मीडिया से बातचीत - "स्थानीय निकाय चुनावों में CM का रोड शो कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है।"
दिनांक
06/09/2026 |
स्थान
जयपुर
|
"स्थानीय निकाय चुनावों में CM का रोड शो कोई उपलब्धि नहीं, बल्कि सरकार की सबसे बड़ी नाकामी है।"
पत्रकार: स्थानीय निकाय चुनावों में मुख्यमंत्री रोड शो कर रहे हैं, इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: देखिए, यह सोचने वाली बात है कि मुख्यमंत्री को रोड शो करने की नौबत क्यों आई? यह पहली बार है जब कोई मुख्यमंत्री स्थानीय निकाय (नगर पालिका, नगर परिषद और नगर निगम) के चुनावों में रोड शो कर रहा है। यह उनके लिए कोई उपलब्धि (प्लस पॉइंट) नहीं, बल्कि उनकी सबसे बड़ी नाकामी (नेगेटिव पॉइंट) है।
उन्होंने खुद सिद्ध कर दिया है कि पिछले ढाई साल से सरकार कैसे चल रही है और जनता में कितना भारी आक्रोश है। टूटी सड़कों और खराब सीवरेज व्यवस्था से शहर बर्बाद हो रहे हैं; विकास का कोई काम नहीं हो रहा है।
हमारी सरकार के समय 'प्रशासन शहरों के संग' अभियान चलता था, जिसका लोग खुशी से इंतज़ार करते थे। हमने 12 लाख पट्टे बांटे थे। इनसे पूछिए, पिछले ढाई-पौने तीन साल में इन्होंने कितने पट्टे दिए हैं? मुश्किल से एक लाख भी नहीं दिए होंगे। इसी घबराहट और बौखलाहट में दिल्ली, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों से इनके मंत्री और हाईकमान के नेता यहां आ रहे हैं। आखिर स्थानीय चुनावों को इतना बड़ा टारगेट बनाकर क्यों चला जा रहा है?
इसका साफ मतलब है कि इन्हें जनता के आक्रोश का पता चल गया है और अब ये जनता को भ्रमित करने आ रहे हैं। मैं जनता से अपील करूंगा कि वे इनके भ्रम में न आएं। जब दुखी जनता इन्हें इन चुनावों में हराएगी, तभी इनकी नींद खुलेगी। हार के डर से ही सही, इनका 'डबल इंजन', हाईकमान और स्थानीय नेतृत्व काम करने का प्रयास करेगा, जिससे अंततः जनता का ही भला होगा।
आज भ्रष्टाचार की हदें पार हो चुकी हैं। इन चुनावों में हार के बाद जब इन पर अंकुश लगेगा, तभी सड़कें बनेंगी, पट्टे मिलेंगे और वास्तविक विकास होगा। हार से इन्हें यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि आगामी विधानसभा चुनावों में भी इनका सूपड़ा साफ होने वाला है।
मैं प्रदेशवासियों से अपील करता हूं कि इन्हें (भाजपा को) वोट की चोट से इतना ज़ोर का झटका दें कि इन्हें अपनी हार का अहसास हो जाए। तभी जाकर ये बचे हुए दो-सवा दो साल में जनता के लिए कुछ काम कर पाएंगे।
"बिना पैसे दिए सरकार में कोई काम नहीं हो रहा, विकास पूरी तरह ठप है, स्थानीय चुनावों में जनता देगी जवाब"
पत्रकार: ये सरकार अपने ढाई साल और आपके पांच साल के कार्यकाल की तुलना कर रही है, इस पर आपका क्या कहना है?
जवाब: मेरे पिछले जवाब में ही इसका उत्तर आ गया है। ये अपनी तुलना करते रहें, लेकिन लोकतंत्र में असली जवाब जनता ही देती है। अगर जनता इस कुशासन के बावजूद इन्हें जिताती है, तो यही स्थिति आगे भी बनी रहेगी और लोग परेशान होते रहेंगे। आज हर गांव और हर परिवार दुखी है। बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता और विकास पूरी तरह ठप पड़ा है।
हमारी अन्नपूर्णा जैसी योजनाएं बंद कर दी गई हैं, और अब लोग खाली थैले लेकर घूम रहे हैं। मैं बार-बार कह चुका हूं कि भले ही योजनाओं से मेरी फोटो हटा दें, लेकिन जनता की भलाई की स्कीमें बंद क्यों कर रहे हैं? जनता इस बात को भली-भांति समझ रही है।
लोगों को समय पर पेंशन नहीं मिल रही है। मैंने पेंशन बढ़ाकर ₹3000 करने की मांग की थी जिसमें आधा पैसा केंद्र और आधा राज्य दे, क्योंकि केंद्र अभी सिर्फ ₹300 देता है लेकिन सरकार की तरफ से इस पर कोई जवाब नहीं आया।
सत्ता में बैठे इन लोगों को जब तक इन चुनावों में करारा झटका नहीं लगेगा, ये कोई काम नहीं करेंगे। विपक्ष में होने के नाते यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम सरकार पर इतना दबाव बनाएं कि वे मजबूर होकर जनता के हित में काम करने की सोच पैदा करें।
"जातिगत जनगणना के नाम पर गलत प्रणाली अपना रही है सरकार"
पत्रकार: जातिगत जनगणना एक बड़ा मुद्दा है। कल आप अहमदाबाद में भी थे, इस पर लगातार चर्चा हो रही है...
