Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

पंडित नेहरू की पुण्यतिथि के मौके पर पीसीसी में मीडिया से बातचीत की :

दिनांक
27/05/2026
स्थान
जयपुर


आज पंडित नेहरू की पुण्यतिथि के मौके पर पीसीसी में मीडिया से बातचीत की :

"देश को बचाना है तो पंडित नेहरू की विदेश नीति अपनानी होगी"

पंडित जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि के अवसर पर हम सब उनको याद करते हैं। आज़ादी की जंग के अंदर जो उनकी भूमिका रही, करीब नौ-दस साल तक वो जेलों में बंद रहे, लंबा संघर्ष किया गांधी जी के सान्निध्य में, लंबी कहानी सबको मालूम है, देशवासियों को मालूम है।

उन्होंने जो आधारभूत ढांचा तैयार किया देश में, उसी पे आज देश टिका हुआ है। उस ज़माने में आज़ादी मिलते ही, बड़े-बड़े बांध बनाए हों, इस्पात के कारखाने बनाए हों, एम्स बनाए हों, आईआईटी बनाई हों, शिक्षा में, स्वास्थ्य में, उद्योग-धंधों के अंदर, किसानों के लिए बांध का निर्माण, बिजली का उत्पादन उनकी एक लंबी कहानी है।

देश में पंडित नेहरू के बाद में 14 प्रधानमंत्री हुए हैं। शपथ तो 15 लोगों ने ली क्योंकि गुलजारीलाल नंदा साहब दो बार लिए, वरना 14 प्रधानमंत्री रहे हैं देश के अंदर।

पर नेहरू जी की विदेश नीति थी, उसको किसी ने भी डिस्टर्ब नहीं किया। चाहे वो पंडित नेहरू के विचारों से मिलते या नहीं मिलते हों, मुझे याद है एक बार वाजपेयी जी विदेश मंत्री बने थे, मोरारजी देसाई के वक्त में। तब भी उन्होंने कहा कि विदेश नीति पंडित नेहरू की ही चलेगी देश के अंदर। वो ज़माना हमने देखा है।

आज क्या देखते हैं? हमारी विदेश नीति की जो हालत हुई है, उसके कारण से पूरा देश चिंतित है। विदेश नीति ऐसी हो गई है कि कोई मुल्क आपके साथ ही खड़ा नहीं है। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, दुनिया का एक मुल्क आपके साथ आके खड़ा नहीं हुआ, कमाल कर दिया। पाकिस्तान के साथ में चाइना भी था, टर्की भी था। पर रशिया के साथ भी अब पहली वाली बात नहीं रही। किसी ज़माने में दोस्त हमारा रशिया हुआ करता था। इंदिरा जी के वक्त में ये सातवां बेड़ा जो है अमेरिका का, जो अब ईरान में जा रहा है, उससे बड़ा बेड़ा भेज दिया इंडिया के खिलाफ में जब युद्ध चल रहा था बांग्लादेश की आज़ादी का। इंदिरा गांधी ने अमेरिका की परवाह नहीं करी। आज अमेरिका कहता है कि आप तेल रशिया से नहीं खरीदो।

आपकी ट्रेड डील कितनी परसेंट होगी टैक्स की? 50, कभी 25 एक मज़ाक बना रखा है ट्रंप ने हमारे प्रधानमंत्री मोदी जी का भी। कभी कहते हैं कि वो दोस्त हैं मेरे, कभी कहते हैं मैं उनका पॉलिटिकल कैरियर खत्म कर सकता हूँ, कभी इंडिया के बारे में वो बहुत ही निम्न बातें करते हैं, हमारे देश के बारे में, और हम चुप हैं। ये हमारी विदेश नीति के हालात हैं।
अब भी मोदी जी को चाहिए कि गलती स्वीकार करके पुनः जो पंडित नेहरू की विदेश नीति थी, उसपे वापस देश को लाना चाहिए, अगर देश को बचाना है तो।

हालात बहुत गंभीर हैं। डेमोक्रेसी भी खतरे में आ गई है। इनकी जो अप्रोच है, बहुत भयानक है। धर्म के नाम पे देशवासियों को भड़का रहे हैं, गुमराह कर रहे हैं, वोट ले रहे हैं, पर देश हित में कुछ भी नहीं है। हालात बहुत गंभीर होते जा रहे हैं, इसपे हमें विचार करना चाहिए।

