Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

अहमदाबाद में गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में जातिगत जनगणना के विषय में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित किया :

दिनांक
05/09/2026
स्थान
अहमदाबाद


अहमदाबाद में गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय में जातिगत जनगणना के विषय में आयोजित विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित किया :

आज जो जातिगत जनगणना, कास्ट सेंसस की बात लंबे अरसे से जो कांग्रेस और राहुल गांधी जी, खड़गे साहब उठा रहे हैं।
राहुल गांधी जी नेता प्रतिपक्ष बने, तो उनको कहना पड़ा हाउस के अंदर भी कि आप करवाइए, कास्ट सेंसस आवश्यक है।
आज़ादी के लगभग 80 साल हो गए अब तो, तो इसको गंभीरता से लीजिए। यहाँ तक कहना पड़ा कि अगर आप नहीं करवाएंगे तो फिर हम करवाएंगे।

इसके उनके कहने का तात्पर्य आप समझ गए होंगे। अगर आप नहीं करवाएंगे तो हम करवाएंगे, मतलब इतना उन्होंने इस बात को एम्फेसिस दिया था।

और आखिर में मोदी जी को, उनकी सरकार को उनकी बात को स्वीकार करना पड़ा। आप सबको मालूम है कि लास्ट सेंसस जो हुआ था, वो 1931 में हुआ था।

1931 के सेंसस के बाद में कभी जातिगत सेंसस हुआ ही नहीं। लगभग 100 साल हो जाएँगे, 31 का मतलब, 26 चल रहा है, 4 साल के बाद में। तो 90-95 साल के बाद में सेंसस करने की माँग उस रूप में की गई, जिससे कि सही गिनती हो जाए। जो यह बार-बार हर कास्ट के अंदर एक रहता है कि हमारी जाति के इतने लोग हैं, उनकी जाति के इतने लोग हैं, एक हमेशा के लिए यह इशू खत्म हो जाए।

और सब मिलके फिर जो है एससी, एसटी, ओबीसी, माइनॉरिटी जो भी है, जनरल कास्ट सब मिलके ही प्लानिंग करें और आगे बढ़ें। यह उद्देश्य राहुल जी का था।

और उसी रूप में यह जनगणना के फैसले जो हुए कैबिनेट से, तो हम सब ने स्वागत किया कि यह फैसला मोदी जी ने ठीक किया है। पर मोदी जी की और एनडीए गवर्नमेंट की नीयत ठीक नहीं है, नीयत ठीक नहीं है। क्योंकि जो जातिगत जनगणना का जो मौजूदा प्रारूप जो प्रस्तुत किया गया है, 40 प्रश्न दिए गए हैं, उसमें 10वां पॉइंट जो है वो अपने आप में यह स्पष्ट करता है कि जातिगत जनगणना करवाने की नीयत ठीक नहीं है।

तो हमारी माँग यह थी कि आप जो है पद्धति जो है, जो अपनाई है आपने वो गलत अपनाई है। उससे कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि आप सबको मालूम होगा, आप तो मीडिया के लोग हैं, पहले भी एसईसीसी का एक सर्वे हुआ था। सोशियो-इकोनॉमिक कास्ट सेंसस, यूपीए गवर्नमेंट के वक्त में हुआ था और वो कास्ट सेंसस जो हुआ, तो 46 लाख जातियों के नाम आ गए, 46 लाख क्योंकि देश के अंदर तो जातियाँ जो केंद्र सरकार की और राज्यों की है, सब मिला के 4,200 हैं।
तो 4,200 जातियाँ हैं, उनकी जनगणना करवाने की बात होनी चाहिए। उसकी बजाय उन्होंने करवा दिया कि जो जिसके घर पे गए, उसको कहते हैं ओपन एंडेड। जो आप जाओ, वो जो बोलेगा वो लिख दो खाली, स्पेलिंग कुछ भी हो।
एग्जांपल के रूप में मेरी सरनेम गहलोत है, और मैं खुद भी ओबीसी से आता हूँ। अब गहलोत जो है, जनरल कास्ट के अंदर कई लोग लगाते हैं, गहलोत तो ओबीसी में भी है, गहलोत शेड्यूल कास्ट के अंदर भी है, गहलोत राजपूतों में भी है, जाटों के अंदर भी है।

