Shri Ashok Gehlot

Former Chief Minister of Rajasthan, MLA from Sardarpura

मीडिया के साथियों से बातचीत

दिनांक
30/07/2026
स्थान
जयपुर


आज 49 सिविल लाइंस आवास पर मीडिया के साथियों से बातचीत की :

मालवीय जी आप सबको मालूम है कि चले गए थे, कुछ गलतफहमी हो गई, अब वापस पार्टी में लौट आए। और क्योंकि उनके वक्त में काम बहुत हुए थे वहाँ, सिंचाई के भी, शिक्षा के भी, सड़कों के भी, एनीकट के भी, कमी नहीं रखी पार्टी ने।

वह वापस आ गए, पर वहाँ के कार्यकर्ताओं की इच्छा थी, और जो बाप पार्टी में चले गए थे उन सब की इच्छा थी कि एक बार हमें मिलाओ, उनसे मिलाओ और पीसीसी में डोटासरा जी से मिलाओ। तो अभी ये वहीं जा रहे हैं। उनको दोपहर का टाइम दिया गया है।

तो आए सिर्फ ये इस काम के लिए कि हमारी इच्छा थी, दिल में तमन्ना है कि हम तो जिंदगी भर कांग्रेस में रहे थे, कांग्रेस ही हमारे दुख-सुख में काम आई। अकाल-सूखे में तो कमाल ही किया। मनरेगा सोनिया गांधी जी, मनमोहन सिंह जी लेके आए थे। उसमें तो कमाल ही कर दिया, तीन-तीन लाख मजदूर लगते थे, तीन-तीन लाख मजदूर किसे कहते हैं, डूंगरपुर और बांसवाड़ा में।

तो इतने काम हुए, अब सब काम ठप हो रहे हैं, तो दुखी भी हैं। इस कारण वो मिलना चाहते थे कि कम से कम वापस विश्वास दिलाएं, 'हम चले गए थे बाप पार्टी में, वापस हम आए आपके साथ में, क्योंकि आपकी कांग्रेस सरकार ने अच्छे काम किए, नरेगा चलाया था।' फिर लोग सब सोनिया गांधी जी को, मनमोहन सिंह जी को, सबको याद कर रहे हैं कि अब क्या होगा हमारा? 1 जुलाई से काम बंद हो गए नरेगा के। तो ये तमाम उनकी भावनाएं थीं।

तो हमने उचित समझा कि भाई चलो, इनकी भावना है, तो मैं भी सुन लूं क्या कह रहे हैं, क्या कहना चाहते हैं। अच्छा लगा मुझे, अच्छी मीटिंग हुई। और मुझे उम्मीद है कि बाप पार्टी जो बन तो गई है, उसका फायदा उनको नहीं मिल रहा है, वो नुकसान कर रहे हैं कांग्रेस पार्टी का। फायदा मिल रहा है बीजेपी को। वो खड़े होते हैं तो ट्रायंगुलर फाइट हो जाती है तो उसमें फायदा बीजेपी को मिलता है। तो कम से कम बीजेपी जैसी पार्टी जो फासिस्टी पार्टी है, लोकतंत्र खत्म कर रही है देश के अंदर, दिल्ली में क्या हो रहा है आपने देखा अभी? युवा पीढ़ी पूरी सड़कों पर आ गई देश भर के अंदर। राहुल गांधी जी ने जिस प्रकार से आह्वान किया है उनका, लड़ाई-संघर्ष कर रहे हैं छात्रों के लिए, युवाओं के लिए। तो बीजेपी अब ढलान में है और बीजेपी का ग्राफ नीचे आ रहा है,मोदी जी का नीचे आ रहा है।

तो मैं समझता हूं कि बाप पार्टी के लोग वापस कांग्रेस में आएं। कांग्रेस ने आदिवासियों को हमेशा प्रेफरेंस दी है, ध्यान रखा उनका, आगे भी ध्यान रखेंगे, ये विश्वास हमने दिलाया।

पत्रकार: सर, राहुल गांधी जी को संसद में नहीं बोलने दिया गया, और अब तो अमित शाह के इस्तीफे की भी मांग हुई है इस बार।

जवाब : देखिए, वो तो इनका रवैया है। राहुल गांधी जी जब बोलते हैं तो आपको मालूम है कि शुरू से ही ये लोग ये प्रयास करते हैं कि माइक बंद कर दो बार-बार। और स्पीकर साहब कहते हैं कि 'मेरे पास बटन नहीं है।'
अरे, आपके पास बटन नहीं है, पर आपके देख-रेख में हाउस का मैनेजमेंट होता है। आप जो इशारा करोगे या आप लोग ब्रीफ करोगे अपने अधिकारियों को जो माइक का संचालन करते हैं, वही तो माइक बंद करते हैं। आपके पास बटन है कि नहीं, उससे क्या मतलब? राहुल गांधी जी का बोलते वक्त में माइक बंद होता है कि नहीं होता, आपको इसको देखना है। आप उसका जवाब दो। या तो कहो, 'राहुल जी, आप कैसे बार-बार कहते हो माइक बंद हो जाता है? माइक बंद नहीं हो रहा है, मैंने पता कर लिया है।'

