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माननीय कांग्रेस उपाध्यक्ष श्री राहुल गांधी जी का भाषण

दिनांक
28/11/2013
स्थान
बांसवाड़ा


गुरूदास कामत जी, अशोक गहलोत जी, सी.पी. जोशी जी, तारा चन्द जी भगोरा जी, गिरिजा व्यास जी, मिर्जाबेग जी, कांग्रेस पार्टी के हमारे सब कार्यकर्ता, भाइयो-बहनो, आप सब का यहां बहुत-बहुत स्वागत, नमस्कार। आपके सामने अब चुनाव है और यहां सिर्फ दो पार्टियों की लड़ाई नहीं है, सोच की लड़ाई है और सोच की लड़ाई के बारे में मैं आपको बताना चाहता हूं। विकास होना है उस बात को सब लोग मानते हैं, हम मानते हैं, विपक्ष मानता है। यह अलग बात है कि हम उनसे ज्यादा काम करते हैं, मगर जहां सड़क की बात होती है, बिजली की बात होती है, पानी की बात होती है, हम भी कहते हैं कि बिजली होनी चाहिए, सड़क होनी चाहिए, रेल्वे लाइन होनी चाहिए, एयरपोर्ट होना चाहिए। उनका कहना है सड़के वे ज्यादा बनाते हैं, रेल्वे का काम वह ज्यादा करते हैं, बिजली का काम वह ज्यादा करते हैं तो मैंने मंत्रिमण्डल से पूछा कि एनडीए के लोग कहते हैं कि उनके समय सड़के ज्यादा बनी, आप जरा मुझे आंकड़ा दे, आप सरकार चलाते हो, आपके पास आंकड़ा होगा कि कितनी सड़कें उन्होंने बनाई और कितनी सड़कें हमने बनाई मुझे दिखाओ। जितनी सड़कें उन्होंने पांच साल में बनाई उससे तीन गुणा ज्यादा सड़कें बनाई हमने पांच साल में। अब कहते हैं भैया बिजली का काम अच्छा करते हैं, उनकी नेता कहती है भैया बिजली वह दिलवायेगी। जब उनकी सरकार थी, पांच साल में उन्होंने 1200 मेगावाट बिजली पैदा की और पिछले पांच साल में गहलोत जी ने तकरीबन 7000 मेगावाट बिजली तैयार की। मतलब उनसे दुगुना नहीं, तिगुना नहीं, वह कहते हैं बिजली का काम हम करते हैं, सड़क का काम हम करते हैं। वह सिर्फ एक काम हम से बेहतर करते हैं और इस बात को मैं यहां स्टेज से मानने को तैयार हूं। वह भ्रष्टाचार का काम सबसे बेहतर करते हैं और उस बात में आप छत्तीसगढ़ को देख लीजिए, मध्यप्रदेश को देख लीजिए, बाकी जो स्टेट हैं उनके, उनको देख लीजिए। भैया भ्रष्टाचार में वह मास्टर है। वह सबसे तेज है, वह सबसे आगे है। वहां हम हार मान लेते हैं। मगर सड़क की बात हो, बिजली की बात हो, पानी की बात हो, वहां हम आगे हैं। मगर हम वहां रूकते नहीं हैं। जरूर हम कहते हैं कि सड़कें होनी चाहिए। रेल्वे लाइन आनी है। हम यहां पर रेल्वे लाइन लाये, आप सबको मालूम है। आप सबको फायदा होने वाला है, मगर हम वहां रूकते नहीं, हम उससे भी आगे जाते हैं। हमारा कहना यह है कि जो हमारे आदिवासी भाई-बहनें हैं, दलित भाई-बहनें हैं, जो गरीब लोग हैं, उनका सिर्फ सड़क से, रेल्वे लाइन से, एयरपोर्ट से फायदा होने वाला नहीं है। उनको और मदद की जरूरत है, क्योंकि उनके सामने, आदिवासियों के सामने, दलितों के सामने, गरीबों के सामने, एक दीवार खड़ी है, गरीबी की दीवार। और वह दीवार रेल्वे की पटरी से, रोड़ से नहीं टूटेगी। इस दीवार को तोड़ने के लिए और मदद की जरूरत होती है और इसीलिए हम रोजगार योजना जैसे प्रोग्राम लाते हैं। हम इसीलिए भोजन के अधिकार की बात करते हैं, इसीलिए हम शिक्षा के अधिकार की बात करते हैं। क्योंकि हम जानते हैं कि जब तक इस दीवार को हमने नहीं तोड़ा तब तक आप सचमुच में आगे नहीं बढ़ सकते।

