Shri Ashok Gehlot
Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura
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प्रेस वार्ता
सर्किट हाउस, जोधपुर में मीडिया से बातचीत की:
दिनांक
01/08/2026
स्थान
जोधपुर
मुझे इस बात की बेहद चिंता है कि आधा मानसून बीत जाने के बाद भी प्रदेश के कई जिलों में बारिश नहीं हो रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगभग 18 जिलों में अकाल जैसी स्थिति बन रही है। इस पर सरकार को तुरंत ध्यान देना चाहिए। समय रहते मनुष्यों और मवेशियों के लिए पीने के पानी, गायों के लिए चारे और आम जनता के लिए रोजगार का प्रबंधन कैसे होगा—यह बेहद महत्वपूर्ण विषय है। सरकार को इसे प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन को चाक-चौबंद करना चाहिए और राज्य स्तर पर समय पर वित्तीय स्वीकृतियां जारी करनी चाहिए, वरना आगे चलकर स्थितियां बिगड़ सकती हैं।
मैं यह बात अपने अनुभव से कह रहा हूँ। मैंने अपने कार्यकाल में लगातार चार अकालों का सामना किया है। उस समय हमारा सूखा प्रबंधन इतना बेहतरीन था कि पूरे देश में उसकी तारीफ हुई थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमारी बहुत मदद की थी। 'काम के बदले अनाज' योजना इतने शानदार ढंग से चलाई गई कि प्रदेश का कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं सोया। हमने यह सुनिश्चित किया था कि सरकारी कर्मचारी गांव-गांव जाकर हर घर तक पहुंचें ताकि संकोच के कारण कोई भूखा न रह जाए। उस समय भाजपा के नेताओं ने मुझ पर ताना कसा था कि 'गहलोत दिल्ली जाकर भीख मांग रहे हैं', तब मैंने स्पष्ट कहा था कि प्रदेश की जनता को भूखा सोने से बचाने के लिए अगर मुझे भीख भी मांगनी पड़े, तो मुझे इसमें कोई शर्म नहीं आएगी। मैं आज की सरकार को भी समय रहते आगाह कर रहा हूँ।
दूसरी बात यह है कि राजस्थान में परिस्थितियां लगातार बिगड़ रही हैं। जब से यह सरकार आई है, तमाम विभागों में भुगतान रुके हुए हैं और पेंशन समय पर नहीं मिल रही है। 31 मार्च तक जो स्वीकृतियां निकल चुकी थीं, उनके बिलों को दोबारा प्रक्रिया में डालकर केवल भुगतान में देरी की जा रही है। इससे लोग बेहद परेशान हैं। एसीएस फाइनेंस के कमरे के बाहर सबसे ज्यादा भीड़ रिटायर्ड कर्मचारियों की रहती है, जो अपने हक का पैसा (जीपीएफ व रिटायरमेंट बेनिफिट्स) पाने के लिए चक्कर काट रहे हैं। सरकार उनका खुद का जमा किया हुआ पैसा भी नहीं चुका पा रही है।
क्या मुख्यमंत्री जी को इन हालातों की जानकारी नहीं है? क्या वे मॉनिटरिंग नहीं कर पा रहे हैं? समझ नहीं आ रहा कि चल क्या रहा है। विपक्ष के रूप में हमारे नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जी विधानसभा में इन मुद्दों को मजबूती से उठा रहे हैं। सरकार बनते ही हम लगातार सुझाव दे रहे हैं कि हमारी बातों को आलोचना न मानकर सुशासन के लिए 'फीडबैक' समझा जाए, लेकिन सरकार ध्यान ही नहीं दे रही।
अब तो भ्रष्टाचार की सारी हदें पार हो चुकी हैं। जो लोग 'चाल, चरित्र और चेहरा' की बातें करते थे, आज उनके ही लोग और आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोग हर स्तर पर भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। कानून-व्यवस्था पूरी तरह हाथ से निकल चुकी है। दुष्कर्म, डकैती और व्यापारियों/ज्वेलर्स पर गोलीबारी जैसी घटनाएं अब आम हो गई हैं। चारों तरफ हाहाकार की स्थिति है।
