Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

विभिन्न मुद्दों को लेकर जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत की -

दिनांक
11/05/2026
स्थान
जयपुर


विभिन्न मुद्दों को लेकर जयपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से बातचीत की -

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम एशिया क्राइसिस के सन्दर्भ में लोगों से की गई अपील पर प्रतिक्रिया:
प्रधानमंत्री जी को ऐसी बातें कहनी है तो फिर देश के पूरे हालात क्या हैं और क्यों कहना पड़ा वो तमाम बातें देशवासियों के सामने स्पष्ट होनी चाहिए। खाली उन्होंने कह दिया कि सोना मत खरीदो या विदेश मत जाओ, उसकी आलोचना भी बहुत हो रही है और मीडिया वाले आलोचना कर रहे हैं।

मेरा मानना है कि राहुल जी ने जैसा कहा उनको गंभीरता से लेना चाहिए , वो नेता प्रतिपक्ष हैं और वो कहते हैं सोच समझ के कहते हैं बात और जिस प्रकार उन्होंने एकदम या तो उनको अभी दरें बढ़ानी होगी उसकी हवा बना रहे होंगे, ज्यादा संभावना यही लगती है जो राहुल जी ने बहुत पहले ही कह दिया था कि चुनाव समाप्त होते ही दरें बढ़ सकती है भूमिका बांधी है प्रधानमंत्री जी ने और उस रूप में देखता हूं उसको।

बंगाल चुनाव के परिणाम तथा केरल में मुख्यमंत्री के मुद्दे पर पूछे गए सवाल का जवाब :

बीजेपी ने भी दस- दस, बारह- बारह दिन लगाए हैं। राजस्थान में क्या हुआ था, कितने दिन लगाए थे ? ये दूसरी पार्टी में क्या प्रोसेस एडॉप्ट कर रहे हैं, उस पर कोई टिप्पणी करने का किसी को अधिकार नहीं है। और बाकी बंगाल में जो कुछ हुआ वो एक प्रकार से इतिहास में कलंक के रूप में माना जाएगा। पूरे इतिहास के अंदर बंगाल में जो कुछ भी तरीका अपनाया गया, जिस रूप में धनबल का प्रयोग हुआ, पूरे मुल्क में तो जब चुनाव होते हैं तो करीब साढ़े तीन लाख लोग लगते हैं सीआईएसएफ के या जो पुलिस वाले होते हैं, पूरे देश के अंदर, और पूरे बंगाल में ढाई लाख लगा दिए असेंबली चुनाव में।

SIR के रूप में 90 लाख से 27 लाख आ गए। 27 लाख लोगों का कन्फ़र्म हो गया कि ये जिंदा भी है, वोट देने का अधिकार रखते हैं, उसके बाद में उनका वोट नहीं पड़ पाया तो ये कितनी बड़ी दुर्भाग्य की बात है। एक भी वोटर को कैसे अलग कर सकते हो? और मैंने पहले भी कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनी, चुनाव पोस्टपोन करना चाहिए।
27 लाख का फैसला होना चाहिए।

इस प्रकार का जो चुनाव हुआ न , ये डेमोक्रेसी की हत्या के बराबर है। देश नहीं दुनिया में इसकी आलोचना हो रही है कि अगर यही तरीका अपनाए जाएंगे तो फिर विपक्ष का मतलब क्या रह जाएगा? इसका मतलब मोदी जी बोलते थे पहले कांग्रेस मुक्त भारत,फिर कहने लगे कि विपक्ष मुक्त भारत। अगर विपक्ष ही नहीं रहेगा तो फिर आप सोच सकते हो देश में क्या होगा। अभी देशवासी समझ नहीं पा रहे, वो सब शांत है। पूरा देश शांत है। हिंदू धर्म के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। हम लोग हिंदू नहीं है क्या? हिंदू कौन है सब इनको vote देता है। हिंदू कौन सब इनको वोट देता है ? सौ वोट पड़े हैं चुनाव में, 2014 के अंदर, सौ वोट में से 21 वोट पड़े हैं मोदी जी को, बीजेपी को। इसका मतलब क्या हुआ? 70 वोट तो खिलाफ पड़े हैं कम से कम। यही तो बात हुई और क्या हुई? तो क्या जो 31% वोट आया खाली सब हिंदुओं का है क्या? सब हिंदू ने जो 70% वोट नहीं पड़े हैं उसमें हिंदू नहीं है क्या? 69% वोट नहीं पड़े हैं उस वक्त में, बीजेपी खिलाफ पड़े वोट तो 69% वोट उस पर अधिकांश हिंदू है ना। हिंदू ने वोट इनको कहां दिया है? कहने का मतलब यह कि इस प्रकार की जुमलाबाजी करके जो भड़का रहे लोगों को, भ्रमित कर रहे हैं और बंगाल में कमाल ही कर दिया। जिस प्रकार से इन्होंने जो लेवल प्लेइंग फील्ड की धज्जियां उड़ाई है, बराबरी का कोई, कोई मापदंड नहीं रखा TMC के साथ में और TMC वालों ने भी गलती करी, उस कारण ये घुस गए, बीजेपी को घुसने का श्रेय किसी को जाता है तो जाता है ममता बनर्जी को, उनकी पार्टी को।