रोजगार योजना, 100 दिन का रोजगार, हिन्दुस्तान के हर गरीब व्यक्ति को गारंटी करके हमने दिलाया। चाहे वह राजस्थान में हो, मध्यप्रदेश में हो, जहां भी हो अगर वह हिन्दुस्तान में है अगर वह गरीब है, किसी भी जाति का हो, किसी भी धर्म का हो, अगर उसको रोजगार की जरूरत है तो कांग्रेस पार्टी ने उसको गारंटी करके रोजगार दिया है 100 दिन का। अब जब हमने यह काम किया तो विपक्ष के लोगों के क्या कहा, भाई पैसा जाया हो रहा है।

देखिए, जब आपकी जमीन ली जाती है, जब कोई आपकी जमीन छीनता है तो यह नहीं कहते कि गरीबों से जमीन छीनी जा रही है। तब यह कहते हैं भैया जमीन लेनी है। गरीबों का मामला होता है तो चुप हो जाते हैं, इनके यहां भाषण सुनिये। बड़ी-बड़ी बातें करेंगे, मगर जो गरीब है, उसका हाथ जो पकड़ना है, उसके बारे में एक शब्द भी इनके मुंह से नहीं निकलेगा।

हम भोजन के अधिकार की बात कर रहे हैं। हमने कहा कि देखो आदिवासी भाई है, दलित भाई है, गरीब लोग हैं, कई ऎसे परिवार हैं हिन्दुस्तान में जिनको भोजन नहीं मिलता। हमारी ऎसी मां-बहनें हैं जो रात को सो जाती हैं उनको अपने बच्चे भूखे दिखाई देते हैं और इनके दर्द होता है दिल में। हम सबके दिल में दर्द होता है। हमने कहा कि देखिए, सड़कों की जगह है, रेल्वे लाइन की जगह है, बिजली की जगह है, पानी की जगह है, मगर भूख की हिन्दुस्तान में कोई जगह नहीं है और इसको हम खत्म करेंगे। तो क्या किया, 3 रूपये किलो चावल, 2 रूपये किलो गेहूं और 1 रूपये में अनाज, और यह नहीं कि हम किसी जाति को देंगे, धर्म को देंगे, किसी को नहीं देंगे। अगर गरीब है तो उसको भोजन मिलेगा।

गहलोत जी ने तो उससे भी ज्यादा कर दिया। उन्होंने कहा एक रूपया, दो रूपया, तीन रूपया छोड़ो, गहलोत जी ने कहा राजस्थान में मुफ्त में दिया जायेगा और सिर्फ भोजन की बात नहीं की। जो हमारी बहनें हैं उनको यह बात अच्छी तरह समझ में आयेगी। जब गरीब व्यक्ति बीमार होता है उसको भी दवाई खानी पड़ती है। इस दुनिया में अमीर को भी दवाई खानी पड़ती है, गरीब को भी खानी पड़ती है। गहलोत जी ने कहा कि राजस्थान में अगर कोई गरीब बीमार है तो उसको सरकार मुफ्त में दवाई देने वाली है और विपक्ष के लोगों ने क्या कहा ? जिसमें मार्केटिंग हो वह दवाई ठीक है, महंगी दवाई ठीक है। मगर वो दवाई जिसके अन्दर वही चीज है जो महंगी दवाई में है, वह जहर है। वह इस बात को नहीं देखती है कि जो हमारी गरीब जनता है उसको इस दवाई की जरूरत है। वह कहती है भैया यह दवाई जहर है। क्योंकि सोच में फर्क है। हमारी सोच है कि गरीब को खड़ा करना है, मदद करनी है। उसके सामने जो दीवार है उसको तोड़ना है।

अब मैं आपको ट्राइबल बिल के बारे में बताना चाहता हूं, हम ट्राइबल बिल लाये, आपकी जमीन की बात की, आपके पट्टों की बात की, आपके हक की बात की और लाखों लोगों को जमीन वापस दिलवाई। अब आप छत्तीसगढ़ जाइये, वहां चुनाव हो रहा है और वहां किसी भी आदिवासी से पूछ लीजिए, मध्य प्रदेश जाइये, वहां किसी भी आदिवासी से पूछ लीजिए कि भैया जो जमीन हमें राजस्थान में ट्राइबल बिल के माध्यम से मिली, क्या आपको मिली? सब आपके ध्यान में है कि छत्तीसगढ़ में, मध्यप्रदेश में ऎसी बात नहीं हुई। छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार जरूर होता है, मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार जरूर होता है। मगर जो आदिवासियों की जमीन है वह उनको नहीं मिलती है।