विदेश नीति के बारे में तो मैं बार-बार कहना चाहूंगा। देश की आर्थिक नीति भी, सामाजिक नीति भी, राजनीतिक स्थिति भी तमाम डिपेंड करती हैं कि आपकी विदेश नीति क्या है। क्योंकि दुनिया ग्लोबल वर्ल्ड हो गया है, इंटरनेट की सेवाएं हैं, पूरी दुनिया से हम जुड़ चुके हैं। पहले वाली बात नहीं रही कि अमेरिका में क्या हो रहा है तो हमें मालूम नहीं पड़ता था। अब तो हर चीज़ का दुनिया के सब मुल्कों के अंदर इंटरनेट के माध्यम से सब पहुँचता है कि कौन क्या मुल्क में क्या घटनाएँ, दुर्घटनाएँ हुई हैं।

इसलिए हमारी विदेश नीति का जो महत्व है, वो प्रधानमंत्री मोदी जी की सरकार को समझना चाहिए और विदेश नीति वापस जो पंडित नेहरू की है, उसपे लाना चाहिए। तब तो ये देश आगे बढ़ पाएगा, वरना ये विश्व गुरु बनने की बात, या देश को विश्व गुरु बनाने की बात ये सब खाली कागजों में धरी रह जाएगी। ये मेरा मानना है।


मीडिया द्वारा पेट्रोल- डीजल के दामों में लगातार वृद्धि किए जाने के सवाल का जवाब :

रोज़ दाम बढ़ा रहे हैं। हम तो बार-बार कह रहे हैं कि इसका फायदा स्टेट गवर्नमेंट को भी मिल रहा है। मैं स्टेट गवर्नमेंट से कहना चाहूंगा कि जो लगातार इतना फायदा हो रहा है, उसका कम से कम आधा हिस्सा तो जनता को वापस देना चाहिए। आधा भी वापस देंगे तो डीज़ल-पेट्रोल के दाम कुछ कम हो सकते हैं। जितना फायदा भारत सरकार का बढ़ता है, उसी अनुपात में स्टेट का वैट भी बढ़ता है। स्टेट का वैट बढ़ रहा है, लेकिन उसकी किसी को कोई परवाह ही नहीं है।

ये लोग उल्टा झूठ बोल रहे हैं कि पेट्रोल पंपों पर कोई लाइनें नहीं हैं, पेट्रोल की कोई कमी नहीं है। ये एक नई तरह की अप्रोच बन गई है। अगर वास्तव में कोई कमी है, या कोई कारण है जैसे दुनिया में युद्ध चल रहे हैं, ईरान, अमेरिका और इज़राइल के हालात हैं तो देश को सच्चाई बताइए। हम बार-बार यही कह रहे हैं। राहुल गांधी जी भी यही कह रहे हैं कि देशवासियों को विश्वास में तो लीजिए। लेकिन आप लोगों को विश्वास में नहीं ले रहे हैं।

राहुल जी नेता प्रतिपक्ष हैं। उन्होंने हर मुद्दे पर आपको पहले ही चेताया है। नोटबंदी के समय भी कहा था, कोविड के दौरान भी आगाह किया था। हर बार वो कहते हैं कि उनका आकलन यही है। नेता प्रतिपक्ष का एक अलग औरा होता है। उनके पास देश-दुनिया से अलग-अलग स्रोतों से जानकारियां और फीडबैक आते हैं। उसी आधार पर वो अपनी बात रखते हैं। लेकिन जिस गंभीरता से नेता प्रतिपक्ष की बात को लिया जाना चाहिए, वैसी गंभीरता आप दिखाते ही नहीं हैं। देश में तो पक्ष तभी है जब विपक्ष भी है, डेमोक्रेसी के अंदर, लेकिन आज ये स्थिति बनी हुई है।



राजस्थान में बिगड़ते हालातों पर प्रतिक्रिया :

राजस्थान की स्थिति के बारे में मैं आपको बार-बार बता चुका हूँ। मैंने कोटा जाने का फैसला इसलिए किया है क्योंकि वहाँ एक प्रिंसिपल, जो रिटायर हो चुके थे, पार्टी से लौटते समय नाले में गिर गए और उनकी मौत हो गई। मैं सरकार को यह संदेश देने जा रहा हूँ कि पूरे राजस्थान में नालों, खाइयों और सीवरेज सिस्टम की स्थिति पूरी तरह चरमरा गई है। जयपुर में ही 500-600 नाले हैं, लेकिन मैंने सुना है कि उनमें से मुश्किल से 100 ही ठीक किए गए हैं। यही हाल पूरे प्रदेश का है।
यह घटना इसलिए सामने आ गई क्योंकि मृतक एक प्रिंसिपल थे। लेकिन न जाने कितने लोग रोज़ फ्रैक्चर का शिकार होते होंगे, कितनों को ब्रेन हैमरेज होता होगा, कितनों की हड्डियां टूटती होंगी, जिनकी किसी को खबर तक नहीं लगती। पूरे प्रदेश में सड़कें खुदी पड़ी हैं और उन्हें ठीक नहीं किया जा रहा है। सरकार पेमेंट नहीं कर रही, इसलिए ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। कई जगह आधा-अधूरा काम बीच में ही रोक दिया गया है। क्या ये बातें मुख्यमंत्री तक नहीं पहुँचतीं? हर विभाग का ठेकेदार परेशान है। उनका कहना है कि बिना पेमेंट के वे आगे काम कैसे करें। सभी ठेकेदार बड़े नहीं होते, छोटे ठेकेदार भी होते हैं। हालत यह हो गई है कि काम बंद पड़े हैं और जनता परेशान हो रही है। स्थिति बेहद गंभीर है।

