी और उसके अलावा भी अभी राजीव अरोड़ा जी बता रहे थे आपको कि केरल में बाढ़ आई थी, तब भी हम लोगों ने भारत सेवा संस्थान की तरफ से वहां पर काफी यहां से ट्रक लोड सामान भिजवाए गए थे, पुलवामा के शहीदों के लिए भी प्रोग्राम किया गया था और मुझे याद है कि जब इन प्रोग्राम्स के अंदर सहयोग बहुत मिला पब्लिक का, जब कभी इस प्रोग्राम को किया गया, एक बार तो जोधपुर के अंदर तो शॉल जो थीं, जो मोमेंटो भेंट करते हैं, शॉल को वहां पर ऑक्शन किया गया और करीब 22-25 लाख रुपए आ गए थे। यहां तो हमने महावीर स्कूल के अंदर भी प्रोग्राम किए। एक बार डॉ. मनमोहन सिंह जी को ले जाकर करीब 40-45 लाख रुपए दिए, हमारे कुछ साथी बैठे होंगे जो साथ थे। एक बार सोनिया गांधी जी को, राजीव गांधी आपदा प्रबंधन फंड बना हुआ है, सुनामी के वक्त में उनको ले जाकर हमने चेक दिया। तो ये तमाम काम, जो चेक आते हैं वो हम भेंट करते हैं। इस प्रकार से मैंने देखा है कि राजस्थान की जो परंपरा है लोगों की, भावना है हमेशा, उसमें हमेशा संकट के वक्त में वो पीछे नहीं रहते हैं। वैसे तो हर बार यहां के लोगों ने आकर जैसे ही कोई घटना हुई करगिल की, या सुनामी की, या ओडिशा की, तो सीएम रिलीफ फंड के अंदर 2 लाख रुपए के चैक देते हैं कि बच्चे आते हैं साथ में छोटे-छोटे, बच्चे लाकर चैक देते हैं कि साहब बच्चों ने बचत की है, तो ये सिलसिला चलता ही रहता है और मैं समझता हूं कि अच्छे संस्कार भी पड़ते हैं बच्चों के अंदर और मैं बताना चाहूंगा आपको ओडिशा के तूफान की बात, ओडिशा में तूफान आया था तो मैं खुद गया था वहां पर, तूफान बहुत ही भयंकर आया था उस जमाने के अंदर और मैंने देखा कि उस जमाने में करीब, मुझे याद नहीं पर 15 करोड़ रुपए के आसपास पैसा इकट्ठा हुआ होगा सीएम रिलीफ फंड के अंदर, उसमें कोई ये मोमेंटो की बात नहीं थी, वैसे ही। तो कहने का मतलब है कि हमेशा राजस्थान के लोगों ने संकट की घड़ी में देश में कहीं भी किसी कोने में संकट आया हो, अपना संकट मानकर उन्होंने अपने हाथ बढ़ाए हैं, ये मैंने महसूस किया है और ये हमारे प्रदेश की बहुत बड़ी खूबी भी है। इसलिए अभी जब काफी दिन से प्रोग्राम बन रहा था, बन रहा था, आखिर में बना, परंतु ये जो अभी आपको प्रजेंटेशन बताया गया, लोगों में स्मृति चिन्ह देने का रिवाज भी है, कहीं जाओ तो स्मृति चिन्ह याद बनाए रखने के लिए देते हैं और वो मेरे ख्याल से बढ़ता ही जा रहा है। उनको एक गर्व होता है कि मैं मंत्री जी को, विधायक महोदय को, मेंबर ऑफ पार्लियामेंट को या मुख्यमंत्री को हम सम्मान कर रहे हैं, ये हमारे यहां की परंपराएं हैं। पर ये जो मेंटेन करने वाली बात है, इसमें सुनीता गहलोत का हाथ है, मेरा कोई हाथ नहीं है क्योंकि मैं कभी जो मिलते हैं आइटम, तो मेरे जो पीएसओ होते हैं, उनका भी बहुत बड़ा सहयोग रहा, जो सिक्योरिटी में जाते हैं लोग आगे एडवांस में, उनको लेना पड़ता है, कई बार बड़ी तस्वीरें होती हैं, छोटी तस्वीरें होती हैं, बड़ा डिफिकल्ट काम है, पर फिर वो यहां तक पहुंचाना, उनको रखना, इतना बड़ा काम है कि एक मैं चला गया वहां पीछे जहां रखे हुए थे आइटम और इन लोगों ने परिवार, मेरी पत्नी ने, बाफना जी ने, राजीव अरोड़ा जी ने सब तैयारी कर ली थी और कोई कारण हो गया था शायद, पोस्टपॉन हो गया था प्रोग्राम, पर जब मैंने जाकर देखे आइटम, तो मुझे पहली बार मालूम पड़ा कि इतने सारे आइटम देखकर मैं तो चकित रह गया भई कि ये अपने बस की बात नहीं है, बहुत मुश्किल काम है ये। तो मेंटेन करने में पत्नी सुनीता गहलोत ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की, इसमें कोई दो राय नहीं है। कई बार सरकार चली जाती है, अब इन तमाम आइटम्स को शिफ्ट करो वहां पर ले जाकर, आप कल्पना करो कि क्या स्थिति बनती है? वहां फिर जमाओ उनको वापस, कहां रखो बॉक्सेज के अंदर कि ये डैमेज