Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर वार्ता की

दिनांक
21/07/2026
स्थान
जयपुर


श्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर मोदी सरकार की चुप्पी ने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि लोकसभा और राज्यसभा के नेता प्रतिपक्ष को प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देने को मजबूर होना पड़ा है।

मीडिया से 49 सिविल लाइंस पर वार्ता की :

मैं बहुत लंबे अरसे से कह रहा हूँ कि यह देश किस दिशा में जा रहा है, कोई नहीं जानता किस दिशा में जाएगा, किसी को नहीं मालूम।

यह जो 1 महीने के तमाशे हैं,सरकार ने इस समस्या को जिस रूप में लेना चाहिए था,लाखों बच्चों के भविष्य का सवाल है। NEET पेपर आउट हो गया। जो रिस्पॉन्स देना चाहिए था सरकार को,उसमें पूरी तरह फेल हो गई। आंदोलन शुरू हो गए।
भूख हड़ताल पर लोग बैठ गए 15-20-20 दिन तक।

और सरकार का कोई नुमाइंदा, चाहे सरकारी हो, चाहे वह मंत्री हो, कोई जा के मिले ही नहीं उनसे, बात भी नहीं करे कि आप चाहते क्या हो।

राहुल गांधी लगातार जब से घटना हुई, तब से इस्तीफा मांग रहे हैं धर्मेंद्र प्रधान जी से।

कोई जवाब नहीं, सरकार का एक्शन भी नहीं तो यह जो हालात बने हैं आज, वह बहुत दुखद है और बहुत ही अनफॉर्चुनेट है कि नेता प्रतिपक्ष को चाहे वह लोकसभा के हैं, चाहे राज्यसभा के हैं,राहुल जी को, खड़गे साहब को, अनेकों सांसद भी हैं, प्रियंका गांधी जी भी हैं,उनको बैठना पड़े पीएम हाउस के सामने, इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा?

आप सोच सकते हैं कि देश-दुनिया में क्या मैसेज जा रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी जी क्लेम करते हैं कि दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मुल्क हमारा है। क्या-क्या क्लेम नहीं करते हैं! सब जो दावे करते हैं जाके विदेशों में घूम-घूम के,उन सब की पोल खुल चुकी है इस देश के अंदर, जिस प्रकार का व्यवहार सरकार कर रही है और हालात बहुत गंभीर हैं।

जो आक्रोश फूट पड़ा है पब्लिक के अंदर,नौजवानों के अंदर, छात्रों के अंदर, वह सरकार जो सोच रही है, असेसमेंट कर रही है, उससे कई गुना अधिक है। इसको समझना पड़ेगा सरकार को।

अगर सरकार का कोई लोकतंत्र में विश्वास बचा है थोड़ा बहुत भी, तो समझना पड़ेगा कि आक्रोश बहुत भयंकर है। यह जो कल दिल्ली में हजारों बच्चे इकट्ठे हो गए पूरे देश भर के,जिस प्रकार लाठीचार्ज हुआ, बेरहमी से पीटा गया लड़कियों को भी, लड़कों को भी,बच्चे छोटे बच्चे भी, छोटे उम्र के भी थे।पर जिस प्रकार पुलिस ने नादिरशाही तरीका अपना करके, जो कुछ भी पिटाई का जो तरीका अपनाया अगर आप दृश्य देखेंगे, तो आप समझ जाएंगे कि उनकी मंशा किस प्रकार की रही होगी या क्या उनका आदेश मिले होंगे सबक सिखाने के,यह समझ के परे है। आंसू गैस के गोले छोड़ दिए,पिटाई कर दी।
तो कई पूरे आंदोलन में कई तरह के रहस्य भी हैं। कल मैं देख रहा था कि यह जो बैरीकेड्स लगे हुए हैं, उनको पुलिस खुद ही हटा रही है।

जो सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे,उनको हटाया जा रहा है। यह एक नया तरीका निकाला पुलिस ने। हटाने का कारण क्या है? जब आंदोलन चल रहा है, बैरीकेडिंग तो और स्ट्रांग करते, स्ट्रेंथन करते।

हटाए क्यों गए? स्पेस बनाने के लिए बैरीकेडिंग हटाए जा रहे हैं।

इतिहास में मैंने पहली बार देखा इस प्रकार का कोई जवाब मिलेगा। यह अभी तक रहस्य बना हुआ है। कोई डिस्कशन में आ रहा है यह पॉइंट।पर समझ के परे है कि यह किस प्रकार से स्पेस बनाने के लिए हटाए गए।