हम चाहते हैं कि आपके बच्चे शिक्षित हों, हम चाहते हैं कि आपके बच्चे यूनिवर्सिटी, कॉलेज में जायें और हम यह बात कहते हैं कि भैया, अगर बेचारे बच्चे के पेट में भोजन नहीं है तो वह पढ़ाई कैसे करेगा, वह यूनिवर्सिटी तक कैसे पहुंचेगा? हम आपकी मदद करना चाहते हैं, हम आपको एक साथ ले जाना चाहते हैं। एक बात मैं आपको बहुत स्पष्ट कहना चाहता हूं कि हमारी राजनीति कमजोर लोगों की राजनीति है, गरीब लोगों की राजनीति है, आदिवासियों, दलितों एवं अल्पसंख्यकों की राजनीति है। हमारा यह कहना है कि हम जितनी मदद आम आदमी को कर सकते हैं, गरीब व्यक्ति को कर सकते हैं, हम करेंगे। सड़क बनाने की जगह है, बिजली की जगह है, एयरपोर्ट की जगह है, हवाई जहाजों की जगह है। मगर हम ऎसा हिन्दुस्तान नहीं चाहते हैं जहां चुने हुए लोग हवाई जहाजों में बैठे। चुने हुए लोग बड़ी-बड़ी चमकती गाड़ियों में चले और आदिवासी दलित उन हवाई जहाजों को देखे और उन चमकती हुई गाड़ियों को देखे और अपने आप से पूछे कि मेरा बेटा, मेरी बेटी इन जहाजों में कब जायेंगे? मेरा बेटा, मेरी बेटी इन बड़ी-बड़ी गाड़ियों में कब जायेंगे? हम चाहते हैं कि ऎसा दिन आये जब बड़े से बड़े कॉलेजों को, उद्योगों को आपके बच्चे चलायें, आदिवासियों के बच्चे चलायें। इसलिए हम आपकी लड़ाई लड़ते हैं, इसलिए हम भोजन के अधिकार की बात करते हैं, इसलिए हम रोजगार के अधिकार की बात करते हैं, इसलिए हम सूचना के अधिकार की बात करते हैं, क्योंकि हम आपको शक्ति देना चाहते हैं।

अंत में मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूं जो सबसे जरूरी बात है। यहां जो युवा हैं, आपको रोजगार की जरूरत है, रोजगार मिलेगा। मगर मैं आपको एक बात कहना चाहता हूं कि आप लोगों की राजनीति में जरूरत है। मैं चाहता हूं आने वाले समय में एमएलए, एमपी, चीफ मिनिस्टर, प्रधानमंत्री आदिवासियों में से बनकर निकले। क्योंकि आप में ज्ञान है, शक्ति है, सिर्फ आपके सामने एक दीवार खड़ी है और उस दीवार को हम एक साथ तोड़ेंगे। कांग्रेस पार्टी और आप लोग एक साथ तोड़ेंगे और गरीबों की सरकार चलायेंगे।

राजस्थान में दो-तीन दिन में चुनाव है और मैं आप सबको कहना चाहता हूं गहलोत जी ने सच्चाई से, दिल लगाकर काम किया है। पिछले पांच सालों में कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान में आम आदमी की सरकार चलाई है, आपकी सरकार चलाई है, गरीबों की सरकार चलाई है। दवाई का काम किया है, बिजली का काम किया है, पानी का काम किया है, बाड़मेर में रिफाइनरी का काम किया है। दो लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। अब अगले पांच साल आप कांग्रेस पार्टी को दीजिए, हाथ के निशान को दीजिए, हाथ के निशान पर बटन दबाइयें और यहां आम आदमी की सरकार, कमजोर लोगों की सरकार को एक बार फिर लाइये। चुने हुए लोगों की सरकार मत लाइये, आपका नुकसान होने वाला है। कांग्रेस पार्टी को लाइये, जिताइये और देखिए हम यहां क्या काम करते हैं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।
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