वो आप नहीं कहते हो। 'मेरे हाथ में नहीं है' इसका मतलब आपके हाथ में टेबल पर नहीं होगा। मुझे पता नहीं, है कि नहीं वो, वो जैसा कहते हैं टेबल पर मेरे माइक का बटन नहीं है। बंद तो होता ही है बार-बार माइक, बोलने दिया नहीं जाता उनको, और कल भी ऐसा ही हुआ है।

पत्रकार: सर, बीजेपी के एमपी हैं निशिकांत दुबे, उन्होंने कहा है कि जो पंडित नेहरू अय्याश थे, हाउस में कहा था।

जवाब : ऐसे लोगों के बारे में मैं कोई कमेंट नहीं करना चाहता। ऐसे लोग बहुत ही निम्न स्तर के कमेंट्स करते हैं ना, पूरा देश जानता है, ये समय की बात है। समय वो आएगा, इनको कोई पूछेगा भी नहीं देश के अंदर। इनके खुद के क्षेत्र में कोई नहीं पूछेगा, ऐसी इनकी स्थिति है।

पत्रकार: सर, ये जो विधेयक पास हुआ है, एंटी-पेपर बिल जो पारित हुआ है, उसको लेकर क्या कुछ कहेंगे?

जवाब: अब वो बिल तो फेस सेविंग वाली बात है। जो वादा किया उनको निभाना था। विपक्षी पार्टियों से सलाह करके फिर बिल लाते वो, तो और ज्यादा अच्छे ढंग से ला सकते थे। तो किसी ने ठीक कहा भाई कि सजा आपने बढ़ा दी है, हमने ही यहां आजीवन कारावास कर रखा है। 10 करोड़ रुपये हमने ही कर रखे हैं जुर्माना। प्रॉपर्टी सीज करने का हमने ही कर रखा है। सब कुछ कर रखा है। पर ये बात में दम है कि सजा मिलना और उसकी बात करना एक बात है और पेपर लीक में अगर मैनेजमेंट ढंग से नहीं होगा, तो पेपर लीक बाद में भी होंगे। सजा के तो आप जानते हो कि चोरियां होती हैं, तो कानून तो बने हुए हैं चोरों के लिए भी, फिर भी चोरी होती है। तो ये बहुत गंभीर विषय था, पूरे देश को, राज्यों को फायदा मिलता।

इतनी गैंग बन चुकी है हर राज्य में, इन्होंने बदनाम तो राजस्थान को कर दिया, इनको पूछो तुम्हारे खुद के राज्यों में क्या स्थिति है? गुजरात में क्या है, यूपी में क्या है, बिहार में क्या है जहाँ सरकार इनकी है, आर्मी में क्या है, ज्यूडिशियरी में क्या है? सब जगह पेपर आउट होते हैं, क्यों हो रहे हैं? 150 पेपर आउट हो गए देश के अंदर, जो बता रहे हैं। अब बताइए, अभी 3-4 पेपर आउट हो गए यूपी के अंदर।

तो इनको चुनाव जीतना था तो इसलिए इन्होंने ये बातें कर दीं। कोई दम नहीं था। हमने तो बाकायदा वापस प्रक्रियाएं पूरी करीं, नौकरियां लगा दीं बच्चों की। अब नौकरियां अटकी पड़ी हैं इनकी, लग नहीं रही हैं। पेपर आउट अभी नहीं हो रहे, इसलिए नहीं हो रहे कि हमने कानून पास किया है। हमने कुछ बदला था प्रोसेस को, उसका असर है। वो तो रुकना ही था। पर ये क्या श्रेय ले रहे हैं उसका? इनको पूछो आपने क्या किया? आपका ओएमआर शीट जो है, उसमें जो पकड़े गए उनकी जमानत हो गई, परवाह नहीं करी आपने। उसका कोई जवाब दे नहीं रहे ये लोग।

तो ये तो जो सरकार चल रही है राजस्थान में, अब उसके बारे में मुझसे क्यों टिप्पणी करवा रहे हो? हर घर में, हर गांव में चर्चा सरकार की है। अब वो नेगेटिव है या पॉजिटिव है, इसका पता मुख्यमंत्री को आग्रह करूंगा कि अगर ऐसी स्थिति बनी रही कुशासन की, तो नुकसान पब्लिक को है। हम चाहते हैं आप सुशासन दो। 5 साल राज करो, हमें एतराज नहीं। पर सुशासन दोगे तो हमारा इंटरेस्ट आपकी सरकार में नहीं है, अगली बार तो हमारा आना निश्चित है, सरकार कांग्रेस की बनेगी हम जानते हैं, पर कम से कम 5 साल तो काम तो हों जनता के! उसमें हमारी रुचि है, इसलिए हम कहते हैं आप सुशासन दो, हम आपके साथ हैं।

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