नहीं हों, बहुत मुश्किल काम है। अभी जोशी जी कह रहे थे कि मेंटेन बड़ा अच्छा किया हुआ है, तो मैंने कहा कि इसका राज़ भी मैं नहीं हूं, घरवाली हैं। पर बहुत अच्छा लगा कि आप सब पधारे यहां पर, ये प्रोग्राम कोई पॉलिटिकल था नहीं, बड़ा प्रोग्राम भी नहीं था, मैंने कहा कि इसी बहाने सबके साथ में चाय पीयेंगे और ये लॉन्चिंग करेंगे और प्रोग्राम 3 मई को करने जा रहे हैं भारत सेवा संस्थान वाले, कुछ लोग ऑनलाइन लेंगे या नहीं लेंगे, कुछ लोग वहां पर मैं खुद गया था महावीर स्कूल के अंदर 2 बार, बहुत लोगों में उत्साह रहता है, आप सब लोग बैठे हैं, आप सब लोग आते हैं वहां पर, बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं और मैं समझता हूं कि कोई कमी नहीं रहती है। मुख्य रूप से तो मुझे यही बात कहनी थी और जैसा अभी राजीव अरोड़ा जी कह रहे थे कि राजस्थान सरकार आज देश में सबसे आगे है, जिस प्रकार मेडिकल के अंदर, स्वास्थ्य सेवाओं के अंदर हमने जो निर्णय किए हैं, वो मेरे ख्याल से देश में कहीं नहीं हैं, पूरे प्रदेशवासियों का आप अगर इंश्योरेंस कर दो, मेरे ख्याल से देश में कहीं किसी राज्य में नहीं हुआ है। भारत सरकार भी जो आयुष्मान भारत है वो सोशियो इकोनॉमिक सर्वे वाले लोग हैं, मेरे ख्याल से आबादी के 1/3 होंगे या मुश्किल से आधे होंगे, उतने तक ही सीमित है। राजस्थान सरकार ने 10 लाख रुपए तक का इंश्योरेंस किया है कैशलेस चिरंजीवी योजना के नाम से और उसके साथ में कर दिया है, अगर भगवान करे कि एक्सीडेंट नहीं हो, पर एक्सीडेंट में कोई मर जाता है तो उसका 5 लाख रुपए का बीमा उसी के साथ में है और अभी जो अखिल अरोड़ा जी बैठे हैं ये, मैं इनका नाम बार-बार हर मीटिंग में लेता हूं ताकि इनका हौसला तो बढ़े ही बढ़े, सारे अधिकारियों का हौसला बढ़े कि अच्छे काम करने वालों को एप्रिशिएट करना चाहिए। अभी 200 करोड़ रुपए, ढाई सौ करोड़ रुपए लगाकर और हमने पुश किया है कि कोई किडनी ट्रांसप्लांट है, लिवर ट्रांसप्लांट है, बोन मैरो ट्रांसप्लांट है, ऐसी कोई गंभीर बीमारी है, जिसमें 10-15-20 लाख रुपए खर्च होते हैं, वो पैसा भी सरकार देगी, उसके ऊपर नहीं आएगा, इस प्रकार का हमने प्रोविजन कर दिया है। इस प्रकार राजस्थान जिस रूप में आगे बढ़ रहा है, इस बार सरकार बनते ही हम लोगों ने एक प्रोग्राम किया था मेडिकल कॉलेज के हॉल के अंदर, जहां पर डॉ. देवी शेट्टी भी आए थे, डॉ. सरीन भी आए थे, अच्छा प्रोग्राम हुआ था, प्रिवेंशन ऑफ मेडिसिन कि बीमार आदमी पड़े ही नहीं, ये भी डिपार्टमेंट होता है मेडिकल में, पर कोई ध्यान देता नहीं है, दिनेश तिवाड़ी बैठे हैं इनको मालूम होगा कि किस प्रकार से ये विभाग काम करता है, उसको हम स्ट्रेंथन करना चाहते हैं और निरोगी राजस्थान को लेकर एक कॉन्सेप्ट बनाया है। तो ये जो आज प्रोग्राम हो रहा है, इसमें मैं समझता हूं कि मुख्यमंत्री रिलीफ फंड में जो कुछ पैसा आएगा, तो हम लोग चाहेंगे कि कभी कई बार गैप फंडिंग करनी पड़ती है, जो टेक्नीकली आप दे नहीं सकते मान लीजिए, इंश्योरेंस कंपनी में जो आपका एग्रीमेंट है, उसमें सम्मिलित नहीं है, ऐसे वक्त में काम आ जाता है। तो मैं चाहूंगा कि चीफ सेक्रेटरी साहब यहां बैठी हुई हैं, अलग से इसका सीएम रिलीफ फंड में एक फंड बन जाए, निरोगी राजस्थान के नाम से बन जाए, जिससे कि किसी को जरूरत पड़े, तो चिरंजीवी के अलावा भी आप उसमें इम्दाद कर सको, इस प्रकार की सोच है। यही बात कहता हुआ मैं आप सबका स्वागत करता हूं और आप सबका धन्यवाद भी है कि आप लोग सब पधारे और मुझे खुशी है कि ये प्रोग्राम बहुत ही शानदार तरीके से, गरिमामय तरीके से संपन्न होने जा रहा है यही बात कहता हुआ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं, धन्यवाद, जय हिंद, धन्यवाद।

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