जवाब: इस विषय पर मैं पहले ही विस्तार से अपनी बात रख चुका हूं। दरअसल, जातिगत जनगणना को लेकर इस सरकार की नीयत साफ नहीं है। वरना जो सिस्टम प्रणाली इन्होंने अपनाई है, वह गलत प्रणाली है।
SECC (सामाजिक-आर्थिक जाति जनगणना) का एक सर्वे हुआ था यूपीए गवर्नमेंट के वक्त में। हर घर-घर में गए, स्पेलिंग गलत लिखाई तो वो भी एक जाति हो गई। G-E-H-L-O-T मेरे नाम की स्पेलिंग मैं लिखता हूं, किसी ने G-A-H-L-O-T लिख दिया तो वो दो जाति हो गईं, गोत्र अलग हो गए। तो 46 लाख जातियां हो गईं। तो वो फिर जो डॉक्यूमेंट हैं, वो अब दबे पड़े हैं। SECC के डॉक्यूमेंट कोई काम नहीं आए।
काम मोदी जी ने लिया उनको। मोदी जी ने पूरे देश में यह भ्रम फैला दिया कि वे सबको 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दे रहे हैं, जो बिल्कुल गलत है। यह बीमा सबको नहीं, बल्कि सिर्फ उन लोगों को मिल रहा है जो SECC के डेटा में शामिल थे। हमारी भोली-भाली जनता इनके बहकावे में आ जाती है।
लेकिन अब लोगों का भ्रम टूट चुका है। अब जनता समझ गई है कि ये लोग असत्य बोलते हैं और सिर्फ झूठे वादे करते हैं। ना हर साल दो करोड़ नौकरियां मिलीं, ना अच्छे दिन आए, ना किसानों की आय दुगनी हुई, ना काला धन वापस आया और ना ही खातों में 15 लाख रुपये आए। ये लोग अब जनता के सामने पूरी तरह एक्सपोज़ हो चुके हैं और आगामी चुनावों में ये सारी बातें प्रमुखता से उठेंगी।
भाजपा सरकार ने राजस्थान में क्रिकेट को पूरी तरह बर्बाद कर दिया है"
पत्रकार: कल प्रधानमंत्री ने दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) में भी बात की?
जवाब: यूनिवर्सिटी और जेन-जी से जुड़े इन मामलों पर तो कल कन्हैया कुमार ने ही उन्हें माकूल जवाब दे दिया है। कल रात मीडिया के साथ अपने इंटरव्यू में कन्हैया कुमार ने प्रधानमंत्री जी की यूनिवर्सिटी वाली अप्रोच को पूरी तरह एक्सपोज़ कर दिया। जब उन्होंने ही सारी बातें स्पष्ट कर दी हैं, तो उस पर मैं और क्या बोलूं।
पत्रकार: राजस्थान में क्रिकेट का ढांचा भी पूरी तरह से खत्म हो गया है क्या?
जवाब: इस सरकार ने राजस्थान में क्रिकेट को पूरी तरह बर्बाद करके रख दिया है। पिछले पौने तीन साल में इन्होंने RCA (राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन) के चुनाव तक नहीं करवाए।
जयपुर में दुनिया का एक बहुत बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बन रहा था, जिसका काम आज रुका पड़ा है। जब वैभव गहलोत अध्यक्ष थे, तब सी.पी. जोशी जी और हम सबने हिंदुस्तान जिंक के अनिल अग्रवाल जी से बात की थी। उन्होंने इसके लिए करीब 150 करोड़ रुपये भी दे दिए थे। लेकिन आज स्थिति यह है कि वह स्टेडियम अधूरा पड़ा है।
क्या मुख्यमंत्री जी को यह नहीं सोचना चाहिए कि हमारी युवा पीढ़ी (Gen Z), लाखों-करोड़ों बच्चे और बुजुर्ग, जो क्रिकेट प्रेमी हैं, वे इस स्टेडियम के पूरा होने का इंतज़ार कर रहे हैं? स्टेडियम का काम रुकवाना और RCA के चुनाव न करवाना, ये तमाम बातें लोग देख और समझ रहे हैं। अगर सरकार को अभी भी अपनी इन गलतियों का एहसास नहीं हुआ, तो समय आने पर जनता इन्हें जरूर सबक सिखाएगी।