प्रेस से बातचीत - सरकार को अविलंब दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति करनी चाहिए।
दिनांक
02/09/2026 |
स्थान
जयपुर
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प्रेस से बातचीत - सरकार को अविलंब दिव्यांगजन आयुक्त की नियुक्ति करनी चाहिए।
काफी बड़ी तादाद में दिव्यांगजन आए थे और उमाशंकर जी पहले कमिश्नर थे, उनके साथ थे। इनकी समस्या अलग ढंग की है। दिव्यांग कई तरह के होते हैं। किन्हीं को ट्राइसाइकिल की जरूरत होती है, कई उनका उपयोग नहीं कर पाते हैं। कई डेफ एंड डंब होते हैं, कई ब्लाइंड भी होते हैं तो यह सरकार के प्रायोरिटी में होना चाहिए। इनकी समस्याएं अलग तरह की होती हैं,उनको कैसे एड्रेस करें, यह सरकार का प्रयास होना चाहिए। अभी करीब 1 घंटा 40 मिनट तक इनकी समस्याओं को मैंने सुना और यह जब कमिश्नर थे हमारे, दिव्यांग कमिश्नर बनाए हुए थे उमाशंकर जी, तब उन्होंने जमकर काम किया था, सबने उनकी तारीफ करी। वह सुनवाई भी करते थे, आदेश-पारित भी करते थे ,हमारी गवर्नमेंट थी तो प्रायोरिटी थी, इसलिए आदेश इम्पलीमेंट भी होते थे।
अब दुर्भाग्य से इनका टर्म तो खत्म हो गया, सरकार चली गई। अभी तक कमिश्नर की नियुक्ति भी नहीं हुई है।
सरकार को चाहिए इमीडिएटली आयुक्त जो है दिव्यांगों का,उनकी नियुक्ति करें जिससे कि वह काम शुरू कर सकें और उनकी कुछ परेशानी हल हो सके,यह उनका सरकार का इमीडिएटली फैसला होना चाहिए कि कमिश्नर नियुक्त कर दें। विश्वविद्यालय हमने बनाए दो, एक जोधपुर में, एक जयपुर में। देखिए कितनी शर्मनाक बात है, विकलांगों की यूनिवर्सिटी बन जाए, राजस्थान देश का पहला राज्य होगा जहां दो विश्वविद्यालय हमने बनाए बाबा आमटे के नाम से बनाया विश्वविद्यालय। वीसी लगा दिए, कागजों में रखा, काम नहीं करने दिया। उनका टर्म खत्म हो गया, नया वीसी का तो पता ही नहीं क्या होगा, वह पड़ा हुआ है।
पेंशन इनकी ₹1000-1200 होती है,जब हमने हमारे वक्त में थी,15% हमने कहा कि बढ़ने चाहिए प्रतिवर्ष, वह एक बात है। आज ही मैंने 'X' में ट्वीट किया है कि कम से कम ₹3000 पेंशन हो विकलांगों की, और आधा पैसा स्टेट गवर्नमेंट दे, आधा पैसा सेंट्रल गवर्नमेंट दे। केंद्र सरकार को भी आगे आना चाहिए। कांग्रेस शासन में पहली बार केंद्र ने देना शुरू किया था राज्यों को। वह बहुत मामूली रकम 300 की है। 12 साल पहले कुछ आगे बढ़ा था, 12 साल से मोदी जी के राज में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। केंद्र सरकार आधा पैसा दे, आधा स्टेट गवर्नमेंट दे पर इनको कम से कम ₹3000 कम से कम मिले पेंशन। इतना महंगाई के दौर में यह इनकी स्थिति बहुत स्थिति अच्छी नहीं है।
फिर जो जैसे वह पोद्दार इंस्टिट्यूट है, वहां हम भी जाकर आए थे, जूली जी गए, फिर पैदल मार्च निकाला एमएलएज ने,उनकी समस्या देखी कि जो साइन लैंग्वेज वाले ही पढ़ा सकते हैं,वहां साइन लैंग्वेज के टीचर ही नहीं हैं वहां पर.