इसके अलावा, जो प्रोजेक्ट्स बनकर तैयार हो चुके हैं, उनका उद्घाटन तक नहीं किया जा रहा है। नागौर-मंडोर रोड पर बना 650 करोड़ का फिनटेक इंस्टीट्यूट हो, या 80-90 करोड़ की लागत से बना स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट—सब ठप पड़े हैं। स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट को पूरा करने के लिए सिर्फ 2 करोड़ रुपये और चाहिए, और संस्थान सरकार से बजट भी नहीं मांग रहा, केवल खर्च करने की अनुमति मांग रहा है। वहां हॉस्टल तैयार है, लेकिन ताला लगा होने के कारण बच्चे बाहर किराया देकर रहने को मजबूर हैं। ना खिलाड़ी हैं, ना कोच और ना ही उपकरण। मैंने स्वयं मुख्यमंत्री जी से कहा था कि आप जोधपुर आकर इसका उद्घाटन कीजिए, हम आपका स्वागत करेंगे और कोई विरोध नहीं करेंगे, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ।
स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं का बुरा हाल है। हमारी सरकार के समय की योजनाओं को लोग आज याद कर रहे हैं, क्योंकि अब दवाइयों, जांचों और ऑपरेशनों का खर्च फिर से बढ़ गया है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन समय पर न मिलने से गरीब और बुजुर्ग बेहाल हैं। कुल मिलाकर स्थिति पूरी तरह से बिगड़ चुकी है।
सवाल: सर, बारह-तेरह साल बाद एक बड़ा आंदोलन देखने को मिला है। पहले अन्ना हजारे का आंदोलन था और अब जेन-ज़ी (Gen-Z) का। मोदी जी ने जेन-ज़ी को माफ करने का वीडियो भी रात में पोस्ट किया है। इस पर आप क्या कहेंगे?
जवाब: देखिए, राहुल गांधी जी ने सबसे पहले प्रधान जी के इस्तीफे की मांग का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद यह विषय लगातार गति पकड़ता गया। राहुल गांधी जी ने कोटा और देहरादून में छात्रों के साथ 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम किया, जिससे पूरे देश में एक माहौल बना। इसके बाद युवाओं के इस समूह ने धरना शुरू कर दिया और सोनम वांगचुक जी भी भूख हड़ताल पर बैठ गए। कांग्रेस ने भी इसमें कोई कमी नहीं छोड़ी—हमने हर जिले और हर ब्लॉक में व्यापक आंदोलन किए।
इस पूरी स्थिति से ऐसा माहौल बना कि मोदी सरकार पर भारी दबाव आ गया। उन्हें डर था कि यदि यह आंदोलन पूरी तरह से राहुल गांधी जी के नेतृत्व में आगे बढ़ा, तो इसे संभालना मुश्किल हो जाएगा। इसी दबाव में सरकार ने आनन-फानन में समझौता कर लिया और दो दिन में समझौते की कॉपी देने का वादा किया। अब युवा आरोप लगा रहे हैं कि वे इंतजार ही करते रह गए और वह 'दो दिन' आज तक नहीं आए। इस तरह का धोखा नहीं होना चाहिए। जब भारत सरकार के दो-दो मंत्रियों की मौजूदगी में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर वादा किया गया था, तो अब इस वादाखिलाफी को देश और युवा कभी माफ नहीं करेंगे।
पत्रकार: सर, आपने जो दुष्कर्म और हत्या के मामलों को लेकर सवाल उठाए थे, उस पर जोगाराम पटेल जी का कहना है कि पिछली सरकार की तुलना में अपराध कम हुए हैं।
जवाब: जोगाराम पटेल जी हों या हमारे शेखावत साहब, आप इनके बयानों पर मुझसे क्यों टिप्पणी करवाते हैं? आंकड़े पुलिस विभाग और भारत सरकार की एजेंसी NCRB के पास उपलब्ध हैं, उन्हें देखकर कोई भी सच्चाई समझ सकता है। ये नेता तो सिर्फ मुख्यमंत्री जी को खुश करने के लिए बयानबाजी करते रहते हैं।
पत्रकार: पंचायत चुनावों को लेकर आपकी क्या राय है?
जवाब: राज्य में बहुत अच्छा माहौल है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में तैयारियां शुरू कर दी हैं। हमें पूरा विश्वास है कि जनता हमारा समर्थन करेगी और हमें सफलता दिलाएगी।
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