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मुख्यमंत्री निवास पर जोगिन्दर सिंह अवाना जी के डेलिगेशन में सम्बोधन (9 मार्च)

दिनांक
09/03/2022
स्थान
जयपुर


हमारे प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविंद डोटासरा जी, हमारे साथी मंत्री राजेंद्र गुढ़ा जी, जोगेंद्र अवाना जी, हिमांशु अवाना प्रधान और तमाम उपस्थित बुजुर्गों, भाइयों और बहनों, नौजवान साथियों मुझे बहुत खुशी है कि देवनारायण भगवान के नाम से जो बोर्ड बना उसके अध्यक्ष अवाना साहब बनाए गए। सोनिया गांधी जी ने और राहुल गांधी जी ने बहुत सोच-समझकर सबसे बात करके बनाया है, तो आप समझ सकते हैं कि कांग्रेस हमेशा छत्तीसों कौम को साथ लेकर चलती है, बहुत जोरदार नारा बोला आपने और मैं माफी चाहता हूं आपसे, आज आपको तकलीफ भी हुई है, तब भी नारा लगा रहे हैं ये तो क्योंकि देखिए आज इतने लोग आए हैं सुबह से ही, डेलिगेशन के ऊपर डेलिगेशन आते गए, तो आपको आने में देरी हुई, मेरी इच्छा थी कि मैं पदभार ग्रहण में आऊं, लेकिन आज सुबह से ही प्रोग्राम चले हुए थे, पर आप अभी तक रुके हुए हो, मेरे पास शब्द नहीं हैं कि किन शब्दों में आपका धन्यवाद करूं। इसका मतलब है कि आपके दिल-दिमाग के अंदर कांग्रेस के प्रति, हम सबके प्रति जो भावना है, जो मान-सम्मान है, इस कारण से आपने रुकना मंजूर किया और मिलकर जाने के लिए संकल्प किया, ये आपका बहुत बड़प्पन है, मैं बहुत धन्यवाद देता हूं आपको। गोविन्द सिंह गुर्जर साहब थे मंत्री तबसे हमारा बहुत संपर्क रहा है, वो एक गांधीवाद की तरह थे वो भी, वो इस प्रकार की भावना रखते थे कांग्रेस के लिए समर्पित थे, प्रतिबद्ध थे, इंदिरा जी के वक्त से ही वो मान-सम्मान था समाज के अंदर, पहले रामचंद्र विट्ठल जी थे दिल्ली के अंदर, इंदिरा गांधी जी, नेहरू जी के वक्त से थे, मैं भी एमपी बन गया तो मेरे प्रति आशीर्वाद था उनका। फिर राजेश पायलट जी आ गए, युवा नेता थे, तो ये सिलसिला चलता रहता है, पर कांग्रेस हमेशा ध्यान रखती है कि सबको हमेशा साथ लेकर चलें और यही तरीका रहा बाद में भी। बाद में भी जब मैं दूसरी बार आपके आशीर्वाद से बना मुख्यमंत्री 2009 के अंदर, तब जो है उस वक्त में पिछली सरकार थी उस वक्त में अभी जो जिक्र कर रहे थे अध्यक्ष जी और हमारे अवाना साहब कि वो घटना कोई मामूली घटना नहीं थी, 70 गुर्जर मरना किसे कहते हैं, 70-72 गुर्जर मारे गए, फायरिंग से गुर्जर मारे गए, 21 बार फायरिंग हुई उस जमाने के अंदर, घड़साना-रावला से लगाकर अपने सोयला अपना टोंक से लगाकर कई जगह हुए, आपको मालूम है। तो उस जमाने के अंदर भी ऐसा माहौल बन गया था कि गुर्जर और मीणाओं के बीच में आपस में दुश्मनी हो गई, माहौल बन गया था और मुझे आपने बना दिया वापस मुख्यमंत्री दूसरी बार, तो मेरी ड्यूटी थी कि मैं गुर्जर और मीणा समाज में दुश्मनी खत्म करा दूं। रामस्वरूप कसाना थे एक विधायक कोटपूतली वाले, उनको मैंने ये काम सौंपा, वो इन्डिपेंडेंट थे पर मेरा साथ दे रहे थे, कहा कि तुम मेरा ये काम करो, बाकी मीणा गुर्जर समाज के लोगों से बातचीत करो, सब मिलकर नजदीक लाओ दोनों को, दुश्मनी नहीं रहनी चाहिए। आपस में खिलाफत तो होती है थोड़ी बहुत, परन्तु दुश्मनी बहुत मुश्किल होती है, काम की नहीं होती है, तो मैंने कहा कि ये खत्म करो। उसी जमाने में दिल्ली मुझे बुलाया गया, पार्लियामेंट के चुनाव आ गए थे और 20 सीटें हम जीत गए थे पार्लियामेंट की, 20 सीटें जीतना बहुत बड़ी बात थी 25 में से, 20 सीटें तो दिल्ली मुझे बुलाकर कहा कि आप ही बताओ कि क्या करना चाहिए? आपमें से मंत्री कौन बने? तो मैंने कहा कि एक तो नमोनाराणय मीणा जी बनेंगे क्योंकि वो पहले मंत्री थे यूपीए फर्स्ट के अंदर, वापस बनेंगे, एक मीणा बन जाएंगे, तो एक गुर्जर बनना बहुत आवश्यक है, ये भावना थी कि गुर्जरों को लगेगा कि हमारा आदमी मंत्री बन गया है। तो मैंने सचिन पायलट का नाम दिया वहां पर, मीणा और गुर्जर दो हो जाएंगे, एक ब्राह्मण सीपी जोशी जी हमारे