यह समस्याएं राजस्थान भर के अंदर हैं.मैंने करीब 25-30 लोगों को सुना होगा, ज्यादा होंगे मेरे ख्याल से। सबने अपनी-अपनी समस्याएं बताई हैं, हमने उनको रिकॉर्ड किया है। मैं खुद मुख्यमंत्री को पत्र लिखूंगा, हम उनसे रिक्वेस्ट करेंगे, आग्रह करेंगेकि आपकी सरकार को दिव्यांग जनों के ऊपर ध्यान देना चाहिए। उनकी परेशानियों को हल करना चाहिए और विश्वविद्यालय को प्रारंभ करना चाहिए प्रॉपर तरीके से,यह मेरा मानना है।
इसी प्रकार हाउसिंग की बात भी है, दवाएं मिलनी बंद हो गईं इनको, महंगी दवाएं हैं। कुछ पेरेंट्स भी आए थे, उन्होंने अपनी-अपनी कहानी बताई कि किस प्रकार के हमारे हालात हैं बच्चों के। तो तमाम तरीके से मैंने नोट किया है कि सरकार की टॉप प्रायोरिटी में यह समाज होना चाहिए, यह भी अपना एक समाज है अलग। इनकी फैसिलिटी अस्पताल में, पार्कों में बननी चाहिए। जिससे कि जा सकें यह लोग, चढ़ सकें, थ्री व्हीलर से ऊपर जा सकें। तो यह तमाम तरह से मैं समझता हूं कि सरकार को चाहिए, इनके नॉर्म्स बने हुए हैं, उनको भी पूरा इम्पलीमेंट करना चाहिए । 4% नौकरियां या 5% हमने की थी नौकरियां,वह लग नहीं पा रही हैं। उसकी अलग परेशानी है। इनकी तबादले, पोस्टिंग इनके होम डिस्ट्रिक्ट में होनी चाहिए, वह परेशानी है। कई परेशानी मुझे बताई गई है, तो मैं समझता हूं कि उनको हल करना सरकार की प्रायोरिटी में आना चाहिए।
पत्रकार: सर, राहुल गांधी जी को एमपी में जो रैली करने जा रहे थे, मतलब 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम, उसकी इजाजत नहीं मिली है।
जवाब : कहां मिली? कोटा में मिली, देहरादून में मिली, प्रयागराज में मिली और,फिर मिली वहां भी ऐसा ही होगा। यह तो क्या बताएं इनके बारे में! प्रशासन पहले मना करता है, बाद में देनी पड़ती है जब छात्रों का, युवकों का, युवतियों का जो प्रेशर पड़ता है 'जेन-जी' का, परमिशन देते हैं, पर उनके प्रोग्राम बहुत ही एक मैसेज दे रहे हैं कंट्री के युवाओं को। और छोटे बच्चे भी स्कूलों की जो समस्याएं हैं, उनको लेकर सड़कों पर आने लग गए हैं।
देखिए, बच्चों की, स्कूलों की प्रॉब्लम कोई अभी एकदम पैदा हुई है, ऐसी बात नहीं है। सरकार हमारी भी आई होगी, सरकारें गई होंगी। लाखों स्कूलें होती हैं, हजारों स्कूलें होती हैं, रिपेयर मांगती हैं, छत गिर जाती है। रेगुलर रिपेयर होने लग जाए मान लो, और जो पूरी तरह ध्वस्त होने की स्थिति में आ गईं, वहां नई स्कूल बन जाए। अगर प्रायोरिटी पर आप काम करने लग जाओ, तो फिर शिकायत लोगों को नहीं होती है। ना गांव वालों को होती है, ना बच्चों को होती है, ना समाज को होती है। सवाल यह आता है जब आप उसकी तरफ ध्यान नहीं दो। कोई अगर ध्यान आकर्षित करे आपका कि भाई यह तो बिल्डिंग गिरने वाली स्थिति बन गई है, कहीं यह बरसात में गिर नहीं जाए। तब भी आप लापरवाही करो, मुख्य शिकायत इन बातों की है।