तो यह क्या हुआ कि गहलोत के सरनेम में जी-ई-एच-एल-ओ-टी लिखता हूँ। और कुछ लिखते हैं जी-ए-एच-एल-ओ-टी लिखते हैं, तो दो हो गई। भाई 46 लाख कैसे हो गई? जितनी जातियाँ हैं, उनके गोत्र हैं, उनकी स्पेलिंग है, कुछ भी हो लिख दो खाली आप तो। जब जाएगा जनगणना वाला, जो जाति बोल गया, स्पेलिंग बोल गया, वो लिखा जाएगा। तो 46 लाख हो गए थे।

तो सुप्रीम कोर्ट के अंदर इसी भारत सरकार ने, एनडीए गवर्नमेंट ने उनको कहना पड़ा कि यह जो सुप्रीम कोर्ट में शिक्षा मंत्रालय ने हलफनामा दिया कि यह कास्ट सेंसस के लिए तो ड्रॉप-डाउन जो सिस्टम है, जिसमें जाति का वर्ग बन जाता है। उन जातियों में भी आपको पहले फिक्स रहती हैं 4,200 जातियाँ। उसमें पूछा जाएगा हर राज्य के अंदर अलग-अलग ओबीसी कमीशन बना हुआ है, जाति फिक्स है ओबीसी।

पूछा जाएगा जैसे शेड्यूल कास्ट, शेड्यूल ट्राइब में होता है, वहाँ यह प्रॉब्लम नहीं आती, वहाँ भी गोत्र बहुत होते हैं। उसी सिस्टम को आप यह भी करवाओ, यह कांग्रेस की माँग है, राहुल गांधी जी की माँग है, खड़गे साहब की माँग है, हम सब की माँग है।

उसके बगैर जो यह करवा रहे हैं, उसका कोई लाभ नहीं मिलेगा करवाने के बावजूद भी, गलतफ़हमी और अलग से होगी। हमारी माँग है कि जो प्रश्नावली बनाई है, वो नई बनाई जाए। उसमें एक्सपर्ट की राय ली जाए, पॉलिटिकल पार्टीज की राय लें और पब्लिक की राय लें, उसके बाद में प्रश्नावली बनाएँ, फिर आप काम शुरू करें, तब जा करके यह जो एक चुनौती सामने आ गई है, प्रॉब्लम आ गई है, उसको हल कर पाएँगे।

यह खड़गे साहब वाला मामला था, अब आप बताइए, हल्द्वानी गए थे वो। मैं आज नहीं, बचपन से कहता हूँ मानवता पर कलंक कहता हूँ मैं। मैं बचपन से कहता हूँ मीटिंगों के अंदर, एक मनुष्य जो है, दूसरे मनुष्य के साथ में छुआछूत रखे, इससे बड़ा कलंक नहीं हो सकता, यह मानवता पे कलंक है। ह्यूमैनिटी पे कलंक है ही यह, और है देश के अंदर। जातियाँ अलग, धर्म अलग, गोत्र अलग, सब बातें हैं। पर छुआछूत तो नहीं होनी चाहिए ना? वो छुआछूत होती है।

अब आप बताइए, अगर मल्लिकार्जुन खड़गे साहब, जो कांग्रेस प्रेसिडेंट हैं, वो गए वहाँ पे तो उसके बाद में उस स्थान को गंगाजल छिड़क करके, हवन करके, शुद्धिकरण किया जाने का यह अप्रोच रखी गई, तो खड़गे साहब ने हाउस के अंदर कहा , "मैं शेड्यूल कास्ट का हूँ, दलित हूँ, मैंने आज तक दलित के नाम पे कभी कोई चीज़ नहीं माँगी है।"

यह जो कुछ भी इन्होंने किया मेरे जाने के बाद में, यह मेरे को नहीं बल्कि देश के तमाम दलितों की भावनाओं को ठेस पहुँची है, कांग्रेस पार्टी को भी पहुँची है, और लाइक-माइंडेड लोग जो हैं, कोई पार्टी के हों, हो सकता है आरएसएस और बीजेपी के भी हों, वो भी उनमें भी ऐसे लोग होंगे जो कहेंगे यह गलत तरीका है। तो कहने का मतलब है कि खड़गे साहब ने खुल के बात करी।

ऐसे लोगों की मैं निंदा करना चाहता हूँ । पर दुख इस बात का है, वही बात फिर आती है, पहले पार्लियामेंट में देखते थे कि कोई क्वेश्चन लगा हुआ किसी मंत्री का है, मंत्री गैलरी तक आ गया और उसको लगा कि मेरा क्वेश्चन आ गया है, आने वाला है, आ गया है, अनाउंस हो गया है वो भाग के आता अंदर, सांस फूलता था उसका, और सॉरी फील करता चेयर से पहले वो, और फिर वो जवाब उत्तर देता। सब परंपराएँ खत्म।