जो प्रोटेस्ट करने वाले लोग हैं, जितने प्रदर्शनकारी, उनका मानना है कि यह जानबूझकर हटाए गए। जिस प्रकार का तरीका अपनाया गया लाठीचार्ज का बदनाम करने के लिए आंदोलन को या जो मार्च निकाला उसको, कि क्योंकि पार्लियामेंट तक पहुँच गए थे, इसलिए हमने लाठीचार्ज कर दिया, आंसू गैस के गोले छोड़ दिए।

यह जस्टिफाई करने के लिए तरीका हो सकता है। यह जो लोग फीडबैक दे रहे हैं, उसमें यही फीडबैक आ रहा है।

अगर इस प्रकार के हथकंडे अपनाए जाएंगे, तो आप सोच सकते हो क्या होगा डेमोक्रेसी का?

वैसे आक्रोश जो है,वह जो फूट के सामने आया है,जो छात्र-छात्राएं और युवा लोग जो कमेंट दे रहे हैं मीडिया के सामने, अनेकों कमेंट्स एक से मिलेंगे आपको, कि किस प्रकार के हालात देश में, लोकतंत्र नाम की चीज़ नहीं रही है,सुनवाई नहीं हो रही है, किनके पास जाके क्या शिकायत करें,कोई क्षेत्र में सुनवाई नहीं हो रही है। शिकायत भी नहीं हो पा रही,शिकायत किससे करें?

यह जो हालात बने हैं पूरे कंट्री के अंदर, वह आक्रोश था, इसीलिए पूरे मुल्क के राज्यों से, दूर-दूर से कई जगह तो मां-बाप के इच्छा के विरुद्ध भी बच्चे आए और भाग लिया उन्होंने आंदोलन के अंदर।

तो आज राहुल जी और खड़गे साहब और सब लोग बैठे हैं,अब जा के मंत्री बुला रहे हैं आंदोलनकारियों को, कभी जा के मिल रहे हैं,आज अचानक भेज दिया गया मंत्री जी को मिलने के लिए राहुल जी से।
यह नौबत क्यों आई? यह तो सरकार को सोचना पड़ेगा।

मेरा मानना है कि यह गुस्सा जो है, यह तो बहुत बड़ा इशू है छात्रों का, एग्जाम का, पेपर लीक का। पर बाकी जो बेरोजगारी देश में फैली है,महंगाई की स्थिति अलग है,
और जिस प्रकार से एजेंसियों पे कब्जा हो गया है, जुडिशरी दबाव के अंदर है, इलेक्शन कमीशन का पता नहीं वह क्या करेगा आने वाले वक्त के अंदर,
निष्पक्ष चुनाव कभी हो पाएंगे या नहीं हो पाएंगे।

अभी से वोट चोरी होने लग गए हैं। SIR के नाम से लाखों वंचित हो रहे हैं वोट देने से।उनको कहा जा रहा है कि कोई बात नहीं, अगली बार वोट दे देना आप तो।

यह जो नौबत आ रही है देश में, यह बहुत डरावनी है।

और जिस प्रकार की खबरें आ रही हैं,मैं अपील करूँगा मेनस्ट्रीम मीडिया से कि वह सरकार के दबाव से निकले।कृपया करके हिम्मत दिखाएं, साहस दिखाएं।

इतिहास उनको माफ नहीं करेगा अगर यही तरीका रहा कि 20 दिन की भूख हड़ताल को आप नहीं दिखाओ।

तो आप सोच सकते हो कि मुख्य भूमिका मीडिया की होती है और मीडिया से ही जो सामाजिक सरोकार पूरा होता है।मीडिया से ही मालूम पड़ेगा कि जनता क्या चाहती है, क्या समस्या है, उनके जड़ में क्या है।

पर मीडिया जिस प्रकार का बिहेव कर रहा है, जो मेनस्ट्रीम मीडिया है, वह मैं समझता हूँ, लोगों में उसको ले के भी आक्रोश है।कल छात्रों ने पूछ लिया, युवाओं ने पूछ लिया,"आप लोग क्यों आ रहे हो? आप तो हमारे खिलाफ हो, आप तो गोदी मीडिया कहलाते हो।"यह नौबत नहीं आनी चाहिए।

राहुल जी और खड़गे साहब ने जो एक मैसेज दिया है देश को,मैं समझता हूँ कि उस मैसेज से घर-घर में, जो-जो भी लोग महसूस करते हैं, जो आक्रोश सामने आ रहा है,

अभी भी अगर सरकार नहीं समझेगी, मैं समझता हूँ यह देश हित में नहीं होगा।

धन्यवाद!

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