पर क्योंकि हमारा टार्गेट बीजेपी है क्योंकि ये सांप्रदायिक पार्टी है, ये अगर युवा पीढ़ी नहीं समझेगी, आज नहीं समझेगी, तकलीफ आएगी बाद में।

डेमोक्रेसी का जिंदा रहना सबसे बड़ा आवश्यक है, तभी वो गरीब का मान सम्मान कायम रहेगा, आम आदमी का अधिकार कायम रहेगा। अगर लोकतंत्र नहीं बचेगा तो क्या होगा? कल्पना कर सकते हैं कोई क्या।


नीट पेपर लीक को लेकर उठ रहे सवालों पर मेरी प्रतिक्रिया :

ओएमआर शीट का हुआ था,दबा दिया इन्होंने। इनके खुद के लोगों के नाम आ रहे थे उसके अंदर। यही यहां हो रहा है, अभी मैंने सुना तीस चालीस लोगों को इन्होंने अवैध रूप से हिरासत में ले रखा है। अरे भाई कार्रवाई करो। उन्होंने बेइमानी करी है तो एफआईआर दर्ज करो, कार्रवाई करो। क्यों नहीं करते हैं ? जानबूझकर कांग्रेस सरकार को बदनाम करने के लिए, जबकि कांग्रेस ने जो नौकरियां दी थी, उस वक्त में जमकर हमने नौकरियों के लिए अवसर प्रदान किए थे। पेपर लीक अगर हो गया मान लो तो हम ने इमीडीअट्ली कार्रवाई करी, बिना देरी के हमने पेपर को ही हमने रद्द किया।
एफआईआर दर्ज क्यों नहीं करते? एफआईआर दर्ज करें, कार्रवाई करें और बताएं कि भाई एफआईआर क्यों दर्ज करी गई। पब्लिक को बताएं छिपा क्यों रहे हैं लोग? राजस्थान से नीट का पेपर आउट होना यह इनके लिए शर्म बात नहीं है क्या? ये खुद मान रहे हैं। एसओजी वाला मान रहे हैं।

पूर्व मंत्री श्री महेश जोशी की सुबह पांच बजे की गई गिरफ़्तारी पर मेरी प्रतिक्रिया :

उस मामले में बोल चुका हूं मैं, पांच बजे सुबह उठा के ले आए, वो भाग रहा था क्या? ईडी ने बुलाया उनको ईडी का वहां गए, दो तीन दिन उनसे पूछताछ करी, अरेस्ट कर लिया। ये बुला लेते, बात करते, बात तो करते कम से कम , उनके बयान लेते, आप इमीडीअट्ली इस प्रकार से धमकाओगे, डराओगे तो यह नहीं भूलना चाहिए कि ये लोग सत्ता में कोई परमानेंट नहीं रहने वाले। इनको गलतफहमी है। कोई भ्रष्ट है, कांग्रेस राज में करप्शन किया है, आप कार्रवाई करो, सजा सुनिश्चित करो, हमें कोई ऐतराज़ नहीं है, कोई हो, भले कोई भी किसी के कितने भी नजदीक हो। आप तो पता कीजिए भाई कौन करप्शन किया है, कहां किया है, ईमानदारी से जांच करवाओ। उसके बाद में आप कार्रवाई करो, सजा मिले सुनिश्चित करो। सब कुछ करो, हमें कोई ऐतराज़ नहीं है। पर अगर आपने गलत तरीके से कार्रवाई करी, कल सत्ता इनकी भी नहीं रहने वाली। अधिकारी यही है।

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