मोदी जी और अमित शाह जी अभी 19 दिन तक नहीं आए हाउस के अंदर। विपक्ष के नेता और माँग करते रहे बुलाने की। मैंने क्या कहा आपको? नाम सुन लेते थे कि नाम आने वाला है हाउस के अंदर, दौड़ के आते थे।
कोई घटना-दुर्घटना देश के किसी भाग में हो गई, किसी भाग में हो गई और गंभीर घटना होती थी, तो सुओ मोटो स्टेटमेंट गृह मंत्री देते थे। तमाम परंपराएँ खत्म कर दीं इन्होंने।

और वही बात आती है इसके लिए भी, नड्डा साहब जो हैं, जेपी नड्डा साहब नेता हैं उसके राज्यसभा के, खड़गे साहब जब बोले तो उन्होंने खड़े होकर कहा, "मैं इसको गंभीरता से लेता हूँ, हमारा कोई संबंध नहीं, पूरी जाँच करूँगा और सजा दिलवाएँगे।" जो भी उन्होंने कहा, एक्सएक्ट वर्ड तो मुझे याद नहीं। आप मुझे बताइए, उन बात को एक महीने से अधिक निकल गए।

तो हम पूछना चाहते हैं दो-चार क्वेश्चन मेरे हैं। एक तो अभी तक भी उत्तराखंड पुलिस तत्काल एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करी? तत्काल एफआईआर दर्ज करे। उपलब्ध जो वीडियो हैं, सोशल मीडिया पोस्ट्स हैं और आयोजकों के सार्वजनिक बयान क्या आए हैं, उसकी जाँच हो।

एससी/एसटी एक्ट जो है, नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम तथा अन्य लागू कानूनी प्रावधानों की क्या-क्या उनके ऊपर लग सकता है, उसमें वो कार्रवाई करें।

आयोजन करने वाले व्यक्तियों और संगठन की पहचान उनकी सार्वजनिक की जाए कि यह लोगों ने इस काम को किया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी साहब जो हैं, उनको समयबद्ध जाँच की घोषणा करनी चाहिए। जेपी नड्डा साहब बताएँ कि उनके राज्यसभा में दिए गए आश्वासन पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और प्रधानमंत्री जी, मोदी जी को, नरेंद्र मोदी जी को खुद को इस घटना की स्पष्ट शब्दों में निंदा करनी चाहिए और दलित समाज को पूरे देश भर के अंदर आश्वस्त करना चाहिए कि संविधान के साथ में किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा, यह हमारी माँग है।

अब आप बता दीजिए इसमें क्या बुरा है? उल्टा चोर कोतवाल को डांटे!

राहुल गांधी जी को सपोर्ट करेंगे, जैसे मैं बोल रहा हूँ आपके सामने। कल मेरे खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कर दें कि आपने अहमदाबाद में यह बातें बोली थीं। राहुल गांधी जी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करी, यही तो कहा जो मैं बोल रहा हूँ और राहुल जी के खिलाफ में एफआईआर दर्ज भी हो गई वहाँ। जिनके खिलाफ दर्ज होनी थी जेपी नड्डा साहब के आश्वासन के बाद में, वो तो नहीं हुई, और राहुल गांधी के खिलाफ कर दी!

तानाशाही प्रवृत्ति है इनकी, यह देश को तानाशाही की तरफ ले जाना चाहते हैं। इसीलिए ज्यूडिशियरी दबाव में है, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया दबाव में है, ईडी, इनकम टैक्स, सीबीआई दबाव में है और ऐसी हरकतें कर रहे हैं जैसे यह आपकी सेंसस करवा रहे हैं, उसकी विधि भी गलत पकड़ ली इन्होंने।

आप बताइए कि आप क्या चाहते हो देश के लिए? 29 लाख वोट बंगाल के अंदर सही थे, प्रोसेस पूरा नहीं कर पाए ज्यूडिशियरी, जो बैठाए थे उन्होंने जजेज को, तो यह कह दिया गया कि यह 29 लाख वोट या 27 लाख वोट जो भी थे, इस बार नहीं अगली बार वोट दे देंगे। आप बताइए, आप लोग बैठे हैं, अगर आपको कोई कहे, "इस बार थोड़ी चूक हो गई हमसे, नाम आपका रह गया, अब अगली बार देना वोट आप।" वोट का अधिकार संविधान की मूल भावना है। यह स्थिति है।

धन्यवाद आप सबका।

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