अध्यक्ष थे, वो पार्लियामेंट मेंबर बन गए भीलवाड़ा से, एक वो हो जाएंगे, एक जाट हो जाएंगे महादेवसिंह जी बने उस वक्त में, ओला साहब का भी नाम था। तो कहने का मतलब है कि 4 लोगों को मैंने रिकमंड किया, सचिन पायलट का मेरे पास फोन आया कि आप मेरी मदद करो मंत्री बनाने के लिए, तो मैंने कहा कि तुम तो आज मुझे कह रहे हो, मैं कल कहकर भी आ गया हूं। अब मैं बाद में आकर कहूं वहां पर सचिन पायलट के सामने कि मैं तुम्हारा नाम देकर आया हूं, वो मेरी स्थिति नहीं थी, तब तक मैं केंद्रीय मंत्री तीन बार रहा मैं, तीन बार प्रदेशाध्यक्ष रहा मैं, दूसरी बार मुख्यमंत्री बन गया, अब मैं ये कहता फिरूं कि मैं तेरी मदद कर रहा हूं, तो क्या फायदा? उसका फोन आया तो मैंने उसको कहा कि चिंता मत करो, मैंने अपनी बात कह दी, मुझे उम्मीद है कि सब ठीक होगा और ठीक हो गया, वो मंत्री बने। तो कहने का मतलब है कि मैंने कोशिश की छत्तीसों कौम का ध्यान रखो, सबको साथ लेकर चलो और मेरा फर्ज बनता है, मेरा धर्म बनता है, कांग्रेस प्रेसिडेंट ने मुझे बहुत दिया देखो, मैं तीन बार मुख्यमंत्री, तीन बार कैबिनेट मंत्री इंदिरा गांधी जी के साथ में, राजीव गांधी जी के साथ में, नरसिम्हा राव जी के साथ में, तीन बार मैं एआईसीसी का महामंत्री रहा हूं सोनिया गांधी के साथ में और राहुल गांधी के साथ में और तीन बार मैं प्रदेशाध्यक्ष रहा हूं और अब तीन बार मुख्यमंत्री बन गया, मुझे क्या चाहिए? मैं संतुष्ट नहीं अतिसंतुष्ट राजनीति में हूं, अतिसंतुष्ट राजनीतिज्ञ हूं। अब जो राजनीतिक बातें चल रही हैं आपको मालूम है, बिना मतलब का नाइत्तेफाकी हो जाती है कई बार, कई बार ऐसे लोग होते हैं जो भिड़ा देते हैं एक-दूसरे को, लड़ा देते हैं, उनका न तो गुर्जर समाज में इंटरेस्ट होता है, न कांग्रेस में इंटरेस्ट होता है। वो सिर्फ खुद में इंटरेस्ट होता है, वो भिड़ाते हैं दोनों नेताओं को, उल्टी-सीधी बात कहते हैं, दूरियां पैदा करते हैं। हमने जिंदगी में हमेशा ये कोशिश की है कि सबको साथ लेकर मिलाकर चलो, वो ही कारण है कि मुझे बार-बार चांस मिल रहा है, जोड़ेगा उन्हीं को चांस मिलेगा, तोड़ेगा उसको कोई चांस नहीं मिलेगा। मुझे खुशी है कि आज गुर्जर समाज के लोग यहां पर इतनी बड़ी तादाद में आए हैं, आप लोगों ने मिलने का, मिलने का मन में भाव आ जाता है तो मिलता है आदमी। तो आप जिस भाव से आए उसके लिए मैं आपका बहुत ही धन्यवाद देता हूं, आभारी हूं और आप निश्चिंत रहो, कर्नल साहब जानते हैं कि जब 70 गुर्जर मरने के बाद मैं मुख्यमंत्री बन गया, 5 साल तक कर्नल साहब को मैं जानता नहीं था पहले, मेरे यहां वो आते रहे लगातार, हम राज्यपाल महोदय से मिलते रहे, पहले एक पर्सेंट, फिर दो पर्सेंट, फिर पांच पर्सेंट मिला आरक्षण, आज सैकड़ों गुर्जर नौकरियों में आ रहे हैं, कोई कम बात नहीं है। पांच पर्सेंट आरक्षण मिलना बहुत बड़ी बात है, ऐतिहासिक बात है, महाराष्ट्र में मिला उसे सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया, यहां भी मामला खत्म हो रहा था राजस्थान के अंदर, हम लोग फिर भी लड़ाई लड़ रहे हैं हाईकोर्ट के अंदर भी, अभी केस चल रहा है वहां पर, हमने कोई कमी नहीं रखी है। इसलिए आप निश्चिंत रहो, गुर्जर समाज भी पिछड़ा समाज है, तो जितने भी लोग हैं, हम लोग सब मिलकर राजस्थान को कैसे आगे ले जाएं, किस प्रकार समस्या का समाधान हो और देवनारायण भगवान के नाम पर बोर्ड बना है उसमें कई स्कूलें खुली हैं, कई हॉस्टल बन रहे हैं, जगह-जगह पर सामुदायिक केंद्र बने हैं, जो मांगा मुझसे मैंने दिया है कर्नल साहब को उस जमाने के अंदर और वो अब बीमार है, थोड़ा मिलना-जुलना कम होता है, मेरी टेलीफोन पर बात हुई अभी 15-20 दिन पहले ही। आपका बहुत बहुत धन्यवाद और आप निश्चिंत रहे कोई भी मेरे लायक सेवा हो कभी भी, अवाना साहब हैं, आप कह सकते हो, वो हमेशा आपके लिए हाजिर रहेंगे, यही बात कह कर मैं आपको धन्यवाद देता हूं।

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