तो मैं मानता हूं कि स्कूलों की मरम्मत टाइम पर हो, जिनकी स्थिति बहुत ही नाजुक है, उन बिल्डिंग को ठीक करें, नई बनाएं, तो एक अलग ढंग का यह काम चलते रहना चाहिए। अभी इस माहौल को देखकर सरकार ने घोषणा कर दी ₹12,000 करोड़ खर्च करेंगे। पूछो ₹12,000 करोड़ कब खर्च करोगे? चुनाव के बाद में खर्च करोगे? मुझे लगता नहीं कि यह कोई 12,000 छोड़िए, 4,000 भी खर्च कर पाएंगे। यह तो खाली इन्होंने आंकड़े बता दिए हैं।
अरे, पेमेंट तो आप कर नहीं पा रहे हो, ना पेंशन दे पा रहे हो, ना ठेकेदारों को पेमेंट कर पा रहे हो। पेमेंट की बहुत स्थिति खराब है। जो लोग मर गए बेचारे एक्सीडेंट में, ₹5 लाख का मैंने प्रोविजन किया था मरने वालों को देने का। ₹10 लाख का किया दो लोगों के मरने पर। उनका नहीं दे पा रहे हो पैसा। 2,500 लोगों का अटका पड़ा है पैसा, सैंक्शन होने के बाद में भी। वह क्या सरकार ₹12,000 करोड़ दे देगी! यह खाली छात्रों के गुस्से को दबाने के लिए किया गया है, इसमें कोई दम नहीं है।
पत्रकार: सर, आज बीकानेर में जिस तरीके से घटना हुई है उस पर प्रतिक्रिया?
जवाब : बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। अब टिकट तो सबको मिल नहीं सकता,एक को ही मिलेगा टिकट तो। उसमें आप अगर इस प्रकार दुर्व्यवहार करोगे किसी अध्यक्ष के साथ, तो वह बहुत निंदनीय है। पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए उनके खिलाफ में। अगर वह पार्टी कार्यकर्ता हैं पीटने वाले, या कोई दूसरों को बुलाकर ले आया कोई, जांच होनी चाहिए और पार्टी कार्यकर्ताओं, उनके खिलाफ भी एक्शन होना चाहिए।
पत्रकार: सर, चंदा चोरी का मामला उठा था, लेकिन आज नई ट्रस्टी में सीईओ बनाए गए हैं, एयर मार्शल जितेंद्र,उनको सीईओ बनाया गया राम मंदिर का। सवाल वही है कि क्या यह सारी चीजें रुक जाएंगी?
जवाब : रुकना चाहिए। पहले चोरी, उसकी जांच होनी चाहिए।
पत्रकार: सर, एक मानसून की स्थिति खराब है।
जवाब : मानसून की स्थिति देखिए, सरकार को मैं तीन-चार बार तो मैं आह्वान कर चुका हूं, आग्रह कर चुका हूं। फिर कहना चाहूंगा अपने अनुभव से, अगर सरकार ने अभी से ही, क्योंकि जो खरीफ की बुआई का टाइम तो चला गया है, अभी भी कहीं-कहीं हो सकता है हो जाए बुआई, अगर बरसात आए तो। स्थिति बड़ी नाजुक है। अगर अभी से ही तय नहीं किया, तो एक तो नरेगा बंद हो गया है। नरेगा बंद हो गया तो आपकी स्थिति ऐसी हो गई जो पहले थी कि आप 40% पैसा खर्च करो, 60% मिलेगा भारत सरकार से। नरेगा में आपको पूरा पैसा करीब-करीब भारत सरकार देती थी। नरेगा बंद होने के बाद में स्थिति बहुत नाजुक है।
अभी से इनको प्लान करना चाहिए मजदूरी देने के लिए, क्या-क्या काम की पहचान होनी चाहिए, क्या-क्या काम गांव में शुरू होंगे। पीने का पानी कहां से आएगा, मनुष्यों के लिए भी और पशुओं के लिए भी, चारे के प्रबंधन का क्या होगा। यह तमाम मास्टर प्लानिंग होनी चाहिए जिससे कि लोगों को कम से कम तकलीफ हो। अकाल-सूखे में तकलीफ तो होनी लाजिमी है, परेशानी कम से कम हो जाए, यह व्यवस्था सरकार को अभी से करनी चाहिए।'