अस्पताल में चार प्रसूताओं की मौत हो गई। जो महिलाएं बच्चे को जन्म देने अस्पताल गई थीं, वे खुद ही अपनी जान गंवा बैठीं। उनके परिवारों पर क्या बीतती होगी? लेकिन सरकार में कोई संवेदनशीलता दिखाई नहीं देती।




मीडिया द्वारा यह कहे जाने पर कि राजस्थान में अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है :

देखिए, हर सरकार दूसरी सरकार के बारे में अपने फीडबैक के आधार पर बात करती है। अब जनता को फैसला करना है कि जो वो कहते थे वो सही था या जो हम कह रहे हैं वो सही है। अंतिम फैसला जनता को ही करना है।

हमारा फीडबैक यह है कि भरतपुर, जो उनका खुद का जिला है, वहां एक ज्वेलर को गोली मार दी गई। आखिर क्या हुआ? शायद 20 दिन बाद जाकर गिरफ्तारी हुई। हम तो उनके घर जाने वाले थे, लेकिन हमारे जाने से दो दिन पहले ही गिरफ्तारी हो गई, इसलिए हमने कार्यक्रम स्थगित कर दिया। कहने का मतलब यह है कि स्थिति नाजुक बनी हुई है।

मुख्यमंत्री दौरा करे, हमें ऐतराज नहीं है , और दौरा होना भी जरूरी है पर आप हिसाब लगा लीजिए, भजनलाल जी, जो हमारे पंडित भजनलाल जी को मैं कई बार कहता हूँ, कोई कहते हैं पंडित कहना ठीक है, कोई कहते हैं पंडित कहना ठीक नहीं है, वो अलग बात है। मैं तो इनोसेंटली कह रहा हूँ। पर मान लो, भजनलाल जी की जगह मैं कहूँ मुख्यमंत्री, माननीय मुख्यमंत्री जी, तो मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि राजस्थान में कितनी जगह आपने चौपाल लगाई हो, या कितनी जगह आप दौरे किए हों कितनी जगह आपने वहां पर जनसुनवाई करी। कितनी जगह लोगों की समस्याएं सुनकर मौके पर समाधान करवाया है? प्रदेशवासियों को यह भी बताया जाना चाहिए।

सिर्फ बर्थडे पार्टियों में जाना, चाहे किसी विधायक की हो या किसी नेता की, या फिर लगातार दिल्ली के दौरे करना उसका प्रदेश को क्या लाभ हुआ, यह भी जनता को बताया जाना चाहिए। अगर कोई उपलब्धि हुई है तो उसका असर जमीन पर भी दिखना चाहिए। फिलहाल वह कहीं लागू होती नजर नहीं आ रही है।

अब वे 32 लाख करोड़ रुपये के निवेश की बात करते थे। लेकिन उसमें से लगभग 28 लाख करोड़ रुपये केवल सोलर प्लांट्स से जुड़े प्रस्ताव थे। ‘राइजिंग राजस्थान’ नाम के उस कार्यक्रम में विदेशी दौरे किए गए, बड़े-बड़े आंकड़े बताए गए, लेकिन आज स्थिति यह है कि अधिकांश परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। कंपनियों का कहना है कि जब तक भारत सरकार लाइनें नहीं बिछाएगी, तब तक वे बिजली भेजेंगे कहां? ऐसे में प्लांट लगाकर भी उन्हें नुकसान होगा। इसलिए काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

मैं नहीं कहता 32 लाख करोड़ के सब आते ही आते हैं। कभी आते भी नहीं हैं। गुजरात में मोदी जी करते थे, हमने भी किया प्रोग्राम, अगर 25 परसेंट भी आ जाएं तो भी कोई बात नहीं है। पर आप गुमराह कर रहे हो प्रदेशवासियों को, ये अच्छी बात नहीं है।

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